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Lucknow News: जानकीपुरम में डायरिया के 14 और मरीज मिले, दो काे भर्ती कर हुआ इलाज
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जानकीपुरम ट्रामा सेंटर में इलाज के लिए पहुंचे डायरिया पीड़ित मरीज।
- फोटो : संवाद
लखनऊ। जानकीपुरम में डायरिया का प्रकोप थम नहीं रहा। लगातार नए मरीज मिलने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी हालात सामान्य होने का दावा कर रहे हैं। बृहस्पतिवार को अलग-अलग सेक्टर के 14 मरीज जानकीपुरम ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। ज्यादातर मरीजों को ओपीडी में दवाएं देकर घर भेज दिया गया। दो गंभीर मरीजों को ट्रॉमा में भर्ती किया गया। हालत में सुधार होने पर दोपहर बाद उन्हें भी डिस्चार्ज कर दिया गया।
जानकीपुरम में करीब दस दिन से संक्रामक रोग फैला है। सीएमओ की टीम बीमारी को रोकने में पूरी तरह से नाकाम है। स्वास्थ्य विभाग इलाज व जांच के नाम पर खोखले दावे कर रहा है। अब तक दो मरीजों की मौत व 100 से अधिक बीमारों ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के दावों की पोल खोल दी है। अफसर कागजों में डायरिया प्रभावित इलाकों में राहत कार्य पहुंचा रहे हैं। यही वजह है कि अभी तक इलाके में बीमारी काबू में नहीं आ सकी है। बृहस्पतिवार को 14 मरीज जानकीपुरम ट्राॅमा सेंटर की ओपीडी में पहुंचे। इसमें 12 को ओपीडी में इलाज देकर घर भेज दिया गया। पीड़ितों में आनंद कुमार सिंह (37), नीता श्रीवास्तव (65), आदर्श (10), सुमन (47), जगदीश चंद्र (76), कीर्ति (22), मंजू (28), चारु सिंह (17), सुमन (50), शिवानी, (24), फारूक (24) शामिल हैं। नीता श्रीवास्तव (65) व अस्मिता (39) को भर्ती कर इलाज मुहैया कराया। हालत में सुधार के बाद दोनों को डिस्चार्ज कर दिया गया।
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हड्डी रोग विशेषज्ञ और सर्जन के भरोसे डायरिया मरीजों का इलाज
डायरिया की चपेट में आए जानकीपुरम के मरीजों को इलाके के जिस ट्रॉमा सेंटर में भेजा जा रहा है वह खुद बीमार है। यहां विशेषज्ञों व संसाधनों की कमी है। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग डायरिया के मरीजों को यहां भर्ती करवाकर उनकी सेहत से खिलवाड़ कर रहा है। आरोप है कि डायरिया के गंभीर मरीजों का इलाज हड्डी रोग व सर्जन के भरोसे है। यहां फिजिशियन और बाल रोग विशेषज्ञ तक नहीं हैं।
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जानकीपुरम में करीब दस दिन से संक्रामक रोग फैला है। सीएमओ की टीम बीमारी को रोकने में पूरी तरह से नाकाम है। स्वास्थ्य विभाग इलाज व जांच के नाम पर खोखले दावे कर रहा है। अब तक दो मरीजों की मौत व 100 से अधिक बीमारों ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के दावों की पोल खोल दी है। अफसर कागजों में डायरिया प्रभावित इलाकों में राहत कार्य पहुंचा रहे हैं। यही वजह है कि अभी तक इलाके में बीमारी काबू में नहीं आ सकी है। बृहस्पतिवार को 14 मरीज जानकीपुरम ट्राॅमा सेंटर की ओपीडी में पहुंचे। इसमें 12 को ओपीडी में इलाज देकर घर भेज दिया गया। पीड़ितों में आनंद कुमार सिंह (37), नीता श्रीवास्तव (65), आदर्श (10), सुमन (47), जगदीश चंद्र (76), कीर्ति (22), मंजू (28), चारु सिंह (17), सुमन (50), शिवानी, (24), फारूक (24) शामिल हैं। नीता श्रीवास्तव (65) व अस्मिता (39) को भर्ती कर इलाज मुहैया कराया। हालत में सुधार के बाद दोनों को डिस्चार्ज कर दिया गया।
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हड्डी रोग विशेषज्ञ और सर्जन के भरोसे डायरिया मरीजों का इलाज
डायरिया की चपेट में आए जानकीपुरम के मरीजों को इलाके के जिस ट्रॉमा सेंटर में भेजा जा रहा है वह खुद बीमार है। यहां विशेषज्ञों व संसाधनों की कमी है। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग डायरिया के मरीजों को यहां भर्ती करवाकर उनकी सेहत से खिलवाड़ कर रहा है। आरोप है कि डायरिया के गंभीर मरीजों का इलाज हड्डी रोग व सर्जन के भरोसे है। यहां फिजिशियन और बाल रोग विशेषज्ञ तक नहीं हैं।
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