फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Lifestyle ›   Healthy Food ›   cancer preventive new technique

कैंसर को फैलने से रोकेंगी 'स्टिकी बॉल्स'

Thu, 09 Jan 2014 12:02 PM IST
Updated Thu, 09 Jan 2014 12:02 PM IST
विज्ञापन
cancer preventive new technique

कैंसर को ख़त्म करने वाली 'स्टिकी बॉल्स' ख़ून में ट्यूमर की कोशिकाएं नष्ट कर सकती हैं और इस तरह कैंसर को फैलने से रोक सकती हैं।

विज्ञापन


पढ़ें - अब हो सकेगा ब्रेस्ट कैंसर का इलाज!


ट्यूमर की सबसे ख़तरनाक अवस्था वह होती है, जब वह पूरे शरीर में फैलना शुरू करता है।

अमरीका के कॉर्नेल विश्वविद्यालय में वैज्ञानिकों ने ऐसे नैनो पार्टिकल यानी अति सूक्ष्म अणु बनाए हैं, जो रक्त प्रवाह में बने रहते हैं और बाहर से आने वाली कैंसर की कोशिकाओं के संपर्क में आने पर उन्हें नष्ट कर देते हैं।

इस शोध की शुरुआती जांच में कहा गया कि इसके प्रभाव "नाटकीय" हैं लेकिन अभी "बहुत सारा काम किए जाने की ज़रूरत" है।

कैंसर का पता चलने के बाद ज़िंदा रहने की संभावना में सबसे महत्वपूर्ण यह तथ्य होता है कि कहीं ट्यूमर मेटास्टेटिक कैंसर में तो नहीं बदल गया है।

मुख्य शोधकर्ता प्रोफ़ेसर माइकल किंग कहते हैं, "कैंसर से होने वाली क़रीब 90 फ़ीसद मौतें मेटास्टेसिस की वजह से होती हैं।"

नाटकीय असर
कॉर्नेल विश्वविद्यालय के शोध दल ने इस समस्या से निजात पाने के लिए एक नया तरीका आज़माया।

उन्होंने कैंसर ख़त्म करने वाला, ट्रेल, नाम का प्रोटीन- जिसे पहले ही कैंसर प्रयोगों में इस्तेमाल किया जा चुका है- और अन्य चिपकने वाले प्रोटीनों को एक सूक्ष्म गोले या नैनोपार्टिकल से चिपकाया।
विज्ञापन


जब इन गोलों को ख़ून में डाला गया, तो वे सफ़ेद रक्त कोशिकाओं से चिपक गए।

प्रयोगों से पता चला कि उछलते-कूदते रक्त में सफ़ेद रक्त कोशिकाएं उन ट्यूमर कोशिकाओं से टकरातीं थीं, जो मुख्य ट्यूमर से टूटकर फैलने की कोशिश कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


नेशनल अकेडमी ऑफ़ साइंस की कार्यवाही में शामिल रिपोर्ट में बताया गया है कि ट्रेल प्रोटीन के संपर्क में आने से ट्यूमर कोशिकाएं ख़त्म हो गईं।

कॉर्नेल विश्वविद्यालय के शोध में ट्यूमर के फैलाव को रोकने में "स्टिकी बॉल्स" के नाटकीय प्रभाव दिखे।

प्रोफ़ेसर किंग ने बीबीसी को बताया, "ये आँकड़े नाटकीय प्रभाव प्रदर्शित कर रहे है। यह कैंसर कोशिकाओं की संख्या में मामूली बदलाव नहीं है। दरअसल इंसान और चूहे के रक्त में ये परिणाम सचमुच असाधारण हैं। दो घंटे के रक्त प्रवाह के बाद ट्यूमर कोशिकाएं विघटित हो गईं।"
रेडियोथेरेपी से पहले

प्रोफ़ेसर किंग का मानना है कि नैनोपार्टिकल्स को सर्जरी या रेडियोथेरेपी से पहले इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे मुख्य ट्यूमर से ट्यूमर कोशिकाओं को निकाला जा सकता है।


इसे बहुत आक्रामक ट्यूमर वाले मरीज़ों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है ताकि ट्यूमर का फैलाव रोका जा सके।

हालांकि इंसानों पर जांच से पहले चूहों और बड़े जानवरों पर काफ़ी अधिक सुरक्षा जांच की ज़रूरत पड़ेगी।

अभी तक के सबूतों से लगता है कि इस पद्धति का प्रतिरोधी तंत्र पर कोई शुरुआती असर नहीं है और यह रक्त कोशिकाओं या रक्त धमनियों की परत को कोई नुक़सान नहीं पहुंचाता।

मगर प्रोफ़ेसर किंग चेतावनी देते हैं, "अभी बहुत काम किया जाना बाक़ी है। मरीज़ को इसका लाभ मिलने से पहले कई महत्वपूर्ण खोजें होनी बाक़ी हैं।"

विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed