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नसबंदी पीड़िता की हालत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती
Updated Sun, 08 Apr 2018 10:32 PM IST
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नवाबगंज (गोंडा)। पांच माह की गर्भवती महिला की महीने भर पहले हुई नसबंदी के बाद उसकी कोख में पल रहे बच्चे ने तो सात दिन बाद ही दम तोड़ दिया था। जबकि नसबंदी पीड़िता जिला अस्पताल के इमरजेंसी में भर्ती जिंदगी-मौत से जूझ रही है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की नींद अभी भी नहीं टूटी और वह पीड़ित महिला के हरसंभव उपचार के बजाए हाथ पर हाथ धरे बैठा हैै।
मामला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नवाबगंज का है। परिवार नियोजन को लेकर बीते 26 मार्च को नसबंदी के लिए सीएचसी में कैंप लगा था। जिसमें नवाबगंज गिर्द के बढ़ईपुरुवा के निवासी बाबूरामनिषाद की पत्नी निर्मला देवी (32) की नसबंदी हुई थी। नसबंदी के लिए दो टीमेें मुख्यालय से आईं थी। जिसमें से एक प्राइवेट टीम की अगुवाई डॉ. अंकिता दयाल कर रही थी। जिन्होंनेे पीड़ित महिला की नसबंदी की। महिला के पति बाबूराम निषाद ने बताया कि हॉस्पिटल में नसबंदी के लिए भर्ती करने से पहले उसकी पत्नी की मेडिकल जांच हुई थी। इसके बाद डॉ. अंकिता दयाल ने उसकी पत्नी की नसबंदी की। घर जाकर पत्नी की 5 दिन बाद तबियत खराब हो गई। जांच कराई गई तो पता चला कि उसकी पत्नी पांच माह की पहले से गर्भवती है। जैसे-तैसे वह पत्नी को महिला अस्पताल लाए। जहां उसकेे बच्चे की मौत हो गई। लेकिन उसकी पत्नी की हालत उसके बाद से लगातार खराब चल रही है। रविवार को एक बार फिर से उसकी पत्नी की तबियत अचानक खराब हो गई। जिस पर वह उसे जिला अस्पताल आया है। जहां इमरजेंसी में उसकी पत्नी का इलाज चल रहा है।
उधर, इस मामले में आशा कविता को यूनिसेफ़ का फर्जी अधिकारी बताकर नीरज नाम के एक युवक ने पीड़ित महिला के परिवार को फोन से धमकी भी दी। जबकि मामले में पीड़ित की ओर से इसकी लिखित तहरीर भी थाने में दी गई। जिस पर अब तक मुकदमा नहीं दर्ज हो पाया है। जबकि दूसरी ओर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के अधीक्षक मनोज कुमार का कहना है कि जब तक इस मामले में उन्हें ऊपर से कोई निर्देश नहीं मिलते हैं, वह अपनी तरफ से कुछ नहीं कर सकते।
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मामला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नवाबगंज का है। परिवार नियोजन को लेकर बीते 26 मार्च को नसबंदी के लिए सीएचसी में कैंप लगा था। जिसमें नवाबगंज गिर्द के बढ़ईपुरुवा के निवासी बाबूरामनिषाद की पत्नी निर्मला देवी (32) की नसबंदी हुई थी। नसबंदी के लिए दो टीमेें मुख्यालय से आईं थी। जिसमें से एक प्राइवेट टीम की अगुवाई डॉ. अंकिता दयाल कर रही थी। जिन्होंनेे पीड़ित महिला की नसबंदी की। महिला के पति बाबूराम निषाद ने बताया कि हॉस्पिटल में नसबंदी के लिए भर्ती करने से पहले उसकी पत्नी की मेडिकल जांच हुई थी। इसके बाद डॉ. अंकिता दयाल ने उसकी पत्नी की नसबंदी की। घर जाकर पत्नी की 5 दिन बाद तबियत खराब हो गई। जांच कराई गई तो पता चला कि उसकी पत्नी पांच माह की पहले से गर्भवती है। जैसे-तैसे वह पत्नी को महिला अस्पताल लाए। जहां उसकेे बच्चे की मौत हो गई। लेकिन उसकी पत्नी की हालत उसके बाद से लगातार खराब चल रही है। रविवार को एक बार फिर से उसकी पत्नी की तबियत अचानक खराब हो गई। जिस पर वह उसे जिला अस्पताल आया है। जहां इमरजेंसी में उसकी पत्नी का इलाज चल रहा है।
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उधर, इस मामले में आशा कविता को यूनिसेफ़ का फर्जी अधिकारी बताकर नीरज नाम के एक युवक ने पीड़ित महिला के परिवार को फोन से धमकी भी दी। जबकि मामले में पीड़ित की ओर से इसकी लिखित तहरीर भी थाने में दी गई। जिस पर अब तक मुकदमा नहीं दर्ज हो पाया है। जबकि दूसरी ओर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के अधीक्षक मनोज कुमार का कहना है कि जब तक इस मामले में उन्हें ऊपर से कोई निर्देश नहीं मिलते हैं, वह अपनी तरफ से कुछ नहीं कर सकते।
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