दुनिया के कई देशों में लॉकडाउन में अब ढील दी जाने लगी है। धीरे-धीरे दफ्तर भी खुलने लगे हैं। ऐसे में लोगों के मन में एक डर जरूर है कि क्या उनका ऑफिस जाना अभी सुरक्षित है। तमाम पुराने तौर-तरीकों के साथ ही अब एंप्लॉयीज को मॉनिटर करने के लिए टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल में और इजाफा होने जा रहा है।
कोरोना वायरस: काम करने के लिए कितने सुरक्षित रहेंगे दफ्तर, क्या बनी रहेगी वर्क फ्रॉम होम की आदत?
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कुछ साल पहले एम्सटर्डम की द एज बिल्डिंग को दुनिया की सबसे स्मार्ट और सस्टेनेबल यानी स्थायित्व भरी बिल्डिंग के तौर पर सबसे ज्यादा वोट मिले थे। अब सेंसरों के भरे दफ्तरों वाली यह बिल्डिंग एक तेजी से फैलने वाले वायरस के साथ जीने की नई सच्चाई के साथ खुद को ढालने की कोशिश कर रही है।
इस बिल्डिंग को बनाने वाली रियल एस्टेट फर्म के फाउंडर कोएन वैन ऊस्ट्रॉम ने बीबीसी को बताया कि कुछ तो ऐसे बदलाव हैं जिन्हें तत्काल लागू किया जा सकता है।
एयर क्वालिटी
वह कहते हैं, 'दरवाजे फिलहाल हाथ से खोले जा सकते हैं, लेकिन वॉयस कंट्रोल या ऐप के जरिए इन्हें खोलना एक मामूली कदम होगा। हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि वायरस इस तरह से न फैल पाए।'
वह कहते हैं, 'हमारे पास कैमरे हैं जिनसे पता चल सकता है कि कितने लोग फ्लोर पर हैं और सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए यह भी पता चल सकता है कि लोग एक-दूसरे से कितनी दूर खड़े हैं। अगर लोग एक-दूसरे के ज्यादा करीब आते हैं तो हम उन्हें फोन पर चेतावनी भी भेज सकते हैं।'
ऊस्ट्रॉम बताते हैं, 'सभी को यह चीज पसंद नहीं आएगी और कई लोग इसे उनकी निजता में दखल मान सकते हैं, ऐसे में हमने अभी इसके इस्तेमाल का फैसला नहीं किया है।' दूसरी ज्यादातर बिल्डिंगों के उलट द एज पहले ही कर्मचारियों को एक फोन ऐप दे रही है जिसके जरिए वे यह जान सकते हैं कि ऑफिस का तापमान क्या है और एयर क्वालिटी कैसी है। साथ ही उन्हें ऑफिस की कैंटीन से लंच ऑर्डर करने की भी आजादी दी जा रही है।
इससे पहले एयर क्वालिटी पर किसी का फोकस नहीं था। ऊस्ट्रॉम कहते हैं कि अब यह माना जा रहा है कि अगर ताजी हवा पर्याप्त मात्रा मं नहीं होगी तो वायरस फैल सकता है और इस वजह से लोग अब इसे नोटिस कर रहे हैं।
सीटिंग प्लान में भी बदलाव करना होगा ताकि सामाजिक दूरी के नियमों का पालन हो सके। लेकिन, रिसर्च फर्म वर्डान्टिक्स की स्मार्ट बिल्डिंग एक्सपर्ट सुसैन क्लार्क कहती हैं कि कंपनियां अपने कामकाजी तौर-तरीकों में शायद ही कोई बड़ा बदलाव करें।
वह कहती हैं, 'सीटों की एक-दूसरे से कम दूरी बनी रहेगी। हम जिस तरह की आर्थिक मंदी देख रहे हैं उसमें ज्यादातर कंपनियां और ऑफिस स्पेस ले पाने में असमर्थ होंगी। लेकिन, इस बारे में सोचा जरूर जाएगा और इन्हें संक्रमण मुक्त बनाने के लिए बार-बार साफ-सफाई कराई जाएगी।'