जानिए क्यों है खास, बिक्रम चौक का फ्लाईओवर
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बिक्रम चौक पर बन रहे फ्लाईओवर की निर्माण सामग्री की जांच दिल्ली में कराई जा रही है। जम्मू में निर्माण सामग्री (सीमेंट एवं स्टील) की गुणवत्ता जांचने के लिए प्रयोगशाला नहीं होने के कारण सैंपल दिल्ली स्थित लैब को भेजे जा रहे हैं।
फ्लाईओवर निर्माण से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि जम्मू में बने हर फ्लाईओवर को इंडियन स्टैंडर्ड इंस्टीट्यूट के मानक से गुजरना पड़ा है।
बिक्रम चौक पर बन रहे फ्लाईओवर की निर्माण सामग्री की परख दिल्ली से करवाई जा रही है। फ्लाईओवर निर्माण की सामग्रियों में खासकर सीमेंट एवं स्टील के नमूने सीलबंद डिब्बे में हवाई मार्ग से दिल्ली स्थित संस्थान में भिजवाया जाता है। जहां से करीब पंद्रह दिनों में रिपोर्ट आ जाती है।
जांच के बाद ही शुरू होता है निर्माण कार्य
इसके बाद ही उस सामग्री को इस्तेमाल किया जाता है। आईएसआई (इंडियन स्टैंडर्ड इंस्टीट्यूट) से जांच के बाद ही सामग्री को इस्तेमाल योग्य तय किया जाता है।
इस फ्लाईओवर के अलावा जम्मू में अन्य निर्मित फ्लाईओवर में भी यही मानक इस्तेमाल किए गए हैं। इस संबंध में अधिकारी एसएन भट्ट का कहना है कि केमिकल टेस्ट के लिए नमूनों को दिल्ली भेजा जाता है।
रिपोर्ट पुख्ता होने के बाद ही इस्तेमाल किया जाता है। श्रीनगर में नेशनल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालाजी है, वहां पर इस प्रकार की टेस्ट में देरी हो जाती है, लिहाजा दिल्ली से कराना पड़ता है।
वहीं फ्लाईओवर के निर्माण में बरसात बाधक बन रही है। बारिश से गड्ढों की खुदाई आदि में रुकावट सामने आ रही है। फ्लाईओवर का निर्माण वर्ष 2016 तक पूरा करने का लक्ष्य है, जिसकी लागत 90 करोड़ बताई जा रही है।