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Titanium Heart: ट्रांसप्लांट के लिए नहीं मिला दिल तो 'मशीनी हार्ट' की मदद से तीन महीने तक जिंदा रहा व्यक्ति

Tue, 18 Mar 2025 07:41 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Tue, 18 Mar 2025 07:41 PM IST
सार

एक ऑस्ट्रेलियाई व्यक्ति ने टाइटेनियम से बने कृत्रिम हृदय के साथ 100 दिनों से अधिक समय तक जीवित रहकर इतिहास रच दिया है। इस खबर ने उम्मीद जगा दी है कि अब हार्ट ट्रांसप्लांट की जरूरत होने पर ये एक प्रभावी तरीका हो सकता है।

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टाइटेनियम का हार्ट (सांकेतिक) - फोटो : Freepik.com

विस्तार

वैश्विक स्तर पर हर साल लाखों लोगों की समय पर अंग न मिलने के कारण मौत हो जाती है। अंग की कमी का संकट एक वैश्विक स्वास्थ्य समस्या है। रिपोर्ट्स से पता चलता है कि अंग प्रत्यारोपण की जितनी मांग है, उसकी तुलना में आपूर्ति बहुत कम है। इसके चलते मरीजों को लंबे समय तक ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए इंतजार करना पड़ता है, इस दौरान कई लोगों की मौत भी हो जाती है। हालांकि अब इस संबंध में एक उम्मीद भरी खबर सामने आ रही है।

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक ऑस्ट्रेलियाई व्यक्ति ने टाइटेनियम से बने कृत्रिम हृदय के साथ 100 दिनों से अधिक समय तक जीवित रहकर इतिहास रच दिया है। इस खबर ने उम्मीद जगा दी है कि अब हार्ट ट्रांसप्लांट की जरूरत होने पर ये एक प्रभावी तरीका हो सकता है।

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टाइटेनियम से बना कृत्रिम हृदय (सांकेतिक) - फोटो : Adobe Stock

समय पर नहीं मिल पाया था ह्यूमन हार्ट

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक व्यक्ति को हार्ट फेलियर की शिकायत थी, जिसके बाद नवंबर में सिडनी के सेंट विंसेंट अस्पताल में कार्डियोथोरेसिक और ट्रांसप्लांट सर्जन पॉल जान्स के नेतृत्व में उसे टाइटेनियम से बना कृत्रिम हृदय लगाया गया था। छह घंटे की सर्जरी वाली इस प्रक्रिया में BiVACOR नामक एक उपकरण का इस्तेमाल हुआ है।

डॉ जान्स ने कहा कि हमने वर्षों से इस क्षण के लिए काम किया है और हमें इस प्रक्रिया को सफलतापूर्ण अंजाम देने वाली ऑस्ट्रेलिया की पहली टीम होने पर बहुत गर्व है।इस साल मार्च में जब ऑर्गन डोनेशन से व्यक्ति को ह्यूमन हार्ट मिला है और उसे दोबारा से ट्रांसप्लांट करके अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

डॉक्टरों का कहना है कि यह कृत्रिम हृदय, हार्ट फेलियर रोगियों के लिए दीर्घकालिक समाधान बन सकता है, हालांकि अभी यह परीक्षण के चरण में है और आम जनता के लिए उपलब्ध नहीं है। ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. पॉल जान्स ने इसे “गेम-चेंजर” बताया है।

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आर्टिफिशियल हार्ट - फोटो : Freepik.com

रक्त को पंप कर सकता है ये हार्ट

क्वींसलैंड में जन्मे डॉ. डैनियल टिम्स ने इस कृत्रिम हृदय को विकसित किया है। ये आर्टिफिशियल हार्ट निरंतर रूप से रक्त को पंप करते रहता है। ये जब तक डोनर द्वारा ह्यूमन हार्ट नहीं मिल जाता है तब तक व्यक्ति को जिंदा रखने में मददगार हो सकता है।  

कुछ हृदय रोग विशेषज्ञों का कहना है कि यह उन लोगों के लिए एक स्थाई विकल्प हो सकता है जो अपनी उम्र या अन्य स्वास्थ्य स्थितियों के कारण प्रत्यारोपण नहीं करा सकते हैं। 

डॉक्टर बताते हैं, टाइटेनियम आर्टिफिशियल हार्ट, असली हार्ट से बहुत अलग तरीके से काम करता है। प्राकृतिक हृदय रक्त पंप करने के लिए सिकुड़ता है, लेकिन यह कृत्रिम हृदय सिकुड़ नहीं सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर क्लिनिकल ट्रायल में सब ठीक रहा, तो उम्मीद है कि यह डिवाइस 4-5 सालों में दुनिया भर में उपलब्ध हो जाएगी।

मरीजों को लंबे समय तक करना पड़ता है इंतजार

यूनाइटेड किंगडम में, डोनर हार्ट के लिए प्रतीक्षा सूची में शामिल मरीजों को आमतौर पर 18 से 24 महीने तक इंतजार करना पड़ता है। हर साल दुनियाभर में 6,000 से भी कम हार्ट ट्रांसप्लांट किए जाते हैं, वो भी केवल सबसे गंभीर मामलों के लिए के लिए।

कृत्रिम हार्ट जैसे विकल्पों की जरूरत इसलिए है क्योंकि डोनर हार्ट पाना आसान नहीं है और ये पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध भी नहीं हैं।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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