फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

ट्रैवल गाइड, जिन्होंने बनाया दुनिया का नक्शा

Tue, 14 Apr 2020 07:43 AM IST
योगेश जोशी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: योगेश जोशी Updated Tue, 14 Apr 2020 07:43 AM IST
विज्ञापन
the travel guides that charted our world
- फोटो : file photo

आज सारी दुनिया छोटे-छोटे गैजेट्स में सिमट कर जेब में आ गई है। दुनिया का कोई भी कोना सिर्फ एक क्लिक की दूरी पर है। आज हम उन रास्तों पर भी बेखौफ चल पड़ते हैं, जिनका ओर-छोर पता नहीं होता। हम बेफिक्र होते हैं, यह सोच कर कि हमारे पास गूगल मैप है, वो हमें भटकने नहीं देगा।

लेकिन आज से पांच सौ बरस पहले ऐसा नहीं था। जरा सोचिए जब लोगों के पास ऐसे संसाधन नहीं थे तब लोग कैसे सफर करते होंगे। जब लोगों को यही नहीं पता होता था कि समंदर कितने हैं, महाद्वीप कितने हैं। अमरीका किधर है, इंडोनेशिया कहां है। उस दौर में भी बहुत से साहसी लोग नाव पर सवार होकर या पैदल ही दुनिया की सैर को निकल पड़ते थे।

आज तो हर जगह का नक्शा है। गूगल मैप ने दुनिया को कदमों में नाप कर, समेटकर आप के मोबाइल में डाल दिया है, लेकिन पांच सौ बरस पहले तो दुनिया का ठीक-ठीक नक्शा भी कागज पर नहीं उकेरा गया था।



 

 

the travel guides that charted our world
file photo - फोटो : pixabay
  • दुनिया का पहला नक्शा

शुरुआती दौर के नक्शे दुनिया की आधी-अधूरी तस्वीरें पेश करते थे। उस दौर में नक्शा बनाने का केंद्र इटली के शहर हुआ करते थे। इटली और स्पेन के कारोबारी और अन्वेषक पूरे हौसले से दुनिया की खोज को निकलते थे। फिर ये जो जानकारी लेकर लौटते थे, उनके आधार पर नक्शे बनाए जाते थे। पुराने नक्शों में सुधार किया जाता था।

यूरोप में दुनिया का पहला नक्शा 1448 में तैयार किया गया था जो कि खूबसूरत और दिलकश था। इसे वेनिस के मानचित्रकार जियोवान्नी लिआर्दो ने चमड़े पर तैयार किया था। इसका नाम था प्लेनिस्फेरो।.

इस नक्शे की बुनियाद थे यूनानी-रोमन विद्वान टॉलेमी का भूकेंद्रीय मॉडल, बुत परस्तों के निशान, ईसाइयों की श्रद्धा, अरबी भौगोलिक सिद्धांत और वैज्ञानिक फॉर्मूले शामिल थे। इस नक्शे में तमाम प्रायद्वीपों को उन्हीं नामों से रेखांकित किया गया है, जिस नाम से उस दौर में यूरोप के लोग इन्हें जानते थे।

नक्शे में दुनिया के चारों तरफ छह दायरे बने हैं, जिनमें छोटे-छोटे नंबर और अक्षर लिखे हैं। इन नंबरों और दायरों से जमीन के चारों तरफ चांद की चाल, मौसमों और त्यौहारों का चक्र समझाया जाता था।

प्लेनिस्फेरो, लैटिन भाषा का शब्द है। प्लेनस मतलब चपटा और स्फेरस मतलब गोला। मानचित्रकार जियोवान्नी लिआर्दो के दस्तखत वाले सिर्फ तीन ही नक्शे आज मौजूद हैं।

सबसे पुराना नक्शा 1442 का है, जो इटली के मध्यकालीन शहर वेरोना की बिबलियोटेका कम्यूनेला नाम की लाइब्रेरी में सुरक्षित है। लिआर्दो का आखिरी मानचित्र 1452 का है, जो अमरीकन ज्योग्राफिकल सोसाएटी लाइब्रेरी में है।

 

 

the travel guides that charted our world
file photo - फोटो : Pixabay
  • नक्शे पर आधारित हजारों किताबें

