{"_id":"5aad54584f1c1bbc758b60d4","slug":"11521308760-lucknow-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नेताओं ने शिक्षा को बनाया पैसा कमाने का साधन : राज्यपाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नेताओं ने शिक्षा को बनाया पैसा कमाने का साधन : राज्यपाल
Updated Sat, 17 Mar 2018 11:16 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नेताओं ने शिक्षा को बनाया पैसा कमाने का साधन : राज्यपाल
गोंडा। राष्ट्र ऋषि नानाजी देशमुख ने संस्कारों से युक्त शिक्षा देने के लिए सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना की थी। मगर आज के नेताओं ने शिक्षा को पैसा कमाने का साधन बना लिया है। इससे शिक्षा के स्तर में गिरावट आई है। विश्वविद्यालयों में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए कक्षाओं को नियमित करने का प्रयास किया जा रहा है।
जल्द की इसमें बदलाव देखने को मिलेगा। ये बातें शनिवार को राज्यपाल रामनाइक ने कहीं। वे यहां मेहनौन विधानसभा क्षेत्र के जयप्रभाग्राम में आयोजित अखिल भारतीय लोककला महोत्सव केे समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि, शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए विश्वविद्यालयों में शोध कार्यों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
संस्कार भारती व दीनदयाल शोध संस्थान के संयुक्त तत्वाधान में इटियाथोक के जयप्रभाग्राम में आयोजित चार दिवसीय अखिल भारतीय लोक कला महोत्सव का शनिवार को समापन हुआ। समापन समारोह में राज्यपाल ने राष्ट्र ऋषि नानाजी देशमुख की प्रतिमा पर पुप्प अर्पित कर उन्हें याद किया।
विज्ञापन
राज्यपाल ने नानाजी की कुटिया के स्थान पर बनाए गए श्रद्धा केंद्र का लोकार्पण भी किया। महोत्सव के समापन सत्र को संबोधित करते हुए महामहिम ने नानाजी देशमुख के जीवन पर प्रकाश डाला और समाज के लिए किए गए उनके कार्यों से प्रेरणा लेने की सीख दी।
नानाजी देशमुख के बारे में बताते हुए राज्यपाल ने कहा कि, नानाजी देशमुख प्रखर चिंतक थे। वर्ष 1977 में जब जनता पार्टी की सरकार में उन्हें मंत्री बनने की पेशकश की गई तो उन्होंने ये कहकर मंत्री पद ठुकरा दिया कि वह समाज के लिए कार्य करना चाहते हैं।
60 वर्ष की आयु में नानाजी ने सक्रिय राजनीति से सन्यास ले लिया और सामाजिक रचना के कार्य में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। समारोह को समाज कल्याण मंत्री रमापति शाष्त्री व श्रावस्ती सांसद दद्दन मिश्र ने भी संबोधित किया।
राज्यपाल रामनाइक ने लोक कला महोत्सव में अयोध्या प्रसाद कुमुद की लिखी पुस्तक ‘लोक कला नवनीत’ का विमोचन भी किया। पुस्तक के विमोचन पर उन्होंने अपनी लिखी पुस्तक ‘चरैवेति चरैवेति’ का जिक्र भी किया और इस सिद्धांत को अमल में लाने की सीख दी।
इस मौके पर पद्मश्री योगेंद्र बाबा, मेहनौन विधायक विनय कुमार द्विवेदी, प्रभात वर्मा, प्रेमनरायन पांडेय, पल्टूराम, रामकृष्ण तिवारी के अलावा डीआईजी देवीपाटन मंडल अनिल कुमार राय, डीएम जेबी सिंह, एसपी उमेश कुमार सिंह, एसडीएम नन्हे लाल आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
गोंडा। राष्ट्र ऋषि नानाजी देशमुख ने संस्कारों से युक्त शिक्षा देने के लिए सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना की थी। मगर आज के नेताओं ने शिक्षा को पैसा कमाने का साधन बना लिया है। इससे शिक्षा के स्तर में गिरावट आई है। विश्वविद्यालयों में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए कक्षाओं को नियमित करने का प्रयास किया जा रहा है।
जल्द की इसमें बदलाव देखने को मिलेगा। ये बातें शनिवार को राज्यपाल रामनाइक ने कहीं। वे यहां मेहनौन विधानसभा क्षेत्र के जयप्रभाग्राम में आयोजित अखिल भारतीय लोककला महोत्सव केे समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि, शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए विश्वविद्यालयों में शोध कार्यों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
विज्ञापन
संस्कार भारती व दीनदयाल शोध संस्थान के संयुक्त तत्वाधान में इटियाथोक के जयप्रभाग्राम में आयोजित चार दिवसीय अखिल भारतीय लोक कला महोत्सव का शनिवार को समापन हुआ। समापन समारोह में राज्यपाल ने राष्ट्र ऋषि नानाजी देशमुख की प्रतिमा पर पुप्प अर्पित कर उन्हें याद किया।
विज्ञापन
राज्यपाल ने नानाजी की कुटिया के स्थान पर बनाए गए श्रद्धा केंद्र का लोकार्पण भी किया। महोत्सव के समापन सत्र को संबोधित करते हुए महामहिम ने नानाजी देशमुख के जीवन पर प्रकाश डाला और समाज के लिए किए गए उनके कार्यों से प्रेरणा लेने की सीख दी।
नानाजी देशमुख के बारे में बताते हुए राज्यपाल ने कहा कि, नानाजी देशमुख प्रखर चिंतक थे। वर्ष 1977 में जब जनता पार्टी की सरकार में उन्हें मंत्री बनने की पेशकश की गई तो उन्होंने ये कहकर मंत्री पद ठुकरा दिया कि वह समाज के लिए कार्य करना चाहते हैं।
60 वर्ष की आयु में नानाजी ने सक्रिय राजनीति से सन्यास ले लिया और सामाजिक रचना के कार्य में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। समारोह को समाज कल्याण मंत्री रमापति शाष्त्री व श्रावस्ती सांसद दद्दन मिश्र ने भी संबोधित किया।
राज्यपाल रामनाइक ने लोक कला महोत्सव में अयोध्या प्रसाद कुमुद की लिखी पुस्तक ‘लोक कला नवनीत’ का विमोचन भी किया। पुस्तक के विमोचन पर उन्होंने अपनी लिखी पुस्तक ‘चरैवेति चरैवेति’ का जिक्र भी किया और इस सिद्धांत को अमल में लाने की सीख दी।
इस मौके पर पद्मश्री योगेंद्र बाबा, मेहनौन विधायक विनय कुमार द्विवेदी, प्रभात वर्मा, प्रेमनरायन पांडेय, पल्टूराम, रामकृष्ण तिवारी के अलावा डीआईजी देवीपाटन मंडल अनिल कुमार राय, डीएम जेबी सिंह, एसपी उमेश कुमार सिंह, एसडीएम नन्हे लाल आदि मौजूद रहे।