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मौसम के बदले मिजाज ने किसानों को चिंता में डाला
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अरनिया। बीते करीब एक सप्ताह से भी अधिक समय से हल्की बारिश हो रही है। वहीं अपनी गेहूं फसल की कटाई को लेकर किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंचना शुरू हो चुकी हैं।
बैसाखी पर्व संपन्न होने के करीब दो सप्ताह बाद भी गेहूं फसल की कटाई अभी भी बारिश व आंधी के साये में खेतों में ही खड़ी है, जबकि आमतौर बैसाखी पर ही किसान गेहूं फसल की कटाई शुरू कर देते हैं। यहां तक कि करीब 40 प्रतिशत किसान बैसाखी पर्व के पहले सप्ताह में ही इस कार्य को संपन्न कर अगली फसल की रणनीति बनाने में लग जाते हैं। इस वर्ष दूसरा सप्ताह समाप्त होने वाला है, मगर अभी तक मात्र दो प्रतिशत किसानों ने इस कार्य को संपन्न नहीं किया है।
पूर्व सरपंच व किसान सौदागर मल, नेक राम, तरलोक सिंह, वीर सिंह, तिलक राज, अभिराज व अशु सैनी किसानों का कहना है कि गत वर्ष भी बिन मौसम बारिश ने गेहूं की फसल को प्रभावित कर नष्ट कर दिया था। इस बार शुरूआती दिनों में नष्ट तो नहीं हुई, मगर पकने के बाद जारी बेमौसम बारिश जरूर नष्ट कर देगी, जिसकी हमें चिंता सताए जा रही है। हालांकि शुक्रवार शाम करीब चार बजे के बाद मौसम साफ जरूर हो गया है। इसके बाद कोई भरोसा नहीं। अगर आने वाले दिनों में भी मौसम का मिजाज इसी प्रकार जारी रहा तो हम किसानों के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
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दोपहर के बाद चलीं कंबाइन मशीनें
रामगढ़। क्षेत्र के सीमावर्ती गांव में गेहूं की फसल की कटाई का काम जोर शोर से चल रहा। दो दिन से खड़ी कंबाइन मशीनें शुक्रवार दोपहर के बाद खेतों में कटाई का काम शुरू किया। वहीं करोना के चलते इस बार रामगढ़ क्षेत्र के किसानों को दूसरे राज्य से आने वाले मजदूर नहीं मिले हैं। इसलिए क्षेत्र के किसानों को कंबाइन मशीन का सहारा लेना पड़ रहा है। किसान नेता मोहन सिंह भट्टी, ओमप्रकाश सिंह, भगवान दास, पंच बिल्लू चौधरी, टिंकू चौधरी, रवि कुमार, हैप्पी चौधरी का कहना है कि क्षेत्र में इस बार गेहूं की फसल बहुत अच्छी है। दूसरा इस बार हमारे पशुओं के चारे के लिए चारा भी कम मिलेगा, जिससे किसानों को चिंता सता रही है।
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बैसाखी पर्व संपन्न होने के करीब दो सप्ताह बाद भी गेहूं फसल की कटाई अभी भी बारिश व आंधी के साये में खेतों में ही खड़ी है, जबकि आमतौर बैसाखी पर ही किसान गेहूं फसल की कटाई शुरू कर देते हैं। यहां तक कि करीब 40 प्रतिशत किसान बैसाखी पर्व के पहले सप्ताह में ही इस कार्य को संपन्न कर अगली फसल की रणनीति बनाने में लग जाते हैं। इस वर्ष दूसरा सप्ताह समाप्त होने वाला है, मगर अभी तक मात्र दो प्रतिशत किसानों ने इस कार्य को संपन्न नहीं किया है।
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पूर्व सरपंच व किसान सौदागर मल, नेक राम, तरलोक सिंह, वीर सिंह, तिलक राज, अभिराज व अशु सैनी किसानों का कहना है कि गत वर्ष भी बिन मौसम बारिश ने गेहूं की फसल को प्रभावित कर नष्ट कर दिया था। इस बार शुरूआती दिनों में नष्ट तो नहीं हुई, मगर पकने के बाद जारी बेमौसम बारिश जरूर नष्ट कर देगी, जिसकी हमें चिंता सताए जा रही है। हालांकि शुक्रवार शाम करीब चार बजे के बाद मौसम साफ जरूर हो गया है। इसके बाद कोई भरोसा नहीं। अगर आने वाले दिनों में भी मौसम का मिजाज इसी प्रकार जारी रहा तो हम किसानों के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
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दोपहर के बाद चलीं कंबाइन मशीनें
रामगढ़। क्षेत्र के सीमावर्ती गांव में गेहूं की फसल की कटाई का काम जोर शोर से चल रहा। दो दिन से खड़ी कंबाइन मशीनें शुक्रवार दोपहर के बाद खेतों में कटाई का काम शुरू किया। वहीं करोना के चलते इस बार रामगढ़ क्षेत्र के किसानों को दूसरे राज्य से आने वाले मजदूर नहीं मिले हैं। इसलिए क्षेत्र के किसानों को कंबाइन मशीन का सहारा लेना पड़ रहा है। किसान नेता मोहन सिंह भट्टी, ओमप्रकाश सिंह, भगवान दास, पंच बिल्लू चौधरी, टिंकू चौधरी, रवि कुमार, हैप्पी चौधरी का कहना है कि क्षेत्र में इस बार गेहूं की फसल बहुत अच्छी है। दूसरा इस बार हमारे पशुओं के चारे के लिए चारा भी कम मिलेगा, जिससे किसानों को चिंता सता रही है।