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Home Decor: इन सात वास्तु से बदलेंगे घर के हालात, रहने वालों का जीवन भी बनेगा खुशहाल
Sat, 14 Jun 2025 05:32 PM IST
शिवानी अवस्थी
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिवानी अवस्थी
Updated Sat, 14 Jun 2025 05:32 PM IST
सार
Vastu Shastra Rules For House: घर में वास्तु नियमों का ध्यान रखना जरूरी है, क्योंकि ये नियम घर से लेकर उसमें रहने वाली लोगों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और सुख-समृद्धि बनाए रखने में मदद करते हैं।
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घर के लिए वास्तु नियम
- फोटो : adobe stock
विस्तार
अनीता जैन, वास्तुविद
आज की तनावपूर्ण और व्यस्त जीवन-शैली में मानसिक रूप से शांत रहना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। ऐसे में घर ही वह स्थान होता है, जहां व्यक्ति सुकून से रहना चाहता है। लेकिन जब वही घर नकारात्मक ऊर्जा से भर जाए तो न सिर्फ मानसिक अशांति बढ़ती है, बल्कि स्वास्थ्य और समृद्धि पर भी बुरा असर पड़ता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की संरचना, उसमें रखी वस्तुएं, दिशाओं का संतुलन और स्थान का ऊर्जा प्रवाह, ये सभी मिलकर उस स्थान के सकारात्मक और नकारात्मक वातावरण तय करते हैं। यदि इनका उचित ध्यान रखा जाए, तो घर में सुख-समृद्धि बरकरार रहती है।
ऊर्जा का प्रवेश द्वार
वास्तु शास्त्र में मुख्य द्वार को घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश द्वार माना गया है। ऐसे में दरवाजे के दोनों ओर स्वास्तिक, ॐ या शुभ-लाभ का चिह्न बनाना शुभ होता है। इसके साथ ही दरवाजे पर मंगलकारी तोरण लगाने से भी घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है।
शंख और घंटी
प्रतिदिन सुबह और शाम के समय घर में शंख, घंटी या गायत्री मंत्र की ध्वनि घर से नकारात्मक ऊर्जा को दूर भगाती है। ये ध्वनि तरंगें वातावरण को शुद्ध करती हैं और मानसिक शांति प्रदान करती हैं। इससे घर का माहौल शांतिपूर्ण और भक्तिमय बना रहता है।
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उत्तर-पूर्व
मानसिक स्पष्टता और प्रज्ञा की दिशा उत्तर-पूर्व (ईशान) पूजा करने के लिए आदर्श स्थान है, क्योंकि यह कोण पूर्व एवं उत्तर दिशा के शुभ प्रभावों से युक्त होता है। घर के इसी क्षेत्र में सत्व ऊर्जा का प्रभाव शत-प्रतिशत होता है। विशेष रूप से इस दिशा को हमेशा साफ-सुथरा, और खुला रखें। इस दिशा में छोटा झरना या एक्वेरियम रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है।
भारी वस्तुओं की दिशा
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा को स्थिरता और मजबूती की दिशा माना जाता है। इसलिए भारी अलमारी, पत्थर के शोपीस या भारी फर्नीचर इसी दिशा में रखना लाभकारी मन गया है। यदि भारी वस्तुएं उत्तर या पूर्व दिशा में रख दी जाएं तो सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह अवरुद्ध हो जाता है, जिससे अनेक परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं।
जल और अग्नि का संतुलन
वास्तु शास्त्र के अनुसार, रसोई-घर में अग्नि तत्व (गैस चूल्हा) और जल तत्व (वॉटर फिल्टर, सिंक) को एक साथ या बहुत पास-पास रखना टकराव की स्थिति उत्पन्न करता है, जिससे घर में कलह, असंतुलन और मानसिक अशांति बढ़ सकती है। इसलिए हमेशा रसोई-घर में चूल्हा दक्षिण-पूर्व दिशा में और जल की व्यवस्था उत्तर-पूर्व या उत्तर दिशा में होनी चाहिए। रसोईघर में खराब बर्तन या एक्सपायरी सामान न रखें। ये नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाते हैं।
बीम से बचें
वास्तु सिद्धांतों में बीम के ठीक नीचे बैठना या सोना मानसिक दबाव, अनिद्रा और तनाव को जन्म देता है। कोशिश करें कि डाइनिंग टेबल, पलंग या सोफा बीम के ठीक नीचे न हो। यदि संभव न हो तो बीम को छुपाने के लिए लकड़ी की फॉल्स सीलिंग लगाई जा सकती है।
शुभ है विंड चाइम्स
