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Hindi News ›   Lifestyle ›   Hariyali Teej 2024 Folk Songs in hindi hariyali teej ke Lokgeet

Hariyali Teej 2024: ये रहे हरियाली तीज के सुंदर लोकगीत, गाकर मनाएं सहेलियों संग पर्व

Wed, 07 Aug 2024 07:37 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवानी अवस्थी Updated Wed, 07 Aug 2024 07:37 AM IST
सार

कई जगहों पर इस दिन महिलाएं झूला डालकर त्योहार का आनंद लेती हैं और लोकगीत गाती हैं। इस लेख में हरियाली तीज के प्रसिद्ध और लोकप्रिय लोकगीत बताए जा रहे हैं, जिसे आप इस पर्व के मौके पर गा सकती हैं।

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Hariyali Teej 2024 Folk Songs in hindi hariyali teej ke Lokgeet
हरियाली तीज के लोकगीत - फोटो : amar ujala

विस्तार

Hariyali Teej 2024 : श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष हरियाली तीज 7 अगस्त को मनाई जा रही है। हरियाली तीज का पर्व हर सुहागिन महिलाओं के लिए अहम होता है। हिंदू धर्म में हरियाली तीज के दिन भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती की पूजा का विधान है। तीज का व्रत भी करवाचौथ की तरह निर्जला यानी बिना पानी पिए रखा जाता है।

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कई जगहों पर इस दिन महिलाएं झूला डालकर त्योहार का आनंद लेती हैं और लोकगीत गाती हैं। इस लेख में हरियाली तीज के प्रसिद्ध और लोकप्रिय लोकगीत बताए जा रहे हैं, जिसे आप इस पर्व के मौके पर गा सकती हैं।

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हरियाली तीज के लोकगीत- 1


नांनी नांनी बूंदियां
नांनी नांनी बूंदियां हे सावन का मेरा झूलणा,
एक झूला डाला मैंने बाबल के राज में,
बाबुल के राज में...

संग की सहेली हे सावन का मेरा झूलणा,
नांनी नांनी बूंदियां हे सावन का मेरा झूलणा.
ए झूला डाला मैंने भैया के राज में,
भैया के राज में..

गोद भतीजा हे सावन का मेरा झूलणा,
नांनी नांनी बूंदियां हे सावन का मेरा झूलणा।

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हरियाली तीज के लोकगीत- 2
 

झुला झूल रही सब सखियाँ, आई हरयाली तीज आज,
राधा संग में झूलें कान्हा झूमें अब तो सारा बाग़,
झुला झूल रही सब सखियाँ, आई हरयाली तीज आज,

नैन भर के रस का प्याला देखे श्यामा को नदं लाला,
घन बरसे उमड़ उमड़ के देखों नृत्य करे बृज बाला,
छमछम करती ये पायलियाँ  खोले मन के सारे राज,
झुला झूल रही सब सखियाँ, आई हरयाली तीज आज।


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हरियाली तीज के लोकगीत- 3


सावन का महीना, झुलावे चित चोर, धीरे झूलो राधे पवन करे शोर,
मनवा घबराये मोरा बहे पूरवैया, झूला डाला है नीचे कदम्ब की छैयां…
कारी अंधियारी घटा है घनघोर, धीरे झूलो राधे पवन करे शोर,
सखियां करे क्या जाने हमको इशारा, मन्द मन्द बहे जल यमुना की धारा…
सावन का महीना झूलावे चित चोर…

श्री राधेजी के आगे चले ना कोई जोर, धीरे झूलो राधे, पवन करे शोर,
मेघवा तो गरजे देखो बोले कोयल कारी, पाछवा में पायल बाजे नाचे बृज की नारी…
श्री राधे परती वारो हिमरवाकी और, धीरे झूलो राधे पवन करे शोर,
सावन का महीना झूलावे चित चोर…

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