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12 साल के सहदेव ने बोरवेल में गिरी मासूम को बाहर निकाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फैजाबाद
Updated Fri, 28 Sep 2018 02:50 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
फैजाबाद में 12 साल के सहदेव ने एक मासूम की जिंदगी बचाकर अपनी साहस का भी परिचय दिया है। सहदेव ने 10 इंच चौड़े बोरवेल में गिरी ढाई साल की बच्ची को ग्रामीणों की सहायता से सकुशल बाहर निकाल लिया।
फैजाबाद हैदरगंज थाना क्षेत्र में ग्रामसभा सिंहोरिया निवासी लंबदार निषाद के घर एक रिश्तेदार अपनी ढाई साल की बच्ची गौरी के साथ आई थी। लंबरदार के घर में लगा इंडिया मार्का हैंडपंप दो साल पहले फेल हो गया था। कुछ समय पहले मिस्त्री ने पाइप को निकालकर गड्ढे को पटवा दिया था लेकिन, भीषण बारिश के चलते बोरिंग के गड्ढे पर डाली गई मिट्टी अंदर चली गई। इस कारण 10 इंच गोलाई में गड्ढा बन गया।
इसे गड्ढे में गौरी खेलते समय अचानक गिर गई। गौरी की चीख सुनकर आसपास मौजूद महिलाएं शोर मचाते हुए बोरिंग के गड्ढे की तरफ दौड़ीं। लंबरदार का बेटा सहदेव भी वहां पहुंचा। उसने आव देखा न ताव और तत्काल अपनी कमर में रस्सी बांध ली। ग्रामीणों ने रस्सी पीछे से पकड़ी और सहदेव धीरे-धीरे बोरिंग के गड्ढे में उतर गया।
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साहसी बच्चे ने गड्डे में पड़ी गौरी को जोर से पकड़ा और फिर उसे लेकर बाहर निकल आया। मासूम बेहोश हो गई थी, जिसे लेकर लोग तत्काल अस्पताल भागे। प्राथमिक उपचार के बाद गौरी को होश आ गया और अब वह बिल्कुल स्वस्थ है। सहदेव के इस साहसिक कार्य के चलते ग्रामीणों ने उसे सिर आंखों पर बिठा लिया।
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फैजाबाद हैदरगंज थाना क्षेत्र में ग्रामसभा सिंहोरिया निवासी लंबदार निषाद के घर एक रिश्तेदार अपनी ढाई साल की बच्ची गौरी के साथ आई थी। लंबरदार के घर में लगा इंडिया मार्का हैंडपंप दो साल पहले फेल हो गया था। कुछ समय पहले मिस्त्री ने पाइप को निकालकर गड्ढे को पटवा दिया था लेकिन, भीषण बारिश के चलते बोरिंग के गड्ढे पर डाली गई मिट्टी अंदर चली गई। इस कारण 10 इंच गोलाई में गड्ढा बन गया।
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इसे गड्ढे में गौरी खेलते समय अचानक गिर गई। गौरी की चीख सुनकर आसपास मौजूद महिलाएं शोर मचाते हुए बोरिंग के गड्ढे की तरफ दौड़ीं। लंबरदार का बेटा सहदेव भी वहां पहुंचा। उसने आव देखा न ताव और तत्काल अपनी कमर में रस्सी बांध ली। ग्रामीणों ने रस्सी पीछे से पकड़ी और सहदेव धीरे-धीरे बोरिंग के गड्ढे में उतर गया।
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साहसी बच्चे ने गड्डे में पड़ी गौरी को जोर से पकड़ा और फिर उसे लेकर बाहर निकल आया। मासूम बेहोश हो गई थी, जिसे लेकर लोग तत्काल अस्पताल भागे। प्राथमिक उपचार के बाद गौरी को होश आ गया और अब वह बिल्कुल स्वस्थ है। सहदेव के इस साहसिक कार्य के चलते ग्रामीणों ने उसे सिर आंखों पर बिठा लिया।