फेंग शुई में विंड चाइम्स को बेहद शुभ और समृद्धिकारक माना गया है। माना जाता है कि विंड चाइम से निकली मधुर ध्वनि एवं ऊर्जा घर से नकारात्मकता को दूर कर मन को शांत करती है। यदि घर में वास्तुदोष है तो उसके निवारण के लिए विंड चाइम मुख्य द्वार पर लगानी चाहिए। इसे दरवाजे पर परदे के पास इस प्रकार लटकाना चाहिए, ताकि हवा के झोंके से हिलकर यह मधुर ध्वनि उत्पन्न कर सके। इससे न केवल घर में ऊर्जा का प्रवाह बना रहेगा, बल्कि निराशा और उदासीनता भी धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगी।
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आज की तनावपूर्ण और व्यस्त जीवन-शैली में मानसिक रूप से शांत रहना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। ऐसे में घर ही वह स्थान होता है, जहां व्यक्ति सुकून से रहना चाहता है। लेकिन जब वही घर नकारात्मक ऊर्जा से भर जाए तो न सिर्फ मानसिक अशांति बढ़ती है, बल्कि स्वास्थ्य और समृद्धि पर भी बुरा असर पड़ता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की संरचना, उसमें रखी वस्तुएं, दिशाओं का संतुलन और स्थान का ऊर्जा प्रवाह, ये सभी मिलकर उस स्थान के सकारात्मक और नकारात्मक वातावरण तय करते हैं। यदि इनका उचित ध्यान रखा जाए, तो घर में सुख-समृद्धि बरकरार रहती है।
ऊर्जा का प्रवेश द्वार
वास्तु शास्त्र में मुख्य द्वार को घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश द्वार माना गया है। ऐसे में दरवाजे के दोनों ओर स्वास्तिक, ॐ या शुभ-लाभ का चिह्न बनाना शुभ होता है। इसके साथ ही दरवाजे पर मंगलकारी तोरण लगाने से भी घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है।
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शंख और घंटी
प्रतिदिन सुबह और शाम के समय घर में शंख, घंटी या गायत्री मंत्र की ध्वनि घर से नकारात्मक ऊर्जा को दूर भगाती है। ये ध्वनि तरंगें वातावरण को शुद्ध करती हैं और मानसिक शांति प्रदान करती हैं। इससे घर का माहौल शांतिपूर्ण और भक्तिमय बना रहता है।
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उत्तर-पूर्व
मानसिक स्पष्टता और प्रज्ञा की दिशा उत्तर-पूर्व (ईशान) पूजा करने के लिए आदर्श स्थान है, क्योंकि यह कोण पूर्व एवं उत्तर दिशा के शुभ प्रभावों से युक्त होता है। घर के इसी क्षेत्र में सत्व ऊर्जा का प्रभाव शत-प्रतिशत होता है। विशेष रूप से इस दिशा को हमेशा साफ-सुथरा, और खुला रखें। इस दिशा में छोटा झरना या एक्वेरियम रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है।
भारी वस्तुओं की दिशा
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा को स्थिरता और मजबूती की दिशा माना जाता है। इसलिए भारी अलमारी, पत्थर के शोपीस या भारी फर्नीचर इसी दिशा में रखना लाभकारी मन गया है। यदि भारी वस्तुएं उत्तर या पूर्व दिशा में रख दी जाएं तो सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह अवरुद्ध हो जाता है, जिससे अनेक परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं।
जल और अग्नि का संतुलन
वास्तु शास्त्र के अनुसार, रसोई-घर में अग्नि तत्व (गैस चूल्हा) और जल तत्व (वॉटर फिल्टर, सिंक) को एक साथ या बहुत पास-पास रखना टकराव की स्थिति उत्पन्न करता है, जिससे घर में कलह, असंतुलन और मानसिक अशांति बढ़ सकती है। इसलिए हमेशा रसोई-घर में चूल्हा दक्षिण-पूर्व दिशा में और जल की व्यवस्था उत्तर-पूर्व या उत्तर दिशा में होनी चाहिए। रसोईघर में खराब बर्तन या एक्सपायरी सामान न रखें। ये नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाते हैं।
बीम से बचें
वास्तु सिद्धांतों में बीम के ठीक नीचे बैठना या सोना मानसिक दबाव, अनिद्रा और तनाव को जन्म देता है। कोशिश करें कि डाइनिंग टेबल, पलंग या सोफा बीम के ठीक नीचे न हो। यदि संभव न हो तो बीम को छुपाने के लिए लकड़ी की फॉल्स सीलिंग लगाई जा सकती है।
शुभ है विंड चाइम्स
फेंग शुई में विंड चाइम्स को बेहद शुभ और समृद्धिकारक माना गया है। माना जाता है कि विंड चाइम से निकली मधुर ध्वनि एवं ऊर्जा घर से नकारात्मकता को दूर कर मन को शांत करती है। यदि घर में वास्तुदोष है तो उसके निवारण के लिए विंड चाइम मुख्य द्वार पर लगानी चाहिए। इसे दरवाजे पर परदे के पास इस प्रकार लटकाना चाहिए, ताकि हवा के झोंके से हिलकर यह मधुर ध्वनि उत्पन्न कर सके। इससे न केवल घर में ऊर्जा का प्रवाह बना रहेगा, बल्कि निराशा और उदासीनता भी धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगी।