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आईएएस अफसरों समेत 11 पर जालसाजी का मुकदमा दर्ज, शारीरिक शोषण के लिए दबाव बनाने का आरोप

Sun, 07 Feb 2021 04:39 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Sun, 07 Feb 2021 04:39 PM IST
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11 including IAS officers filed for forgery, accused of pressurizing them for physical abuse
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
आवासीय विद्यालय की रैंकिंग में फजीवाड़ा करने के मामले में राज्य नियोजन संस्थान के दो आईएएस अफसरों समेत 11 अधिकारियों पर जालसाजी और दस्तावेजों में हेराफेरी का केस दर्ज किया गया है। आरोपी अफसरों में आईएएस अंकित कुमार अग्रवाल व ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी भी हैं। अंकित वर्तमान में प्रयागराज विकास प्राधिकरण में उपाध्यक्ष हैं, वहीं ज्ञान प्रकाश विशेष सचिव, नियोजन  हैं। नियोजन की मूल्यांकन अधिकारी रही महिला की शिकायत पर जांच के बाद राजधानी के महानगर थाने में यह केस दर्ज किया गया।
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प्रभारी निरीक्षक महानगर यशकांत सिंह के मुताबिक पीड़िता ने तहरीर में बताया कि संस्थान में संयुक्त निदेशक डॉ. सतवीर सिंह ने समाज कल्याण विभाग की ओर से 14 मार्च 2020 को वर्ष 2018-19 की प्रदेश के  आवासीय विद्यालयों की रैंकिंग करने का आदेश दिया था। लिखित आदेश मांगने पर साफ मना कर दिया। इसकी शिकायत तत्कालीन निदेशक रामकेवल से किया तो जांच कमेटी बना दी गई। आरोप है कि अफसरों के रसूख के चलते जांच को दबा दिया गया। रिटायर अधिकारी डॉ. थम्मन सिंह व वीपी गुप्ता से शिकायत करवा दी। राज्य महिला आयोग व राज्यपाल से शिकायत के बाद पुलिस सक्रिय हुई और जांच कर केस दर्ज किया।
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इनके खिलाफ केस
डॉ. सतवीर सिंह, डॉ. संतराम, दिनेश कुमार, डॉ. राजेंद्र कुमार यादव, अंकित कुमार अग्रवाल, ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी, डॉ. दिव्या सरीन मेहरोत्रा, उमेश कुमार, डॉ. गोविंद बाबू और वर्तिका श्रीवास्तव पर केस कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
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शारीरिक शोषण के लिए दबाव बनाने का आरोप

आवासीय विद्यालयों की रैंकिंग में फर्जीवाड़ा मामले में राज्य नियोजन संस्थान में दो आईएएस समेत 11 अफसरों पर जालसाजी का केस करने वाली मूल्यांकन अधिकारी ने शारीरिक शोषण केलिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है। पीड़िता का आरोप है कि संस्थान के संयुक्त निदेशक डॉ. सतवीर सिंह उसका शारीरिक शोषण करना चाहते थे। विरोध करने पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने लगे। वे कामों में हमेशा गलतियां निकालते थे। उसे धमकी देते थे। अपने दबाव में रखने के लिए रैंकिंग के मामले को समाज कल्याण विभाग की तरफ से करने को कहा गया।

पीड़िता के अनुसार सतवीर ने वर्ष 2018-19 की प्रदेश के  आवासीय विद्यालयों की रैंकिंग करने को कहा तो लिखित आदेश मांगाने पर मना कर दिया। काम पूरा करने के बाद फाइल तत्कालीन निदेशक राम केवल को भेज दी। निदेशक ने फाइल पर वार्ता करने की बात लिखकर वापस कर दिया। तब सतवीर सिंह ने वार्ता के लिए मना कर फाइल वापस लेने को कहा। तहरीर के अनुसार पीड़िता ने इसकी जानकारी निदेशक को दी तो उन्होंने विभागीय जांच के लिए कमेटी बना दी। आरोप है कि कमेटी ने दोनों पक्षों को सुने बिना ही मामला दबा दिया। कुछ दिन बाद पीड़िता को पत्र मिला कि उसके खिलाफ रिटायर्ड अधिकारी डॉ. थम्मन सिंह व वीपी गुप्ता ने शिकायत की। जब शिकायती पत्र की कापी मांगी तो नहीं दी गई। तब उसने संबंधित विभागों को पत्र लिखकर मामले की जानकारी दी, लेकिन अधिकारियों के दबाव में मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की जा रही थी।

महिला आयोग से लेकर राज्यपाल को लिखा पत्र
पीड़िता के मुताबिक जब विभाग में कोई मदद नहीं मिली तो पुलिस से सहायता मांगी। वहां भी कोई मदद नहीं मिली। इसके बाद उसने राज्य महिला आयोग और राज्यपाल से इसकी शिकायत की। जब महिला आयोग ने एसीपी महानगर से जांच कर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। इसके बाद पुलिस सक्रिय हुई। पुलिस ने पीड़िता की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। जांच शुरू कर दी है। प्रभारी निरीक्षक के मुताबिक दोनों पक्षों के बीच विभागीय लड़ाई है। पुलिस आरोप सही पाये जाने के बाद आगे की कार्यवाही करेगी। 
 
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