यूपी: 1153 किसानों की मौत, जांच के आदेश
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बेमौसम बारिश व ओलों से प्रभावित जिलों में फरवरी से अप्रैल के बीच दैवी आपदा से जुड़े कारणों से हटकर आत्महत्या, हार्ट अटैक सहित विभिन्न वजहों से मरने वाले किसानों की तादाद 1153 पहुंच गई है।
मुख्य सचिव आलोक रंजन ने जिलाधिकारियों को ऐसी सभी मौतों से जुड़े कारणों का परीक्षण कर सीएम राहत कोष से आर्थिक सहायता की सिफारिश करने को कहा है।
बताते चलें, बेमौसम बारिश व ओलों से प्रभावित 23 जिलों में फरवरी से अप्रैल के बीच 80 लोगों की मौत दैवी आपदा से जुड़े कारणों जैसे आकाशीय बिजली गिरने, घर व दीवाल गिरने, पेड़ से दबने से हुई थी।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर ऐसे हर पीड़ित परिवार को सात लाख रुपये की सहायता दी जा रही है। इसके अलावा फसलें बर्बाद होने से सदमे व आत्महत्या जैसे विभिन्न कारणों से बड़े पैमाने पर किसानों की मौतों की बात सामने आई। शासन ने ऐसी सूचनाओं की जानकारी जुटाई तो 57 जिलों में 1153 जनहानि की सूचनाएं मिलीं।
कई ऐसी मौतें शामिल जो किसान थे ही नहीं
राजस्व विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इन 1153 मौतों में लंबे समय से बीमारी व कई सामान्य मौतें भी शामिल हैं। कई ऐसी भी मौतें शामिल कर ली गईं जो किसान थे ही नहीं।
इसके बाद जिलाधिकारियों से ऐसी सभी 1153 मौतों का परीक्षण कर रिपोर्ट देने को कहा गया है। जिलाधिकारी देखेंगे कि इनमें कौन-कौन किसान थे, कौन-कौन गरीब थे और वास्तव में किन-किन की फसलों की बर्बादी से मौत हुई?
जिलाधिकारी इसका परीक्षण कर आर्थिक सहायता की सिफारिश करेंगे। ऐसे जितने भी मामले सामने आए हैं, उन्हें मुख्यमंत्री राहत कोष से सहायता दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने ऐसे पीड़ित परिवारों को पांच-पांच लाख रुपये की सहायता देने का ऐलान किया है।
मामले पर मुख्य सचिव आलोक रंजन का कहना है कि 57 जिलों में दैवी आपदा से हटकर करीब 1153 जनहानि की सूचनाएं मिली हैं। जिलाधिकारियों को इसके परीक्षण के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे मामलों के परीक्षण के बाद जिलाधिकारियों को मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से आर्थिक सहायता देने का प्रस्ताव भेजने को कहा गया है।