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गिरफ्तारी सिर्फ इसलिए नहीं हो कि पुलिस के पास इसका अधिकार है: बौर्नी
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बीएनएसएस के प्रासंगिक प्रावधानों पर आयोजित कार्यशाला में न्यायिक अकादमी के निदेशक वाई पी बौर्नी
जम्मू। न्यायिक अधिकारियों के साथ-साथ प्रशिक्षु सिविल जज के लिए न्यायिक अकादमी द्वारा भौतिक और वर्चुअल मोड के माध्यम से गिरफ्तारी, रिमांड और जमानत पर बीएनएस के प्रासंगिक प्रावधानों पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया।
इसमें न्यायपूर्ण, निष्पक्ष और त्वरित सुनवाई (संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत) सुनिश्चित करने में ट्रायल जजों की भूमिका पर चर्चा की गई। न्यायिक अकादमी के निदेशक वाईपी बौर्नी ने वर्ष 1994 में जोगिंदर कुमार बनाम यूपी राज्य मामले पर चर्चा की कि केवल इसलिए गिरफ्तारी नहीं की जानी चाहिए क्योंकि पुलिस के पास ऐसा करने की शक्ति है।
उन्होंने कहा कि संवैधानिक योजना में स्वतंत्रता को सर्वोच्चता दी गई है और गिरफ्तारी की शक्ति का प्रयोग केवल आवश्यकता पड़ने पर ही किया जाना चाहिए। इसलिए कानून के साथ संघर्ष करने के आरोप का सामना करने वाले किसी भी व्यक्ति को सबसे पहले न्यायालय के जमानत क्षेत्राधिकार का उपयोग करना चाहिए।
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उन्होंने सिद्धार्थ बनाम यूपी राज्य, सतेंद्र कुमार अंतिल बनाम सीबीआई आदि शीर्षक वाले सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों सहित उदाहरणों और दिशा-निर्देशों के प्रकाश में न्यायिक दृष्टिकोण पर जोर दिया। ब्यूरो
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इसमें न्यायपूर्ण, निष्पक्ष और त्वरित सुनवाई (संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत) सुनिश्चित करने में ट्रायल जजों की भूमिका पर चर्चा की गई। न्यायिक अकादमी के निदेशक वाईपी बौर्नी ने वर्ष 1994 में जोगिंदर कुमार बनाम यूपी राज्य मामले पर चर्चा की कि केवल इसलिए गिरफ्तारी नहीं की जानी चाहिए क्योंकि पुलिस के पास ऐसा करने की शक्ति है।
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उन्होंने कहा कि संवैधानिक योजना में स्वतंत्रता को सर्वोच्चता दी गई है और गिरफ्तारी की शक्ति का प्रयोग केवल आवश्यकता पड़ने पर ही किया जाना चाहिए। इसलिए कानून के साथ संघर्ष करने के आरोप का सामना करने वाले किसी भी व्यक्ति को सबसे पहले न्यायालय के जमानत क्षेत्राधिकार का उपयोग करना चाहिए।
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उन्होंने सिद्धार्थ बनाम यूपी राज्य, सतेंद्र कुमार अंतिल बनाम सीबीआई आदि शीर्षक वाले सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों सहित उदाहरणों और दिशा-निर्देशों के प्रकाश में न्यायिक दृष्टिकोण पर जोर दिया। ब्यूरो