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जानना जरूरी: क्या देर रात सोने से वजन बढ़ता है? जानें मेटाबॉलिज्म पर नींद का असर
Wed, 07 Oct 2026 05:56 PM IST
Shruti Gaur
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shruti Gaur
Updated Wed, 07 Oct 2026 05:56 PM IST
सार
Late Night Sleeping Effects: इस लेख में जानें रात 2 बजे तक जागने की आदत मेटाबॉलिज्म, नींद, भूख और वजन को कैसे प्रभावित कर सकती है और इससे बचने के लिए क्या करें।
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जानना जरूरी: क्या देर रात सोने से वजन बढ़ता है?
- फोटो : AI
विस्तार
Late Night Sleeping Effects: आजकल देर रात तक मोबाइल चलाना, काम करना या वेब सीरीज देखना कई लोगों की रोजमर्रा की आदत बन गई है। कुछ लोग रात 1 या 2 बजे तक जागते हैं और फिर सुबह देर से उठते हैं। भले ही यह रूटीन सामान्य लगे, लेकिन लगातार अनियमित समय पर सोने की आदत शरीर की आंतरिक जैविक घड़ी यानी सर्केडियन रिदम को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, केवल रात 2 बजे सोने को मेटाबॉलिज्म स्लो होने का एकमात्र कारण नहीं माना जा सकता। अगर आपको भी इसको लेकर किसी तरह का संशय है तो आइए इस लेख में जानें देर रात तक जागने की आदत शरीर के मेटाबॉलिज्म, भूख और वजन पर कैसे असर डाल सकती है।
रात में 2 बजे तक जागने से मेटाबॉलिज्म पर क्या असर पड़ता है?
शरीर का मेटाबॉलिज्म केवल इस बात पर निर्भर नहीं करता कि आप कितने बजे सोते हैं। नींद की अवधि, नींद की गुणवत्ता, सर्केडियन रिदम, खान-पान और शारीरिक गतिविधि भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अगर कोई व्यक्ति लगातार देर रात तक जागता है और उसकी नींद पूरी नहीं होती, तो शरीर में भूख और पेट भरा होने से जुड़े हार्मोन के संतुलन पर असर पड़ सकता है। इसके कारण देर रात खाने की इच्छा बढ़ सकती है और कुल कैलोरी सेवन भी बढ़ सकता है।
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देर रात जागने से वजन क्यों बढ़ सकता है?
1. नींद की कमी
लगातार कम नींद लेने से भूख और खाने की आदतों में बदलाव हो सकता है। नींद की कमी के कारण व्यक्ति ज्यादा कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों की ओर आकर्षित हो सकता है।
2. देर रात स्नैकिंग
रात 1-2 बजे तक जागने वाले लोग अक्सर इस दौरान चिप्स, बिस्किट, मिठाई या दूसरे स्नैक्स खाते हैं। इससे बिना जरूरत अतिरिक्त कैलोरी शरीर में जा सकती है।
3. शरीर की जैविक घड़ी में बदलाव
हमारे शरीर में एक प्राकृतिक जैविक घड़ी होती है, जो नींद-जागने के चक्र के साथ-साथ कई शारीरिक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करती है। रात में जागने और दिन में सोने की आदत इस रिदम को प्रभावित कर सकती है।
4. शारीरिक गतिविधि कम होना
देर रात जागने के कारण सुबह उठने में देर हो सकती है। इससे दिनभर की गतिविधि और एक्सरसाइज का समय कम हो सकता है, जिसका असर वजन प्रबंधन पर पड़ सकता है।
क्या देर रात सोने से हर किसी का मेटाबॉलिज्म स्लो हो जाता है?
