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नेपाल का पानी पहुंचते ही बिगड़ेंगे हालात

Fri, 14 Jul 2017 01:19 AM IST
Updated Fri, 14 Jul 2017 01:19 AM IST
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नेपाल का पानी पहुंचते ही बिगड़ेंगे हालात
बाराबंकी। नेपाल से दो दिन में छोडे़ गए 609884 क्यूसेक पानी गुरुवार देर रात तक जिले में पहुंचते ही घाघरा तबाही मचाना शुरू कर देगी। जिसको लेकर प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है। बाढ़ क्षेत्र के एसडीएम को बाढ़ प्रभावित गांव के लोगों को गांव से निकाल कर सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए है तो अधिकारियों व कर्मचारियों को अपने ड्यूटी प्वाइंट पर मौजूद रहने को भी कहा गया है। उधर, हवा के थपेड़ों से खेतों की कटान कर अलीनगर-रानीमऊ तटबंध की ओर बढ़ रही घाघरा से बांध के कटान का भी खतरा बना हुआ है। जिसका निरीक्षण करने गुरुवार मुख्य अभियंता बजट राशिद रजा खान पहुंचे। बांध को बचाने के संबंध में बाढ़ के अधिकारियों से जानकारी ली व स्टाक का भी अवलोकन किया। इस मौके पर बाढ़ के अधिशाषी अभियंता जे के लाल व एई संजय कुमार मौजूद रहे। उधर, एल्गिन चरसढ़ी बांध के कटे होने से घाघरा के उस पास बसे सिरौलीगौसपुर व रामसनेहीघाट तहसील के रायपुर मांझा, परसावल, नैपुुरा, चर पुरवा, नाऊन पुरवा, कमियार, बेहटा गांव पानी से डूब गए है। ऐसे में इन गांवों व बांध तक पहुंचने के रास्ते तक बंद हो गए है। इस बारे में भले ही पहले लोकनिर्माण विभाग को वैकल्पिक मार्ग चिह्नित करने के निर्देश दिए गए हो। मगर, मार्ग की जानकारी न होने के कारण बाढ़ क्षेत्र में ड्यूटी पर जाने वाले कर्मचारियों को काफी दिक्कतें हुई। गुरुवार की शाम 4 बजे तक घाघरा का जलस्तर एल्गिन ब्रिज पर 106.176 पर स्थिर रहा। जो खतरे के निशान से 10 सेंटीमीटर ऊपर था।
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टिकैतनगर संवाददाता के अनुसार तराई क्षेत्र में जहां तक नजर पहुंचती है चारों ओर पानी ही पानी नजर आता है। कोई गले तक तो कहीं कमर तक पानी में पिलकर खाने-पीने का सामान लेकर जाते मिला। किसी को घर की तो किसी को अपने बचे सामान की चिंता सता रही है। बाढ़ पीड़ित सरकारी तंत्र के इंतजामों पर सवाल खडे़ कर रहे है। सब का बस एक ही कहना था कि पिछले साल कटे बंधे को बनाने का कोई प्रयास नहीं किया गया। बाढ़ के समय बचाव कार्य के नाम सभी अपना धंधा करते हैं। जिसके बीच में आम आदमी पिस रहा है। मगर, इसकी चिंता किसी को नही है।
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फसलें भी डूबीं, घरों में भरा पानी
रायपुर के अकबाल का कहना है कि अब हर तरफ पानी ही पानी है। फसलें भी पानी में डूब गई तो घरों में पानी भरा हुआ है। ऐसे में घर छोड़ कहीं और जाकर बसने के अलावा अब और कोई चारा नही बचा है। थोड़ा सा आगे बढ़ते ही परसावल निवासी इंस्पेक्टर यादव व विलास बोले हर साल बांध की मरम्मत पर करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं। उसके बाद भी बांध को नहीं बचा पाया। उलटे बांध कटने का खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ा। पिछली बार जब से बांध कटा कोई अफसर नेता यहां नही दिखाई दिए। पूरा साल बीत गया बांध को नहीं बंधवाया गया। अब जब बाढ़ आ गयी तो मंत्री दौरा कर रहे हैं।
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नेपाल से लगातार छोडे़ जा रहे पानी को लेकर बाढ़ क्षेत्र के एसडीएम को एलर्ट कर दिया गया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री बांटने के साथ चिकित्सकों की टीमें भी कैंप कर रही है। ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम भी किया जा रहा है। - अनिल कुमार सिंह, एडीएम वित्त एवं राजस्व बाराबंकी
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