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श्रावस्ती हवाई पट्टी पर जल्द उतरेंगे यात्री विमान
Updated Sun, 08 Jul 2018 11:04 PM IST
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इकौना (श्रावस्ती)। श्रावस्ती हवाई पट्टी जल्द एयरपोर्ट के रूप लेगी। अधिकारियों के एक दल ने श्रावस्ती पहुंच जांच की। उनके अनुसार श्रावस्ती एयरपोर्ट आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा।
19 वर्षों से उड़ान का इंतजार कर रहे पर्यटकों को सुविधाएं मिलनी शुरू हो जाएंगी। बौद्ध, जैन तीर्थ, पर्यटन व पुरातात्विक स्थली होने के कारण श्रावस्ती का विश्व पटल पर विशेष महत्व है।
पर्यटन मानचित्र पर विश्व में स्थान बना चुके श्रावस्ती को हवाई सुविधा से जोड़ने के लिए 1986 में हवाई पट्टी निर्माण को स्वीकृति मिली थी। वर्ष 1993 में तत्कालीन राज्यपाल मोतीलाल बोरा ने हवाई पट्टी का शिलान्यास भी किया था।
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इसके बाद कई करोड़ खर्च कर श्रावस्ती में 1525 मीटर लंबे व 60 मीटर चौड़ी हवाई पट्टी पर रनवे निर्माण को मंजूरी दी गई।
निर्माण कार्य भी शुरू हो गया लेकिन 1325 मीटर निर्माण कार्य पूरा होते ही 23 सितंबर 1995 को तत्कालीन मुख्यमंत्री ने इसका उद्घाटन कर घोषणा की थी कि 10 अक्टूबर 1995 से लखनऊ से श्रावस्ती, बोधगया, कुशीनगर, सारनाथ के लिए उड़ान शुरू हो जाएगी।
लेकिन केंद्रीय नागर विमानन मंत्रालय की जांच में हवाई पट्टी के रनवे मानक विहीन बताकर यहां लैंडिंग पर रोक लगा दी गई थी। इसी के बाद श्रावस्ती में हवाई पट्टी पर सेवाएं ठंडे बस्ते में चली गई।
लाखों रुपये से तैयार टर्मिनल भवन व तैनात कर्मचारी विगत 19 सालों से यहां यात्री हवाई जहाज उतरने का इंतजार कर रहे है। अब एक बार फिर हवाई पट्टी पर विमान उतारने की मुहिम शुरू हो गई।
कुछ दिन पूर्व विमानन मंत्रालय के अधिकारी श्रावस्ती रनवे को मानक पूर्ण बनाने की कवायद कर रहे हैं। दो दिन पूर्व ही कुछ अधिकारी एयरपट्टी को एयरपोर्ट में तब्दील करने के लिए जांच करने आए थे।
मुख्यमंत्री ने भी श्रावस्ती हवाई पट्टी को हाईटेक एयरपोर्ट में तब्दील करने की घोषणा की है। इसी के बाद अब लोगों को उम्मीद है कि इस हवाई पट्टी पर जल्द ही यात्री विमान उतरेगा।
आपात स्थिति से निपटने में काम आएगी हवाई पट्टी
नेपाल की सीमा पर स्थित श्रावस्ती हवाई पट्टी देवीपाटन मंडल की अकेली हवाई पट्टी है। नेपाल में चीन के पसारे जा रहे पैर व पनप रही आईएसआई गतिविधियों से सीमावर्ती क्षेत्र संवेदनशील बना हुआ है।
आए दिन नेपाल सीमा से मादक पदार्थ, असलहे व नकली भारतीय मुद्रा भारतीय क्षेत्रों में आ रही है। ऐसी हालत में आपात स्थिति से निपटने के लिए श्रावस्ती हवाई पट्टी का महत्व और बढ़ जाता है।
पर्यटकों को मिलेगी राहत
श्रीलंका मंदिर के श्रद्धालोक महाथेरो, म्यामार के यू वो वोथा व कोरिया के आर्यानंदा का कहना है कि श्रावस्ती बौद्ध एवं जैन धर्म की तीर्थ स्थली है। यहां प्रति वर्ष लाखों विदेशी पर्यटक आते है।