ऐसा कहना सही नहीं होगा कि रात 2 बजे सोने वाला हर व्यक्ति मेटाबॉलिज्म की समस्या से जूझेगा। अगर कोई व्यक्ति देर से सोता है लेकिन पर्याप्त और नियमित नींद लेता है, उसका खान-पान संतुलित है और वह पर्याप्त शारीरिक गतिविधि करता है, तो स्थिति अलग हो सकती है।
समस्या खासकर तब बढ़ सकती है जब देर रात जागना, कम नींद, अनियमित भोजन और कम शारीरिक गतिविधि एक साथ जुड़ जाएं।
मेटाबॉलिज्म और नींद को बेहतर रखने के लिए क्या करें?
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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रात में 2 बजे तक जागने से मेटाबॉलिज्म पर क्या असर पड़ता है?
शरीर का मेटाबॉलिज्म केवल इस बात पर निर्भर नहीं करता कि आप कितने बजे सोते हैं। नींद की अवधि, नींद की गुणवत्ता, सर्केडियन रिदम, खान-पान और शारीरिक गतिविधि भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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अगर कोई व्यक्ति लगातार देर रात तक जागता है और उसकी नींद पूरी नहीं होती, तो शरीर में भूख और पेट भरा होने से जुड़े हार्मोन के संतुलन पर असर पड़ सकता है। इसके कारण देर रात खाने की इच्छा बढ़ सकती है और कुल कैलोरी सेवन भी बढ़ सकता है।
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देर रात जागने से वजन क्यों बढ़ सकता है?
1. नींद की कमी
लगातार कम नींद लेने से भूख और खाने की आदतों में बदलाव हो सकता है। नींद की कमी के कारण व्यक्ति ज्यादा कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों की ओर आकर्षित हो सकता है।
2. देर रात स्नैकिंग
रात 1-2 बजे तक जागने वाले लोग अक्सर इस दौरान चिप्स, बिस्किट, मिठाई या दूसरे स्नैक्स खाते हैं। इससे बिना जरूरत अतिरिक्त कैलोरी शरीर में जा सकती है।
3. शरीर की जैविक घड़ी में बदलाव
हमारे शरीर में एक प्राकृतिक जैविक घड़ी होती है, जो नींद-जागने के चक्र के साथ-साथ कई शारीरिक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करती है। रात में जागने और दिन में सोने की आदत इस रिदम को प्रभावित कर सकती है।
4. शारीरिक गतिविधि कम होना
देर रात जागने के कारण सुबह उठने में देर हो सकती है। इससे दिनभर की गतिविधि और एक्सरसाइज का समय कम हो सकता है, जिसका असर वजन प्रबंधन पर पड़ सकता है।
क्या देर रात सोने से हर किसी का मेटाबॉलिज्म स्लो हो जाता है?
ऐसा कहना सही नहीं होगा कि रात 2 बजे सोने वाला हर व्यक्ति मेटाबॉलिज्म की समस्या से जूझेगा। अगर कोई व्यक्ति देर से सोता है लेकिन पर्याप्त और नियमित नींद लेता है, उसका खान-पान संतुलित है और वह पर्याप्त शारीरिक गतिविधि करता है, तो स्थिति अलग हो सकती है।
समस्या खासकर तब बढ़ सकती है जब देर रात जागना, कम नींद, अनियमित भोजन और कम शारीरिक गतिविधि एक साथ जुड़ जाएं।
मेटाबॉलिज्म और नींद को बेहतर रखने के लिए क्या करें?
- रोज लगभग एक ही समय पर सोने और जागने की कोशिश करें।
- वयस्कों को आमतौर पर 7-9 घंटे की नींद लेने का लक्ष्य रखना चाहिए।
- सोने से पहले मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल कम करें।
- रात में बहुत भारी भोजन और बार-बार स्नैकिंग से बचें।
- दिन के दौरान नियमित शारीरिक गतिविधि करें।
- सुबह प्राकृतिक रोशनी में कुछ समय बिताना नींद-जागने के चक्र के लिए मददगार हो सकता है।
- अगर लगातार नींद की समस्या, अत्यधिक थकान या वजन में अचानक बदलाव हो रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।