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102 एंबुलेंस सेवा में पकड़ा गया बड़ा फर्जीवाड़ा, एेसे खुली पोल

Tue, 09 May 2017 01:03 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Tue, 09 May 2017 01:03 PM IST
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102 ambulance service scam in uttar pradesh
डेमो - फोटो : demo pic

केस-1- फतेहपुर जिले की एंबुलेंस संख्या यूपी-41 जी-3512 ने 11 नवंबर 2016 को सुबह 5:47 बजे जाफराबाद से मरीज को लिया और 5:55 बजे हसवा सीएचसी पर ड्रॉप किया। इसी समय एक दूसरे मरीज को इसी एंबुलेंस से 5:50 बजे तुलसीपुर से लिया गया और उसे 5:55 हथगांव सीएचसी पर ड्रॉप किया गया। एक ही समय में दो अलग-अलग मरीजों को अलग-अलग अस्पतालों में कैसे ड्रॉप किया गया?

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केस-2- इलाहाबाद में एंबुलेंस संख्या यूपी 70 एजी-1399 ने 11 नवंबर 2016 को एक ही लोकेशन करछना पीएचसी से 13 अलग-अलग मरीजों को लेकर करछना सीएचसी में ड्रॉप किया। सभी मरीजों में करछना पीएचसी से करछना सीएचसी की दूरी पांच से लेकर 25 किलोमीटर तक हर केस में अलग-अलग दिखाई गई है। जब सभी मरीजों को एक ही लोकेशन से लेकर एक ही लोकेशन पर ड्रॉप किया गया तो यह दूरी अलग-अलग क्यों दिखाई गई?
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केस-3-बांदा में एंबुलेंस संख्या यूपी 41 जी-2351 ने 29 नवंबर को एक मरीज को बांदा जिला अस्पताल में 19:20 बजे ड्रॉप किया। इसके बाद यही एंबुलेंस अतर्रा सीएचसी 19:35 पर पहुंच गई। 34 किलोमीटर की दूरी15 मिनट में कैसे तय हो गई। इसके बाद 19:46 बजे मरीज लेकर बांदा पहुंचना भी संदेह उत्पन्न करता है।
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ये चंद उदाहरण हैं जो 102 राष्ट्रीय एंबुलेंस सेवा के फर्जीवाड़े को दर्शाते हैं। इस एंबुलेंस सेवा का संचालन भी जीवीके-ईएमआरआई कंपनी कर रही है। कंपनी ने कागजों पर फर्जी ढंग से मरीजों को अस्पताल पहुंचा दिया।

इसका खुलासा नेशनल हेल्थ मिशन के निदेशक आलोक कुमार की रैंडम जांच में हुआ है। लखनऊ सहित करीब 30 जिलों में यह घपला पकड़ में आया है। मिशन निदेशक ने मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने के निर्देश दिए हैं।

कंपनी हर महीने देती है ब्योरा

102 ambulance service scam in uttar pradesh
डेमो - फोटो : अमर उजाला

बता दें कि 102 राष्ट्रीय एंबुलेंस सेवा गर्भवती महिलाओं व नवजात बच्चों को अस्पताल व वहां से घर पहुंचाने के लिए है। यह सेवा मरीजों को निशुल्क उपलब्ध कराई जाती है। कंपनी हर महीने जिले के सीएमओ को एंबुलेंस से मरीजों को अस्पताल पहुंचाने एवं घर छोड़ने का ब्योरा देती है।

इस ब्योरे की जांच कर सीएमओ जब बिल वेरिफाई करते हैं, तभी राज्य सरकार की ओर से कंपनी को भुगतान होता है, लेकिन सीएमओ व कंपनी की साठगांठ से फर्जी बिलों का भी भुगतान करा दिया गया।

एनएचएम के निदेशक की रैंडम जांच में कई जिलों में गड़बड़ियां सामने आई हैं। सेवा प्रदाता कंपनी ने कागजों में एक ही एंबुलेंस के जरिए एक ही समय दो-दो मरीजों को अलग-अलग अस्पताल पहुंचा दिया।

एक ही स्थान से मरीज को उठाने और एक ही स्थान पर ड्रॉप करने के लिए अलग-अलग मरीजों में दूरी अलग-अलग दिखा दी गई।एनएचएम निदेशक आलोक कुमार ने इस मामले की जांच डीजी परिवार कल्याण को दी है।

उन्होंने कहा कि जिन सीएमओ ने इन केसों को वेरिफाई किया है उनका स्पष्टीकरण लिया जाए। यदि सीएमओ को यह लगता है कि सेवा प्रदाता कंपनी ने गुमराह कर वेरिफाई करवा लिया है तो संबंधित सेवा प्रदाता के खिलाफ जिलों में एफआईआर दर्ज की जाए। यदि इस मामले में सीएमओ दोषी हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।

स्वास्थ्य मंत्री भी जता चुके हैं नाराजगी

102 ambulance service scam in uttar pradesh
सिद्धार्थनाथ सिंह - फोटो : demo pic
जीवीके-ईएमआरआई ने एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस सेवा आधी-अधूरी तैयारियों के बीच शुरू करवा दी थी। इसके बाद मुख्यमंत्री की फ्लीट में खराब एंबुलेंस भेज दी गई।

इस पर सूबे के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कंपनी के अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा था कि सुधार न हुआ तो कंपनी को ब्लैक लिस्ट कर दिया जाएगा।
 
‘एनएचएम की रैंडम जांच में गड़बड़ी सामने आई है। इस मामले में एनएचएम के निदेशक ने डीजी फैमिली वेलफेयर को कार्रवाई के लिए लिखा है। इस मामले में सीएमओ की भूमिका भी जांची जाएगी। साथ ही मॉनिटरिंग सिस्टम को और मजबूत किया जाएगा।’ -अरुण कुमार सिन्हा, अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य
 

‘जीवीके-ईएमआरआई ने मरीजों के जो ट्रिप उपलब्ध कराए हैं उनकी रैंडम जांच में कई जिलों में गड़बड़ियां सामने आई हैं। डीजी फैमिली वेलफेयर को सीएमओ से स्पष्टीकरण मांगने व दोषियों के खिलाफ एफआईआर कराने के निर्देश दिए गए हैं। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।’  - आलोक कुमार, निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन
 

‘इसमें किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं है। सीएमओ ने सभी को वेरिफाई किया है। यदि कुछ शंका है तो दोबारा जांच करा ली जाए। जहां तक एक ही समय दो-दो मरीजों को अस्पताल पहुंचाने की बात है तो यह सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी हो सकती है। जहां तक किलोमीटर ज्यादा दिखाने की बात है तो सरकार से हमें प्रति मरीज पैसा मिलता है न कि किलोमीटर का।स्वास्थ्य मंत्री भी जता चुके हैं नाराजगी’  - जितेंद्र वालिया, सीओओ, जीवीके-ईएमआरआई
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