हवाई सुविधा न होने से पर्यटकों को बनारस, लखनऊ से श्रावस्ती तक सड़क मार्ग से यात्रा करनी पड़ती है। सड़कों की खराब हालत से पर्यटकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। हवाई सेवाएं श्रावस्ती से प्रारंभ हो जाएगी तो लोगों को लाभ मिलेगा।
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19 वर्षों से उड़ान का इंतजार कर रहे पर्यटकों को सुविधाएं मिलनी शुरू हो जाएंगी। बौद्ध, जैन तीर्थ, पर्यटन व पुरातात्विक स्थली होने के कारण श्रावस्ती का विश्व पटल पर विशेष महत्व है।
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पर्यटन मानचित्र पर विश्व में स्थान बना चुके श्रावस्ती को हवाई सुविधा से जोड़ने के लिए 1986 में हवाई पट्टी निर्माण को स्वीकृति मिली थी। वर्ष 1993 में तत्कालीन राज्यपाल मोतीलाल बोरा ने हवाई पट्टी का शिलान्यास भी किया था।
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इसके बाद कई करोड़ खर्च कर श्रावस्ती में 1525 मीटर लंबे व 60 मीटर चौड़ी हवाई पट्टी पर रनवे निर्माण को मंजूरी दी गई।
निर्माण कार्य भी शुरू हो गया लेकिन 1325 मीटर निर्माण कार्य पूरा होते ही 23 सितंबर 1995 को तत्कालीन मुख्यमंत्री ने इसका उद्घाटन कर घोषणा की थी कि 10 अक्टूबर 1995 से लखनऊ से श्रावस्ती, बोधगया, कुशीनगर, सारनाथ के लिए उड़ान शुरू हो जाएगी।
लेकिन केंद्रीय नागर विमानन मंत्रालय की जांच में हवाई पट्टी के रनवे मानक विहीन बताकर यहां लैंडिंग पर रोक लगा दी गई थी। इसी के बाद श्रावस्ती में हवाई पट्टी पर सेवाएं ठंडे बस्ते में चली गई।
लाखों रुपये से तैयार टर्मिनल भवन व तैनात कर्मचारी विगत 19 सालों से यहां यात्री हवाई जहाज उतरने का इंतजार कर रहे है। अब एक बार फिर हवाई पट्टी पर विमान उतारने की मुहिम शुरू हो गई।
कुछ दिन पूर्व विमानन मंत्रालय के अधिकारी श्रावस्ती रनवे को मानक पूर्ण बनाने की कवायद कर रहे हैं। दो दिन पूर्व ही कुछ अधिकारी एयरपट्टी को एयरपोर्ट में तब्दील करने के लिए जांच करने आए थे।
मुख्यमंत्री ने भी श्रावस्ती हवाई पट्टी को हाईटेक एयरपोर्ट में तब्दील करने की घोषणा की है। इसी के बाद अब लोगों को उम्मीद है कि इस हवाई पट्टी पर जल्द ही यात्री विमान उतरेगा।
आपात स्थिति से निपटने में काम आएगी हवाई पट्टी
नेपाल की सीमा पर स्थित श्रावस्ती हवाई पट्टी देवीपाटन मंडल की अकेली हवाई पट्टी है। नेपाल में चीन के पसारे जा रहे पैर व पनप रही आईएसआई गतिविधियों से सीमावर्ती क्षेत्र संवेदनशील बना हुआ है।
आए दिन नेपाल सीमा से मादक पदार्थ, असलहे व नकली भारतीय मुद्रा भारतीय क्षेत्रों में आ रही है। ऐसी हालत में आपात स्थिति से निपटने के लिए श्रावस्ती हवाई पट्टी का महत्व और बढ़ जाता है।
पर्यटकों को मिलेगी राहत
श्रीलंका मंदिर के श्रद्धालोक महाथेरो, म्यामार के यू वो वोथा व कोरिया के आर्यानंदा का कहना है कि श्रावस्ती बौद्ध एवं जैन धर्म की तीर्थ स्थली है। यहां प्रति वर्ष लाखों विदेशी पर्यटक आते है।
हवाई सुविधा न होने से पर्यटकों को बनारस, लखनऊ से श्रावस्ती तक सड़क मार्ग से यात्रा करनी पड़ती है। सड़कों की खराब हालत से पर्यटकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। हवाई सेवाएं श्रावस्ती से प्रारंभ हो जाएगी तो लोगों को लाभ मिलेगा।