{"_id":"614199a28ebc3e84795e4171","slug":"coronavirus-medicine-update-glenmark-pharmaceuticals-completes-pms-study-on-fabiflu-in-india","type":"story","status":"publish","title_hn":"अध्ययन में दावा: कोरोना मरीजों के लिए सुरक्षित है फैबीफ्लू दवा, पर हो सकते हैं ये साइड इफेक्ट","category":{"title":"Health & Fitness","title_hn":"हेल्थ एंड फिटनेस","slug":"fitness"}}
अध्ययन में दावा: कोरोना मरीजों के लिए सुरक्षित है फैबीफ्लू दवा, पर हो सकते हैं ये साइड इफेक्ट
Wed, 15 Sep 2021 12:31 PM IST
सोनू शर्मा
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Wed, 15 Sep 2021 12:31 PM IST
सार
- ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स का कहना है कि भारत में हल्के से मध्यम कोरोना रोगियों में फेविपिराविर पर किया गया यह पहला और सबसे बड़ा पोस्ट मार्केटिंग अध्ययन है।
- कंपनी का कहना है कि अध्ययन के परिणाम बताते हैं कि फेविपिरवीर के उपयोग से कोई नया सुरक्षा संकेत या चिंता की बात नहीं दिखाई दी।
विज्ञापन
कोरोना की दवा
- फोटो : Pixabay/Amar Ujala
विस्तार
देश की प्रमुख दवा कंपनी ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स ने भारत में कोरोना की अपनी दवा फेविपिराविर (फैबीफ्लू) पर अपने पोस्ट मार्केटिंग सर्विलांस (पीएमएस) अध्ययन को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। कंपनी ने हल्के से मध्यम कोरोना रोगियों में फेविपिराविर की सुरक्षा और प्रभावकारिता का मूल्यांकन करने के लिए पोस्ट मार्केटिंग सर्विलांस अध्ययन जुलाई 2020 में शुरू किया था। यह अध्ययन भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीजीसीआई) से प्रतिबंधित आपातकालीन उपयोग की मंजूरी मिलने के बाद शुरू किया गया था। कंपनी का कहना है कि भारत में हल्के से मध्यम कोरोना रोगियों में फेविपिराविर पर किया गया यह पहला और सबसे बड़ा पोस्ट मार्केटिंग अध्ययन है।
विज्ञापन
कंपनी का कहना है कि अध्ययन के परिणाम बताते हैं कि फेविपिरवीर के उपयोग से कोई नया सुरक्षा संकेत या चिंता की बात नहीं दिखाई दी, बल्कि पहले से ही ज्ञात दुष्प्रभाव जैसे कि कमजोरी, गैस्ट्राइटिस, दस्त, उल्टी आदि देखने को मिले। अध्ययन के मुताबिक, कोरोना मरीजों को फेविपिराविर दवा देने के बाद उनका बुखार चार दिन में ही ठीक हो गया, जबकि नैदानिक (क्लीनिकल) इलाज का समय सात दिन था।
विज्ञापन
इंडिया फॉर्म्युलेशन के ग्रुप वाइस प्रेसिडेंट और हेड आलोक मलिक ने इन निष्कर्षों पर टिप्पणी करते हुए कहा, 'यह अध्ययन महत्वपूर्ण था, क्योंकि इसने वास्तविक दुनिया में फैबीफ्लू की सुरक्षा और प्रभावकारिता की जांच की। यह ग्लेनमार्क और चिकित्सा समुदाय दोनों के लिए एक कदम आगे है, क्योंकि यह महामारी से निपटने में मौखिक एंटीवायरल के कई लाभों की पुष्टि करता है।'
विज्ञापन
इस अध्ययन में कुल 1,083 कोरोना मरीजों को शामिल किया गया था। अध्ययन में शामिल कोरोना मरीजों की औसत उम्र 40 साल थी, जिसमें 40 फीसदी महिलाएं और 60 फीसदी पुरुष थे। इन रोगियों में उच्च रक्तचाप (11 फीसदी) और मधुमेह (8 फीसदी) के मरीज भी शामिल थे। अध्ययन के मुताबिक, सभी रोगियों में बुखार की समस्या मौजूद थी, जबकि 81 फीसदी मरीजों में खांसी, 46.2 फीसदी में थकान और 41 फीसदी में स्वाद की क्षमता का नुकसान जैसे लक्षण थे।
स्रोत और संदर्भ:
Glenmark concludes post marketing surveillance (PMS) study on Favipiravir (FabiFlu®) in 1000+ COVID-19 patients, findings reinforce the drug’s safety and efficacy in real world settings
https://www.glenmarkpharma.com/sites/default/files/Glenmark%20concludes%20PMS%20study%20on%20Favipiravir%20in%201000%2B%20COVID-19%20patients.pdf
अस्वीकरण नोट: यह लेख ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स द्वारा की गई स्टडी के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। किसी भी तरह की बीमारी के लक्षण हों अथवा आप किसी रोग से ग्रसित हों तो अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।