फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   दलित संगठनों ने शब्बीरपुर की घटना पर पेश की रिपोर्ट

दलित संगठनों ने शब्बीरपुर की घटना पर पेश की रिपोर्ट

Sat, 19 May 2018 09:16 PM IST
Updated Sat, 19 May 2018 09:16 PM IST
विज्ञापन
दलित संगठनों ने शब्बीरपुर की घटना पर पेश की रिपोर्ट
दलित संगठनों ने शब्बीरपुर की घटना पर पेश की रिपोर्ट
विज्ञापन

पुलिस पर हीलाहवाली का लगाया आरोप, चंद्रशेखर को जेल से रिहा करने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
लखनऊ।
एक साल पूर्व सहारनपुर के शब्बीरपुर में हुई हिंसा के मामले में दलित संगठनों ने एक रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट में घटना में पुलिस की कमियों को उजागर करने की कोशिश की गई है। साथ ही मांग की गई है कि भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर उर्फ रावण के खिलाफ रासुका के तहत लगे आरोप हटाए जाएं।
शनिवार को प्रेस क्लब में ‘द कामनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव’ और ‘नेशनल दलित मूवमेंट फार जस्टिस नेशनल कैंपेन फार दलित ह्यूमन राइट्स’ की ओर से पेश की गई रिपोर्ट में महाराणा प्रताप जयंती के मौके पर शब्बीरपुर में दलितों के खिलाफ हुए अत्याचार और पुलिसिया जांच में की गई एकतरफा कार्रवाई का जिक्र किया गया है। पुलिस पर आरोप लगाया गया है कि दलितों की ओर से दर्ज कराए गए मामलों में केवल दो मामलों में ही हरिजन एक्ट लगाया गया। बाकी मामलों में हरिजन एक्ट के तहत कार्रवाई नहीं की गई। आरोपियों की गिरफ्तारियां नहीं की गई, चार्जशीट दाखिल करने में देरी की गई और हरिजनों को दिया जाने वाले भत्ता नहीं दिया गया। रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि उक्त मामलों में पीड़ित दलितों को पर्याप्त मुआवजे की राशि नहीं दी गई। दलित संगठनों की ओर से की गई जांच में यह भी पाया गया है कि पुलिस ने चार्जशीट दाखिल करने में देरी की।
विज्ञापन

इस मौके पर रिटायर्ड आईपीएस आरएस दारापुरी ने कहा कि वह किसी सरकार के खिलाफ नहीं है बल्कि अत्याचार के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि न तो आंबेडकर केवल दलितों के आईकॉन थे और नही महाराणा प्रताप केवल राजपूतों के आईकॉन थे। इन दोनों ही लोगों ने समाज के लिए काम किया। इस दौरान मंाग की गई कि जेल में बंद चंद्रशेखर उर्फ रावण को रिहा किया जाए, हरिजन एक्ट को सख्ती से लागू करने के लिए अध्यादेश पारित किया जाए और दो अप्रैल को भारत बंद के दौरान गिरफ्तार सभी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, नेताओं और समुदाय के सदस्यों और कर्मचारियों को तुरंत रिहा किया जाए। इस मौके पर रिटायर्ड आईएएस डॉ. पीएस कृष्णनन, अधिवक्ता सुरेश गौतम, रिटायर्ड आईपीएस एसआर दारापुरी, रामकुमार, दौलतराम, हरिश्चंद्र समेत कई लोग शामिल थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed