देश के कई हिस्सों में आज जन्माष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है। आपको बता दें देश के कई हिस्सों में कल यानी 13 अगस्त को जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जन्माष्टमी के दिन भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। भगवान कृष्ण के बाल रूप को लड्डू गोपाल कहा जाता है। जन्माष्टमी के दिन भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है। आज हम आपको भगवान कृष्ण के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताएंगे जो देश- दुनिया में काफी प्रसिद्ध है। इस मंदिर में लगातार भगवान के दर्शन नहीं होते हैं। थोड़ी- थोड़ी देर के अंतराल में पर्दा लगा दिया जाता है। आइए जानते हैं भगवान कृष्ण के इस पावन मंदिर के बारे में...
Janmashtami 2020: भगवान कृष्ण के इस मंदिर में नहीं करने दिए जाते हैं लगातार दर्शन...थोड़ी- थोड़ी देर में लगाया जाता है पर्दा
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बांके बिहारी मंदिर, वृंदावन
- वृंदावन में भगवान कृष्ण और राधारानी के एकाकार रूप का प्रसिद्ध मंदिर है, जिसे बांके बिहारी जी के मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस पावन मंदिर में काफी संख्या में देश- विदेश से भक्त दर्शन करने आते हैं।
अनुरोध पर प्रकट हुई प्रतिमा
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बांके बिहारी की प्रतिमा को बनाया नहीं गया है। यह प्रतिमा स्वामी हरिदास जी के अनुरोध पर प्रकट हुई थी। ऐसा कहा जाता है कि ये प्रतिमा लकड़ी की है। स्वामी हरिदास ने भगवान कृष्ण और राधारानी के एकाकार रूप को बांके बिहारी का नाम दिया था।
- लगातार नहीं होते हैं बांके बिहारी के दर्शन, थोड़ी- थोड़ी देर में लगता है पर्दा...
बांके बिहारी मंदिर में बांके बिहारी जी के दर्शन लगातार नहीं होते हैं। थोड़ी- थोड़ी देर में पर्दा लगाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा माना जाता है कि अगर बांके बिहारी जी की किसी भक्त पर कुछ देर तक नजर पड़ गई तो वो उस भक्त के साथ ही हमेशा- हमेशा के लिए चले जाएंगे।
बांके बिहारी किसी भक्त के साथ न चले जाएं, इसलिए किसी भी भक्त को लगातार दर्शन करने नहीं दिए जाते हैं। थोड़ी- थोड़ी देर में पर्दा लगा दिया जाता है। इसके पीछे एक कथा भी प्रचलित है। इस कथा के अनुसार एक बार बांके बिहारी अपने किसी भक्त के साथ चले गए थे और इस मंदिर से प्रतिमा गायब हो गई थी।
भगवान से की गई प्रार्थना
- धार्मिक कथाओं के अनुसार बांके बिहारी जी की प्रतिमा यहां से गायब होने के बाद यहां के पुजारियों ने भगवान से काफी प्रार्थना की, जिसके बाद बांके बिहारी जी की प्रतिमा इस मंदिर पर पुन: स्थापित हुई। तब से किसी भी भक्त को बांके बिहारी जी को लगातार देखने नहीं दिया जाता है। मंदिर में थोड़ी- थोड़ी देर में पर्दा लगाया जाता है।