पर्यावरण दिवस: जम्मू की पवित्र हवा में घुल रहा जहर, पांच साल में 50 फीसदी अधिक फैला प्रदूषण
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मंदिरों के शहर जम्मू की आबोहवा में लगातार जहर घुल रहा है। सड़कों पर दौड़ते हजारों वाहन, निर्माण कार्यों और औद्योगिक क्षेत्रों से निकलता प्रदूषण हवा में फैलकर वातावरण को दूषित कर रहा है। पिछले पांच साल से जम्मू शहर में वायु प्रदूषण का स्तर सामान्य से पचास फीसदी ऊपर चल रहा है। वर्ष 2018 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के सर्वे में 102 नान अटेनमेंट शहरों में जम्मू और श्रीनगर भी शामिल थे। इन शहरों में लगातार पांच साल से प्रदूषण का स्तर सामान्य से ऊपर रह रहा है। वायु प्रदूषण बढ़ने से शहरवासियों में सांस संबंधी बीमारियों की शिकायत बढ़ी है।
वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण सड़कों पर वाहनों की बढ़ती संख्या है। रोजाना हजारों वाहनों से निकल रहा धुआं वायु में कई जहरीले केमिकल घोल रहा है। हवा में रेसप्रेटरी सस्पेंडेंड पार्टिक्यूलेट मैटर (पीएम 10 यानी आरएसपीएम, जो प्रदूषण नाक और मुंह के रास्ते शरीर के भीतर जाकर नुकसान पहुंचाता है) का स्तर लगातार सामान्य से पचास फीसदी तक ऊपर चला गया है। इसी तरह पीएम 2.5 (रेसप्रेटरी सस्पेंडेंड पार्टिक्यूलेट मैटर) नाक और मुंह के रास्ते शरीर के भीतर जाकर सेट हो जाता है, यह मानव अंगों को अधिक नुकसान पहुंचाता है।
वाहनों के प्रदूषण से कार्बन डायऑक्साइड, फासफोरस, कार्बन मोनोऑक्साइड आदि केमिकल निकलकर हवा में फैल रहे हैं। शहर के ट्रैफिक से अति व्यस्ततम स्थानों में विक्रम चौक, ज्यूल, गांधीनगर, शास्त्रीनगर, त्रिकुटा नगर, गुम्मट, इंदिरा चौक, बीसी रोड, पुराने शहर में पुरानी मंडी, सिटी चौक, रघुनाथ बाजार आदि में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ा है। प्रदूषण का स्तर जिस तेजी से बढ़ रहा है, उससे भविष्य में कई गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो जाएंगी।
नरवाल में वायु प्रदूषण
तत्व सामान्य 2016-17 2017-18 2018-19
पीएम 10 चौबीस घंटे में 100 (माइक्रोग्राम, साल में 60) 137 155 161
पीएम 2.5 40 (सामान्य 40) 48 40
एमए स्टेडियम में वायु प्रदूषण
तत्व 2016-17 2017-18 2018-19
पीएम 10 137 158 146
पीएम 2.5 52 40
बाड़ी ब्राह्मणा में वायु प्रदूषण
तत्व 2016-17 2017-18 2018-19
पीएम 10 136 158 152
पीएम 2.5 43 39
"विभागीय एक्शन प्लान में वाहनों की लाइफ कम करने की सिफारिश की गई है। इसमें 25 वर्ष से कम करके 15 वर्ष की जाएगी। इसके अलावा लकड़ी के बदले एलपीजी गैस का प्रयोग, औद्योगिक इकाइयों में प्रदूषण को प्यूरीफाई करने के लिए अत्याधुनिक उपकरण स्थापित करने आदि उपायों के साथ वायु प्रदूषण पर नियंत्रण किया जा सकता है।"-वैज्ञानिक हेड लेबोरेटरी जम्मू डिवीजन व राज्य बोर्ड समीक्षक डॉ. यशपाल
अस्थमा और सांस संबंधी रोगियों के लिए आफत
सीडी अस्पताल के एचओडी डा. राहुल गुप्ता के अनुसार वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने से लोगों में ब्रोंकाइटिस (खांसी), एलर्जी रिनटिक (नाक संबंधी एलर्जी), क्रानिक अबस्ट्रटिव (हवा संबंधी रोग) की शिकायत बढ़ी है। प्रदूषण से सांस संबंधी मरीजों के लिए आफत बढ़ी है।
राज्य में हर साल 70 हजार नए वाहन आ रहे
रियासत में हर साल करीब 70 हजार छोटे बड़े नए वाहनों की संख्या में इजाफा हो रहा है। दूसरे राज्यों से भी हजारों वाहनों की जम्मू-कश्मीर में रोजाना आमद हो रही है।
ओपीडी में 20 फीसदी तक अस्थमा के मरीज
पिछले कुछ साल में सीडी अस्पताल जम्मू में 15-20 प्रतिशत तक ओपीडी में अस्थमा के मरीजों की संख्या बढ़ी है। यहां सामान्य में 250-300 मरीज प्रतिदिन अस्पताल पहुंचते हैं। इनमें 40-50 मरीज अस्थमा से पीड़ित होते हैं। इसके अलावा अन्य सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों में भी बढ़ोतरी हुई है।