फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   111 MLAs in cabinet of Uttar Pradesh.

अखिलेश को है '111 अपराधियों' का सहारा

Thu, 28 Aug 2014 02:05 AM IST
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 28 Aug 2014 02:05 AM IST
विज्ञापन
111 MLAs in cabinet of Uttar Pradesh.

भले ही सुप्रीम कोर्ट की पूर्ण पीठ लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए कैबिनेट को साफ-सुथरा रखने की सलाह दे रही हो लेकिन राजनीतिक दलों के लिए इसके खास मायने नहीं है।

विज्ञापन


दागियों को नवाजने में कोई दल पीछे नहीं है। प्रदेश की सपा सरकार में भी कई मंत्रियों समेत 111 विधायकों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं।

राजनीति में शुचिता की लड़ाई लड़ने वाले मानते हैं कि बदले दौर में राजनीतिक मूल्य ही बदल गए हैं। पहले राजनीतिज्ञों ने अपराधियों का इस्तेमाल शुरू किया और अब अपराधी ही राजनीति करने लगे हैं। इस पर रोक के लिए कड़े कानून बनने चाहिए।

विज्ञापन

नहीं कम हो रहा सियासत में बाहुबल का प्रभाव

111 MLAs in cabinet of Uttar Pradesh.

हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक की तल्ख टिप्पणियों और फैसलों के बावजूद राजनीति, अपराधियों और धनबल का गठजोड़ टूट नहीं पा रहा है।

सियासी नेताओं खासतौर से विधायकों, मंत्रियों, सांसदों पर आपराधिक मामलों का विश्लेषण करने पर खुशनुमा तस्वीर नहीं बनती। गंभीर आपराधिक मामलों वाले नेताओं को मंत्रिपरिषद में शामिल कर लिया जाता है।

नेशनल इलेक्शन वाच और एडीआर के नेशनल कोऑर्डिनेटर अनिल बेरवाल कहते हैं- तमाम कोशिशों के बाद भी सियासत में बाहुबल का प्रभाव कम नहीं हो पा रहा।

इसकी असली वजह खुद राजनीतिक दल हैं। वे अदालतों को अंगूठा दिखाने में पीछे नहीं है। गेंद अब जनता के पाले में है। जनता के दबाव के बिना ये दल सुधरने वाले नहीं हैं।

यूपी के सांसदों, विधायकों पर गंभीर आरोप

111 MLAs in cabinet of Uttar Pradesh.

अदालती फैसलों को बदलने और आपराधिक छवि के लोगों को संवैधानिक पदों पर बैठाने में भी सियासी पार्टियां पीछे नहीं है। दागियों की मदद करके उनके मामले लंबे समय तक लटकाए जाते हैं।

मंत्री, विधायक, सांसद या प्रभावशाली नेता अपने खिलाफ गंभीर धाराओं में दर्ज मामलों को भी अंजाम तक नहीं पहुंचने देना चाहते। वे ऐसे तरीके निकाल लेते हैं कि उनके खिलाफ अदालतों में चल रहे मामलों में तारीख पर तारीख लगती रहे और केस निर्णायक स्थिति में न पहुंचे।

एडीआर-इलेक्शन वाच की रिपोर्ट के मुताबिक यूपी के कई विधायक और सांसदों के खिलाफ दशकों से गंभीर केस लंबित चले आ रहे हैं। एक कैबिनेट मंत्री के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला 13 साल से लंबित है।

विज्ञापन

शर्म है तो दागियों को हटाएं

111 MLAs in cabinet of Uttar Pradesh.

सेवानिवृत्त आईएएस और लोक प्रहरी के संयोजक एसएन शुक्ला कहते हैं कि तमाम कोशिशों की बावजूद राजनीति में अपराधियों का बोलबाला कम नहीं हो रहा। सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐतिहासिक है।

अदालत ने जितना कहा है, उससे ज्यादा नहीं कहा जा सकता था। केंद्र और राज्य सरकारों में यदि शर्म-लिहाज है तो मंत्रिमंडल से दागियों को हटाएं। भविष्य में कोई अपराधी मंत्री न बन सके, इसके लिए कानून बनना चाहिए।

वह कहते हैं, पिछले साल पटना हाईकोर्ट ने फैसला दिया था कि जेल में रहने वाले नेता चुनाव नहीं लड़ सकते। राजनीतिक दलों को यह मंजूर नहीं था, लिहाजा फैसले को निष्प्रभावी बनाने के लिए संविधान में संशोधन कर दिया गया।

उन्होंने इसे अदालत में चुनौती दी है। ऐसे नेता जिनके खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल हो गई हो या जो जेल में हों, उनके चुनाव लड़ने पर रोक लगनी चाहिए।

वर्ष 2012 में निर्वाचित विधायकों का ब्यौरा

111 MLAs in cabinet of Uttar Pradesh.

दल--कुल विधायक--आपराधिक छवि के विधायक--प्रतिशत--गंभीर केस वाले विधायक
सपा--224--111--49.6--56
बसपा--80--29--36.3--14
भाजपा--47--25--53.2--14

कांग्रेस--28--13--46.4--07
रालोद--09--02--22.2--01

नोट: ये आंकड़े 2012 में निर्वाचित विधायकों के हैं। इनमें से भाजपा के कुछ विधायक सांसद चुने जाने पर इस्तीफा दे चुके हैं। पीस पार्टी से जीते चार में दो और कौमी एकता दल के दो में से एक विधायक आपराधिक छवि के हैं। छह निर्दलीय विधायकों में पांच पर आपराधिक और चार पर गंभीर आपराधिक मामले चल रहे हैं।
(स्रोत: एडीआर-इलेक्शन वाच)

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed