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अब शुरू होगी ओबीसी आरक्षण सूची से 17 जातियों को निकालने की कार्रवाई

Sun, 30 Jun 2019 03:26 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sun, 30 Jun 2019 03:26 PM IST
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17 castes will be excluded from OBC reservation list.
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : amar ujala

उत्तर प्रदेश में 17 ओबीसी जातियों को सशर्त एससी प्रमाणपत्र जारी करने के शासनादेश के बाद अब इन जातियों को ओबीसी सूची से बाहर करने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। हालांकि, ओबीसी सूची से हटाए जाने का निर्णय भी हाईकोर्ट के आदेश के अधीन होगा। इस कार्यवाही को लेकर शासन ने मंथन शुरू कर दिया है।

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प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची में शामिल कहार व कश्यप समेत 17 जातियों - कहार, कश्यप, केवट, मल्लाह, निषाद, कुम्हार, प्रजापति, धीवर, बिंद, भर, राजभर, धीमर, बाथम, तुरहा, गोड़िया, माझी और मछुआ को अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र जारी करने के बाबत शासनादेश जारी कर दिया गया है।
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इस संबंध में एक रिट याचिका हाईकोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए जारी प्रमाणपत्र हाईकोर्ट के अंतिम आदेश के अधीन होंगे।

फिर गरमाएगी अति पिछड़ों की राजनीति

17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में परिभाषित करने का मामला एक बार फिर गरमा सकता है। इन जातियों के एससी के प्रमाणपत्र जारी करने की मांग लंबे समय से उठती रही है। विधानसभा से भी इस संबंध में प्रस्ताव पारित हो चुके हैं। जब तक राज्य सरकार केंद्र को प्रस्ताव भेजकर गृह मंत्रालय से आदेश जारी नहीं कराएगी, तब तक इन जातियों को अनुसूचित जाति के प्रमाण पत्र व लाभ मिलना आसान नहीं है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 17 अति पिछड़ी जातियों को एससी में शामिल करने की मांग का समर्थन करती रही है। सीएम योगी आदित्यनाथ सांसद रहते कई बार संसद में निषाद, मल्लाह, केवट, कश्यप, बिंद, धीवर आदि जातियों को अनुसूचित जाति का आरक्षण देने का मुद्दा उठा चुके हैं।

इसी क्रम में प्रमुख सचिव समाज कल्याण ने क्रमश: 12 जून व 24 जून 2019 को मझवार का प्रमाण पत्र बनाने व 17 अतिपिछड़ी जातियों के आरक्षण के संबंध में शासनादेश जारी किए हैं। यदि इन अति पिछड़ी जातियों से अनुसूचित जाति के प्रमाणपत्र बनने लगे तो भाजपा को इसका सियासी लाभ होगा। हालांकि इस शासनादेश से अति पिछड़ों व अनुसूचित जाति की राजनीति गरमा सकती है। पिछड़ी जातियां जहां इसका समर्थन करेंगी, वहीं अनुसूचित जाति के लोग विरोध जताएंगे।

ओबीसी को राहत, एससी पर बढ़ेगा दबाव

यदि 17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति का लाभ मिलने लगा तो इससे अन्य पिछड़ी जातियां लाभान्वित होंगी। पिछड़ी जातियों की बड़ी आबादी ओबीसी से एससी में शिफ्ट हो जाएगी। इससे एससी के आरक्षण में इन जातियों का दबाव और बढ़ जाएगा। अनुसूचित जाति के लोग इसका विरोध कर सकते हैं। वे आरक्षण कोटा बढ़ाने की मांग कर सकते हैं।

पॉलिटिकल स्टंट : लौटनराम
राष्ट्रीय निषाद संघ के सचिव लौटनराम निषाद शासनादेश को पॉलिटिकल स्टंट मानते हैं। उन्होंने कहा कि निषाद, मछुआरा जातियों व उपजातियों को इसका कोई लाभ मिलने वाला नहीं है। जब तक जनगणना 1961 के आधार पर मल्लाह, मांझी, केवट को मझवार मानते हुए स्पष्ट आदेश जारी नहीं होगा और ओबीसी की सूची से इन जातियों का विलोपन नहीं होगा, तब तक मझवार जाति का प्रमाणपत्र नहीं मिलेगा।

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