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युवा दिवस 2020: शहीद औरंगजेब के भाइयों की संघर्षगाथा, किसी भी युवा के लिए प्रेरणादायक कहानी

Sun, 12 Jan 2020 12:47 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Sun, 12 Jan 2020 12:47 PM IST
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yuva diwas 2020 swami vivekananda jayanti an Inspirational story of martyr Aurangzeb's brothers
शहीद औरंगजेब के दो भाइ सेना में हुए शामिल - फोटो : अमर उजाला, फाइल फोटो

12 जनवरी 1863 को कोलकाता में स्वामी विवेकानंद का जन्म हुआ था। स्वामी विवेकानंद की जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। आज देश की तरक्की में युवा का अहम योगदान है। बात जब देश की रखवाली की हो तो सेना में शामिल होकर दुश्मन से मोर्चा लेने वाले जांबाजों के योगदान को कभी भुलाया ही नहीं जा सकता। आज युवा दिवस के मौके पर हम आपको रूबरू कराने जा रहे हैं शहीद औरगंजेब के दो भाइयों से, वो भाई जिन्होंने औरंगजेब की शहादत के बाद कसम खाई की वह सेना में शामिल होकर आतंकवादियों और पाकिस्तान को करारा जवाब देंगे।

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22 जुलाई 2019 को जम्मू-कश्मीर के राजोरी में शहीद जवान औरंगजेब के परिवार के लिए सोमवार का दिन यादगार हो गया था। शहीद औरंगजेब के दो भाई उनकी शहादत का बदला लेने के लिए सेना में शामिल हो गए। टेरिटोरियल आर्मी की एनरोलमेंट परेड में मोहम्मद तारिक और मोहम्मद शब्बीर के माता-पिता भी मौजूद थे। गर्व के इन क्षणों में शहीद के पिता मोहम्मद हनीफ ने कहा कि उन्होंने अपने एक बेटे की शहादत का बदला लेने के लिए दो बेटों को सेना में भेजा है।
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सीमावर्ती जिला पुंछ के तहसील के सलोनी निवासी सेना के शहीद जवान औरंगजेब के दोनों भाई मार्च माह में पुंछ के सुरनकोट में आयोजित भर्ती रैली में शामिल हुए थे। इसमें 11000 से अधिक उम्मीदवार थे लेकिन केवल 101 का चयन किया गया। इन्हीं में यह दो नौजवान भी शामिल हैं।
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शहर के पलमा इलाके में सेना की काउंटर इंसर्जेंसी फोर्स (रोमियो) के तत्वावधान में 156 इन्फैन्ट्री बटालियन टेरिटोरियल आर्मी द्वारा रंगरूटों की एनरोलमेंट परेड के दौरान मौजूद मोहम्मद हनीफ ने कहा, अपना एक बेटा देश की सेवा में खोया है और अब दोनों बेटों को उस शहीद की मौत का बदला लेने के लिए सेना में भर्ती कराया है। पिता ने कहा कि जब तक उनके बेटे के हत्यारे सारे आतंकवादी खत्म नहीं हो जाते उनको चैन नहीं मिलेगा।

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