लेकिन इस नक्शे से पहले 1448 में एक और नक्शा तैयार किया गया था। ये मानचित्र भी इटली के ही एक अन्य शहर वेनिस में बिबलियोटेका सिविका बर्टिलोनिया लाइब्रेरी में सुरक्षित है। बताया जाता है कि बिबलियोटेका सिविका बर्टिलोनिया में नक्शों पर हजारों किताबें और हस्तलिपियां हैं। अगर इन सभी को फैला कर रखा जाए तो करीब 19 किलोमीटर में फैल जाएंगी।

इटली के विसेन्जा शहर में अमीरों की तादाद ज्यादा थी। कहा जाता है कि ये अमीर नक्शे, गाइड और बेशकीमती किताबें लाइब्रेरी को दान कर देते थे।


15वीं और 16वीं सदी में खोजी सफर पर निकलने वालों के लिए ये नक्शे ट्रैवल गाइड की तरह काम करते थे। इन्हीं नक्शों की बुनियाद पर नाविकों ने दुनिया के कई हिस्से खोज निकाले।

15वीं और 16वीं शताब्दी के अंत में जिस समय दुनिया के नए-नए इलाके खोजे जा रहे थे, उसी समय प्रिंटिंग का काम भी शुरू हुआ। जिसने नक्शे छापने के काम में इंकलाब लाने का काम किया।नाविकों, व्यापारियों से जितनी भी जानकारियां मिलती थीं, उन्हें छापकर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जाता था।

छपाई के बाद जियोवान्नी लिआर्दो का प्लेनिस्फेरो पुराना पड़ चुका था। आज हम दुनिया को जितना जानते हैं, वो इन्ही नाविकों और व्यापारियों की जानकारी के बदौलत जानते हैं।

 

 

विज्ञापन
विज्ञापन
the travel guides that charted our world
file photo - फोटो : amar ujala
  • टॉलेमी का किरदार

टॉलेमी के मुताबिक दुनिया चपटी और 70 डिग्री चौड़ी है। टॉलेमी को ये पता था कि भारत, चीन यूरोप के पूरब में हैं। इसी जानकारी के आधार पर टॉलेमी ने मानचित्र भी बनाया, जिसकी बुनियाद पर 15वीं शताब्दी में खोजकर्ताओं ने अपना सफर शुरू किया।

टॉलेमी के नक्शे की पहली कॉपी लैटिन में 1475 में छपी थी। टॉलेमी को लोग गणितज्ञ, भूगोल का माहिर, और नजूमी (ज्योतिष) के तौर पर जानते हैं, जिसे दूसरी सदी में रोमन साम्राज्य में दुनिया का भूगोल बताने का काम सौंपा गया था।

वर्षों तक टॉलेमी के भूज्ञान को ही सही माना जाता रहा, लेकिन बदकिस्मती से टॉलेमी के नक्शों का खजाना गायब हो गया। लिहाजा, 13वीं सदी में बाइजेंटाइन साम्राज्य में मैक्सिमस प्लेनूडस ने नए सिरे से दुनिया की खोज शुरू की।

चूंकि, 1406 तक टॉलेमी की तमाम जानकारियों को ग्रीक जबान से लैटिन भाषा में हाथ से लिख लिया गया था, लिहाजा इन्हीं जानकारियों की बुनियाद पर नए सिरे से नक्शे बनाए गए।

1475 की टॉलेमी की हस्तलिपियों में नक्शे शामिल नहीं थे, इनमें सिर्फ अनुभव के आधार पर लिखी जानकारियां थी। लेकिन बाद में जो नक्शे बनाए गए, उनमें हाथ से रंग भी भरे गए। जमीन दर्शाने के लिए पीला रंग और समुद्र के लिए नीला रंग इस्तेमाल हुआ।

विज्ञापन
the travel guides that charted our world
file photo - फोटो : Pixabay
  • लेखक का नाम नहीं होते था किताबों में

1500 से पहले की जितनी भी किताबें या हस्तलिपियां नक्शों पर आधारित हैं, उन सभी में वो पेज नहीं है जिस पर किताब की प्रस्तावना, किताब और लिखने वाले का नाम, तारीख आदि लिखी रहती है।

इसका चलन 1500 के बाद प्रिंटिंग के जमाने में अलदुस मनुटियस ने शुरू किया था। वो पहला ऐसा शख्स था, जिसने इटैलिक्स फोन्ट का इस्तेमाल किया और करीब 130 किताबों को ग्रीक से लैटिन भाषा में छापा।

 

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed