यूपी में निवेश के माहौल के लिए चाहिए 25,000 एकड़ जमीन, 10,000 करोड़ रुपये
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फिलहाल दो लाख करोड़ रुपये की इन्वेस्टमेंट प्रोफाइल तैयार कराने और 25 हजार एकड़ का लैंडबैंक बनाने का लक्ष्य सरकार ने रखा है। लैंडबैंक के लिए ‘सप्लीमेंट्री फंड’ बनाने पर भी विचार हो रहा है।
इन्वेस्टमेंट समिट की तैयारियों से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकार ने नई औद्योगिक एवं निवेश नीति में पूर्वांचल, बुंदेलखंड, मध्यांचल, पश्चिमी यूपी व गाजियाबाद, नोएडा को अलग-अलग क्षेत्र में बांटकर निवेशकों के लिए सुविधाओं की व्यवस्था की है।
सरकार प्रदेश में औद्योगीकरण के असंतुलन को ध्यान में रखकर 2 लाख करोड़ रुपये की इन्वेस्टमेंट प्रोफाइल तैयार करा रही है। यह काम अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त डॉ. अनूपचंद्र पांडेय के निर्देशन में हो रहा है।
इसमें क्षेत्र व जिले विशेष के लिए उपयुक्त इंडस्ट्री की पहचान की जा रही है, जिससे इन्वेस्टमेंट समिट में एक लाख करोड़ रुपये के एमओयू का लक्ष्य हासिल करने में दिक्कत न हो। अधिकारियों का कहना है कि निवेश के लिए पहली आवश्यकता जमीन है। इस समय करीब 7,500 एकड़ जमीन उपलब्ध है।
मुख्यमंत्री जिस तरह का औद्योगीकरण का माहौल बनाने पर बल दे रहे हैं, उसके लिए करीब 25 हजार एकड़ जमीन चाहिए। इसलिए बड़े पैमाने पर प्राइवेट जमीन भी लेनी पड़ेगी। इसके लिए करीब 10 हजार करोड़ रुपये की जरूरत होगी। मुख्यमंत्री ने प्रमुख सचिव वित्त को लैंडबैंक के लिए सप्लीमेंट्री फंड बनाने से जुड़े प्रस्ताव पर विचार करने का निर्देश दिया है।
सरकारी जमीन बाजार दर पर उद्योगों को देने का प्रस्ताव
लैंडबैंक बढ़ाने के लिए सरकार कई अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रही है। इसमें सरकारी जमीन बाजार दर पर उद्योगों को देने का प्रस्ताव भी है। इसके अलावा राजस्व विभाग को प्राइवेट इंडस्ट्रियल पार्क की स्थापना के लिए जरूरी छूट देने और एग्रो प्रोसेसिंग व सोलर मेगा पार्क के लिए जमीन लीज पर देने के प्रावधान पर भी विचार हो रहा है।
पोटेंशियल इन्वेस्टमेंट जोन
लखनऊ, गौतमबुद्धनगर, मुरादाबाद, आगरा, कानपुर, गोरखपुर, ललितपुर व झांसी, फतेहपुर, चित्रकूट, वाराणसी व सोनभद्र।
कहां किस क्षेत्र में निवेश की संभावना
कानपुर : कोल्ड चेन लॉजिस्टिक्स एंड स्टोरेज इक्विपमेंट, आईटी पार्क, स्टार्ट-अप हब, इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल हब एंड पार्क, टेक्निकल टेक्सटाइल, फार्मास्युटिकल एंड बायोटेक्नोलॉजी पार्क, डिफेंस पार्क, मल्टीमोड लॉजिस्टिक्स पार्क, हाई वैल्यू मिल्क प्रोडक्ट, बखारी और वेयर हाउसिंग।
गोरखपुर : चारा उत्पादन हब, आईटी पार्क, फार्मास्युटिकल एंड बायोटेक्नोलॉजी पार्क, मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क, मेगा फूड पार्क।
इलाहाबाद: आतिथ्य एवं आवास, डिफेंस पार्क, कार्गो हब, स्टार्ट अप हब, मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क, फार्मास्युटिकल एंड बायोटेक्नोलॉजी पार्क।
मेरठ: हैलीकॉप्टर एंड हैलीपैड, कोल्ड चेन लॉजिस्टिक्स एंड स्टोरेज इक्विपमेंट, चारा उत्पादन फार्म, आईटी पार्क, क्षेत्रीय व लघु फिल्में, इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल हब व पार्क।
चोला : एयरोट्रोपोलीज, एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग, असेंबलिंग, कार्गो हब एंड एमआरओ फैसिलिटीज।
गौतमबुद्धनगर : एयर कार्गो हब, हैलीपोर्ट एंड हैलीपैड, इलेक्ट्रानिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, मोबाइल एंड कंज्यूमर इलेक्ट्रानिक्स, डिफेंस एंड एयरोस्पेस पार्क, ऑटोमोटिव हब, टेक्निकल टेक्सटाइल हब, वीएफएक्स एंड एनिमेशन हब, फार्मास्युटिकल पार्क।
झांसी : लॉजिस्टिक्स हब, वेयर हाउसिंग, मैन्युफैक्चरिंग, पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग।
वाराणसी : इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल पार्क एंड हब, धार्मिक पर्यटन, रीजनल, लघु व कला फिल्में, आईटी पार्क, स्टार्ट-अप, फूडर प्रोडक्शन हब और कोल्ड चेन लॉजिस्टिक्स।