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झारखंड पहुंचा विवाद: वंदे मातरम पर प्रदीप यादव ने CM को लिखा चिट्ठी, कहा- शुरुआती दो छंद ही किए जाएं अनिवार्य
Wed, 16 Sep 2026 03:39 PM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
Updated Wed, 16 Sep 2026 03:39 PM IST
सार
कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर झारखंड में सरकारी कार्यक्रमों और विद्यालयों में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के केवल शुरुआती दो छंदों को अनिवार्य करने की मांग की है।
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झारखंड सीएम हेमंत सोरेन ( फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर राज्य में 'वंदे मातरम' के केवल प्रारंभिक दो छंदों को ही अनिवार्य करने की मांग की है। उन्होंने अपने पत्र में कर्नाटक और केरल की सरकारों का उदाहरण दिया है। उन्होंने कहा कि वहां की सरकारों ने सरकारी कार्यक्रमों और विद्यालयों में केवल पहले दो छंद ही अनिवार्य किए हैं।
प्रदीप यादव ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राजनीतिक स्वार्थ के लिए देश की बहुधार्मिक जनभावनाओं के विपरीत काम कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय और संसद के नए दिशा-निर्देशों के तहत वंदे मातरम के सभी छह छंदों को गाना अनिवार्य किया गया है।
प्राकृतिक सुंदरता पर आधारित छंद
कांग्रेस नेता ने तर्क दिया कि गीत के प्रारंभिक दो छंद पूरी तरह मातृभूमि की प्राकृतिक सुंदरता पर आधारित हैं। इनमें किसी भी विशेष धार्मिक प्रतीक का वर्णन नहीं है। यह भारत की भौगोलिक और प्राकृतिक संपन्नता की सराहना करता है। इसे हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी धर्मों के लोग बिना किसी संकोच के एक सुर में गा सकते हैं।
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ये भी पढ़ें- रांची: अतिक्रमण हटाने के दौरान हंगामा, प्रदर्शनकारी ने सीओ को मुक्का मारा
ऐतिहासिक संदर्भ और समिति का निर्णय
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 1937 में रवींद्रनाथ टैगोर और महात्मा गांधी की सलाह पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस, पंडित जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल की समिति ने इसे स्वीकार किया था। इसके बाद, 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इसे आधिकारिक रूप से राष्ट्रीय गीत घोषित किया था।
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प्रदीप यादव ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राजनीतिक स्वार्थ के लिए देश की बहुधार्मिक जनभावनाओं के विपरीत काम कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय और संसद के नए दिशा-निर्देशों के तहत वंदे मातरम के सभी छह छंदों को गाना अनिवार्य किया गया है।
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प्राकृतिक सुंदरता पर आधारित छंद
कांग्रेस नेता ने तर्क दिया कि गीत के प्रारंभिक दो छंद पूरी तरह मातृभूमि की प्राकृतिक सुंदरता पर आधारित हैं। इनमें किसी भी विशेष धार्मिक प्रतीक का वर्णन नहीं है। यह भारत की भौगोलिक और प्राकृतिक संपन्नता की सराहना करता है। इसे हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी धर्मों के लोग बिना किसी संकोच के एक सुर में गा सकते हैं।
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ऐतिहासिक संदर्भ और समिति का निर्णय
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 1937 में रवींद्रनाथ टैगोर और महात्मा गांधी की सलाह पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस, पंडित जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल की समिति ने इसे स्वीकार किया था। इसके बाद, 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इसे आधिकारिक रूप से राष्ट्रीय गीत घोषित किया था।