रोजमर्रा में खाते हैं हम बहुत सारी ऐसी सब्जियां, वास्तव में वो फल हैं, देखिए इनकी सूची
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भारतीय खानपान में फलाहार का खास स्थान है। सात्विक भोजन को श्रेष्ठतम बताने वाले इसे अधिकतर ‘कंद, मूल, फल’ पर आधारित समझते हैं। शाकाहार इसका जुड़वा सहोदर समझिए। राष्ट्रपिता बापू ने अपने जीवन के अधिकांश भाग में चुस्त तंदुरुस्त रहने के लिए फलाहार का मार्ग चुना था, जिसे वह ‘फ्रूटेरियन डाइट’ कहते थे। पर ज्यादातर लोग फलों को वृक्ष पर पकने के बाद बिना रांधे ही खाते हैं। इनको सब्जी की तरह कभी-कभार तथा कहीं-कहीं ही पकाया जाता है।
मजेदार बात यह है कि बहुत सारी सब्जियां जो हम रोजमर्रा में खाते हैं वनस्पति शास्त्रियों के अनुसार फल ही हैं। इस सूची में टमाटर, कद्दू, बैंगन, मटर, शिमला मिर्च, भिंडी, बैगन शामिल किए जाते हैं। बहरहाल, यहां हम उन फलों का जिक्र कर रहे हैं, जिनकी पहचान आम आदमी के मन में फल के ही रूप में हैं, उनका कायाकल्प पकने के बाद ही सब्जी में होता है।
फलों की दुनिया में रंगों, खटास-मिठास, सुवास की इतनी विविधता से हमारा साक्षात्कार होता है कि किसी भी शाकाहारी ही क्यों मांसाहारी व्यंजन को और भी आकर्षक बनाने के लिए मौसमी या सुखाए फलों का इस्तेमाल किया जा सकता है। कुछ फल अकेले ही अपना अनोखा जादू जगाने में सक्षम हैं। कच्चे केले की सब्जी-सूखी, तरीवाली या कोफ्ते की शक्ल में-उपवास की फलाहारी थाली में खासी लोकप्रिय है।
केले के फूल तथा केले के वृक्ष के तने की सब्जी बंगाल, असम, ओडिशा, तामिलनाडु आदि में चाव से खाई जाती है। कटहल पकने पर कई जगह फल की तरह खाया जाता है और कच्चा फल सब्जी के काम आता है। यदि इन दो को छोड़ दें तो बाकी फल बिना चूल्हे पर चढ़ाए ही खाए पचाए जाते हैं। पर ऐसा नहीं है कि इनका उपयोग सब्जी के रूप में नहीं किया जाता। देश के अनेक हिस्सों में अलग-अलग फल इस काम में लाए जाते हैं।
कश्मीर में पंडितों की रसोई में ‘सेब और टमाटर की सब्जी बहुत लोकप्रिय है। बंगाल के शाकाहारी व्यंजनों में ‘कमला कौपी’ उल्लेखनीय है, जिसमें संतरा जुगलबंदी साधता है फूलगोभी के साथ। अवध के बावर्ची अपने हुनर की नुमाइश करते हैं कच्चे आम की फांक से ‘अंबर कलिया’ बनाकर।
केरल में ‘मीन मापस’ में मछली के मजे की कल्पना आम के अभाव में की ही नहीं जा सकती। राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके में जहां अभी हाल तक ताजी सब्जियां मुश्किल से देखने को मिलती थीं, अमरूद और तरबूज की तरकारी दाल और बेसन तथा सूखी कैर-सांगरी की एकरसता को तोड़ने में मददगार होती थीं।
अमरूद की सब्जी इनमें खासी दिलचस्प है। इसे सूखा या लिपटवां रखा जा सकता है, बनाने में ज्यादा देर नहीं लगती और अमरूद की कुदरती मिठास को जरा से अचारी मसाले और भी आकर्षक बना देते हैं। तरबूज की सब्जी बनाने के लिए ज्यादा कौशल की दरकार होती है। कच्चे तरबूज को पेठे की तरह रोगनजोश के रूप में पेश किया जाता है, परंतु पके फल को सब्जी की शक्ल देना सहज नहीं। फल का गूदा मुलायम होता है और पानी का भंडार। इसके अलावा मिठास भी तेज होती है और सभी तरह की खटास या तेज मसाले इसे रास नहीं आते। मेथी-किशमिश की सब्जी में मेथी दानों से कम महत्व किशमिश (और खजूर) का नहीं रहता।
थाईलैंड में कच्चे पपीते का सलाद बेहद लोकप्रिय है। उससे प्रेरणा लेकर हमारी एक मित्र ने बहुत कम पकाकर भारतीय मसालों का इस्तेमाल कर एक सब्जी ईजाद की है, जो एक बार चखने के बाद बार-बार खाने का मन करता है। अगर आप तंदूरी व्यंजनों के प्रेमी हैं तो तंदूरी फलों की चाट में अनानास के टिक्कों को कैसे भुला सकते हैं।