आईसीडीएस निदेशालय: भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार, मलाईदार कुर्सियों पर कई वर्षों से जमे 19 लिपिक हटाए
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भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलते हुए बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार निदेशालय (आईसीडीएस) की मलाईदार कुर्सियों पर वर्षों से जमे 19 लिपिकों को हटा दिया गया है। इनमें प्रधान व कनिष्ठ सहायक स्तर के लिपिक शामिल हैं। किसी निदेशक को पहली बार लिपिकों के कॉकस को तोड़ने में सफलता मिली है, जो 1995 से यहां जमे थे और निदेशक से लेकर प्रमुख सचिव तक को अपने इशारे पर नचाते थे।
पिछले साल ही ‘अमर उजाला’ ने निदेशालय में जमे लिपिकों के कॉकस के भ्रष्टाचार की पोल खोली थी। इसका संज्ञान लेते हुए शासन ने विशेष सचिव की अध्यक्षता में दो सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था। इसके बाद से बाबुओं के कॉकस को तोड़ने की कवायद शुरू की गई थी, लेकिन पंजीरी सिंडिकेट के दबाव में कॉकस में शामिल बाबुओं को नहीं हटाया जा सका था।
इसी बीच तत्कालीन निदेशक और प्रमुख सचिव को हटा दिया गया। आईसीडीएस की नवनियुक्त निदेशक डॉ. सारिका मोहन ने कार्यभार संभालने के बाद से ही वर्षों से निदेशालय में तैनात प्रधान व कनिष्ठ सहायकों के तबादले की कवायद शुरू कर दी थी। निदेशालय में स्वीकृत 8 पदों के सापेक्ष कुल 50 लिपिक तैनात थे।
दूसरी सूची तैयार कर अनुमोदन के लिए सीएम को भेजी
इनमें से कुछ ने कई वर्षों से खुद को निदेशालय से संबद्ध करा रखा था। लिहाजा निदेशक ने पहले चरण में 15 लिपिकों की संबद्धता समाप्त कर उनको मूल जिलों के लिए कार्यमुक्त कर दिया था। इसी कड़ी में तबादले की दूसरी सूची तैयार कर अनुमोदन के लिए मुख्यमंत्री को भेजी गई थी।
वहां से मंजूरी मिलने के बाद मंगलवार देर शाम तबादला सूची जारी कर दी गई। सूची में 26 लोगों के नाम थे लेकिन सूत्रों का कहना है कि अनुमोदन के लिए भेजने से पहले ही मंत्री के स्तर पर 7 लिपिकों के नाम काट दिए गए। इसलिए 19 लिपिकों का ही तबादला किया गया है।