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बचपन में लगे सदमे से निकालने में मददगार हो सकते हैं घर के बड़े या रिश्तेदार

Mon, 23 Sep 2019 09:23 AM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: अपराजिता शुक्ला Updated Mon, 23 Sep 2019 09:23 AM IST
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childhood trauma is treat by family or relatives
- फोटो : Pixabay

करीब दो दशक के अध्ययन के आधार अमेरिका के ब्रिघम यंग विश्वविद्यालय के अध्ययनकर्ताओं ने दावा किया है कि बचपन में पेश आए बुरे अनुभव (एडवर्स चाइल्डहुड एक्सपीरियंस- एसीई) से उबरने में अच्छे दोस्त, परिवार, शिक्षक और पड़ोसी सबसे बड़े मददगार साबित होते हैं। वे बचपन को सकारात्मक बनाने में मदद करते हैं। लंबे समय में एसीई की वजह से होने वाले स्वास्थ्य पर असर, नशे की आदत, मोटापे और कम आत्मविश्वास जैसी कमजोरियों को भी सहयोगपूर्ण वातावरण से रोका जा सकता है।

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इन एसीई में परिवार में किसी सदस्य की मौत, माता-पिता के तलाक, दुर्घटना, हिंसा या अपराध की पीड़ा आदि शामिल हैं। ऐसा किसी के भी साथ और किसी भी परिवार में हो सकता है। बच्चों पर इनका जीवन भर न भुलाया जा सकने वाला असर भी होता है। अध्ययनकर्ता अली क्रेंडल के अनुसार सकारात्मक और सुरक्षापूर्ण माहौल बच्चों को इन बुरे अनुभवों से उबरने में मदद करता है। यह सकारात्मक बचपन पीड़ित बच्चों को एक बेहतर वयस्क बनने में न केवल मदद करता है, बल्कि वे रिश्ते निभाने में भी ज्यादा गंभीर होते हैं।

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a - फोटो : pixa

अध्ययनकर्ताओं की सिफारिश के अनुसार बच्चे कैसे भी बुरे हालात से गुजरे हों, उन्हें एक सुरक्षित और सकारात्मक माहौल देना हर वयस्क की जिम्मेदारी होनी चाहिए। इसके जरिए ही वे समाज को एक जिम्मेदार वयस्क देने में मदद कर पाएंगे।

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