डायबिटीज का खतरा दुनियाभर में तेजी से बढ़ता देखा जा रहा है, कम उम्र के लोग भी इसका शिकार हो रहे हैं। एक बार डायबिटीज शुरू हो जाने के बाद इसे फिर से ठीक कर पाना बहुत मुश्किल होता है। लाइफस्टाइल-खानपान और दवाओं के माध्यम से इसे बस कंट्रोल रखा जा सकता है।
समय रहते सावधान: प्री-डायबिटीज का मतलब डायबिटीज नहीं, डॉक्टर ने बताया कैसे कर सकते हैं इसे रिवर्स?
प्री-डायबिटीज का मतलब डायबिटीज होना नहीं है, बल्कि समय रहते बदलाव करने का मौका है। शुरुआती 6-12 महीनों में खान-पान, वजन, व्यायाम और नींद पर ध्यान देना महत्वपूर्ण हो सकता है। विशेषज्ञ के अनुसार प्रोटीन, जल्दी डिनर, 12 घंटे का रातभर फास्ट, रोज वॉक और पर्याप्त नींद मददगार आदतें हैं।
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प्री-डायबिटीज है तो हो जाएं सावधान
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, प्री-डायबिटीज में ब्लड शुगर सामान्य से ऊपर पहुंच जाता है, लेकिन ये डायबिटीज की सीमा तक नहीं पहुंचा होता है। यही वह चरण है जहां खान-पान, वजन, शारीरिक गतिविधि, और रोजमर्रा की आदतों में बदलाव करके आप अपने जोखिमों को कम कर सकते हैं।
गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी कहते हैं, प्री-डायबिटीज का पता चलने के बाद के शुरुआती 6 से 12 महीने बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
- इस दौरान अगर सावधानी बरत ली जाए तो आप जीवनभर के लिए शुगर का मरीज बनने से बच सकते हैं।
- लेकिन अगर इस चेतावनी को नजरअंदाज किया गया है, तो समय के साथ आप बड़े खतरे का शिकार हो सकते हैं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
हार्वर्ड और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से प्रशिक्षण प्राप्त गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉक्टर सौरभ सेठी कहते हैं, प्री-डायबिटीज को वापस सामान्य स्थिति में लाया जा सकता है, खासकर अगर समय रहते सही कदम उठाए जाएं। सही जीवनशैली अपनाने से प्री-डायबिटीज को रिवर्स करने में 70-80% मदद मिल सकती है।
अगर इस दौरान जीवनशैली में आप कोई सुधार नहीं करते या प्री-डायबिटीज पर ध्यान नहीं देते तो पैंक्रियाज की वे कोशिकाएं जो इंसुलिन बनाती हैं, हर साल अपनी कार्यक्षमता का लगभग 4-5 प्रतिशत खोती जाती हैं।
- डॉ. सेठी एक आम गलतफहमी भी दूर करते हैं। उनका कहना है कि बीटा सेल्स हमेशा पूरी तरह खत्म नहीं हो जातीं।
- कई मामलों में वे सिर्फ लगातार ज्यादा काम करने की वजह से थकी हुई होती हैं।
- सही खान-पान और जीवनशैली की आदतों से इन कोशिकाओं की कार्यक्षमता में फिर सुधार हो सकता है।
डॉ. सेठी कहते हैं, अध्ययन में पाया गया कि प्री-डायबिटीज के दौरान जिन लोगों ने अपने शरीर का 10-15 प्रतिशत वजन कम किया, उनमें से 86 प्रतिशत तक लोगों में टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा कम हो गया। डॉ कहते हैं, वेट लॉस के साथ जब शरीर के अंदर, खासकर लिवर और पैंक्रियाज के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी कम होती है, तो इंसुलिन के प्रति शरीर की संवेदनशीलता बेहतर हो सकती है।
रिपोर्ट में प्री-डायबिटीज है तो क्या करें?
डॉ. सौरभ कहते हैं, प्री-डायबिटीज को रिवर्स करने में कुछ आसान उपायों से लाभ पाया जा सकता है। डॉ. सेठी कहते हैं,असली समस्या यह है कि ज्यादातर लोग जो बदलाव प्री-डायबिटीज के समय ही शुरू कर देना चाहिए था, उसे बहुत देर से करते हैं।
अगर रिपोर्ट में प्री-डायबिटीज आई है तो तुरंत कुछ उपाय शुरू कर दें तो आप बड़ी मुसीबतों से बच सकते हैं।
- भोजन में प्रोटीन की मात्रा बढ़ा दें।
- रात का खाना जल्दी खाएं।
- रात में 12 घंटे का फास्टिंग गैप रखें, यानी रात के खाने और अगली सुबह के नाश्ते के बीच करीब 12 घंटे का अंतर रखें।
- हर दिन 15 मिनट तेज चलें।
- 7-8 घंटे की नींद को प्राथमिकता दें। ये वेट लॉस के लिए बहुत जरूरी है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।