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मौसम के मिजाज को बिगड़ता देख किसानों के चेहरे मुरझाए
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बिश्नाह। मौसम के बदलते मिजाज से जहां पहले हुई बारिश के कारण किसान खेतों में इस बार गेहूं की फसल नहीं लगा पाए। वहीं धान की फसल भी खेतों में ही खराब हो गई। इसके चलते किसान इस बार खाली पड़े खेतों में सब्जियां या अन्य फसलें लगाने की तैयारी में थे। इस बीच मौसम के मिजाज से उनके चेहरे मुरझाने शुरू हो गए हैं।
देवली के किसान विजय चौधरी ने कहा कि वह मौजूदा समय में अपने खेतों में तरबूज की खेती करना चाहते थे, लेकिन मौसम के बिगड़ते मिजाज के कारण उन्होंने अब कुछ दिनों के लिए टाल दिया है। वहीं लसवाड़ा के किसान रमेश अपने खेतों में उड़द की खेती करना चाहते थे। चकबाना के शशीकांत ने अपने खेतों में भिंडी और करैले की खेती करना चाहते थे। वहीं मक्खनपुर के किसान अपने खेतों में तरबूज और बींस की खेती करना चाहते थे। परंतु कर नहीं पाए क्योंकि मौसम के बदले मिजाज ने उनकी राह रोक ली। इस बार क्षेत्र के अधिकतर इलाके में गेहूं की फसल नहीं लग पाने के कारण किसान सब्जियों की खेती करना चाहते थे। संवाद
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मौसम बिगड़ने से किसान मायूस
परगवाल। सीमा क्षेत्र में मंगलवार को मौसम के एक बार फिर बिगड़ने से किसानों ने चिंता जताई है। हालांकि क्षेत्र में बारिश तो नहीं हुई, लेकिन किसान वर्ग चिंतित दिखा। किसानों का कहना है कि अगर बारिश हो जाती है तो उनकी गेहूं की फसल प्रभावित हो सकती है। इससे पहले क्षेत्र में लगातार तेज धूप खिली रही, जिसे किसान वर्ग गेहूं की फसल के लिए अच्छा मान रहा था। स्थानीय किसान राकेश सिंह ने कहा कि तेज धूम खिलने से वह जंगली घास और कीड़ों से अपनी फसल को बचाने के लिए दवाइयों का छिड़काव में जुटे रहे, जिसके लिए धूप खिलने से वह जंगली घास और कीड़ों से अपनी फसल को बचाने के लिए दवाइयां के छिड़काव में जुट थे, जिसके लिए धूप की दरकार होती है, वहीं मौसम खराब होने से वह चिंतित हैं। संवाद
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किसानों के शत प्रतिशत केसीसी बनाए जाएंगे
सांबा। किसानों के शत प्रतिशत किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) बनाए जाने के दिए निर्देश पर जिला कृषि विभाग ने अभियान शुरू किया है। इसी संदर्भ में अधिकारियों ने फील्ड स्टाफ के साथ बैठक कर उन्हें निर्देश दिया कि 31 मार्च केसीसी बनाए जाएं। अनुसार अनुसार जिले में 41765 किसान हैं। जिनमें से 14750 किसानों के केसीसी बन चुके हैं। ऐसे में अब प्रत्येक किसान को केसीसी का लाभ देने के केंद्र सरकार के निर्देश पर विभाग काम कर रहा है। जिले के नौ ब्लॉक में पंचायत स्तर पर कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा, जिसमें कृषि, रजास्व और बैंक के कर्मचारी भी उपस्थित रहेंगें। संवाद
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देवली के किसान विजय चौधरी ने कहा कि वह मौजूदा समय में अपने खेतों में तरबूज की खेती करना चाहते थे, लेकिन मौसम के बिगड़ते मिजाज के कारण उन्होंने अब कुछ दिनों के लिए टाल दिया है। वहीं लसवाड़ा के किसान रमेश अपने खेतों में उड़द की खेती करना चाहते थे। चकबाना के शशीकांत ने अपने खेतों में भिंडी और करैले की खेती करना चाहते थे। वहीं मक्खनपुर के किसान अपने खेतों में तरबूज और बींस की खेती करना चाहते थे। परंतु कर नहीं पाए क्योंकि मौसम के बदले मिजाज ने उनकी राह रोक ली। इस बार क्षेत्र के अधिकतर इलाके में गेहूं की फसल नहीं लग पाने के कारण किसान सब्जियों की खेती करना चाहते थे। संवाद
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मौसम बिगड़ने से किसान मायूस
परगवाल। सीमा क्षेत्र में मंगलवार को मौसम के एक बार फिर बिगड़ने से किसानों ने चिंता जताई है। हालांकि क्षेत्र में बारिश तो नहीं हुई, लेकिन किसान वर्ग चिंतित दिखा। किसानों का कहना है कि अगर बारिश हो जाती है तो उनकी गेहूं की फसल प्रभावित हो सकती है। इससे पहले क्षेत्र में लगातार तेज धूप खिली रही, जिसे किसान वर्ग गेहूं की फसल के लिए अच्छा मान रहा था। स्थानीय किसान राकेश सिंह ने कहा कि तेज धूम खिलने से वह जंगली घास और कीड़ों से अपनी फसल को बचाने के लिए दवाइयों का छिड़काव में जुटे रहे, जिसके लिए धूप खिलने से वह जंगली घास और कीड़ों से अपनी फसल को बचाने के लिए दवाइयां के छिड़काव में जुट थे, जिसके लिए धूप की दरकार होती है, वहीं मौसम खराब होने से वह चिंतित हैं। संवाद
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किसानों के शत प्रतिशत केसीसी बनाए जाएंगे
सांबा। किसानों के शत प्रतिशत किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) बनाए जाने के दिए निर्देश पर जिला कृषि विभाग ने अभियान शुरू किया है। इसी संदर्भ में अधिकारियों ने फील्ड स्टाफ के साथ बैठक कर उन्हें निर्देश दिया कि 31 मार्च केसीसी बनाए जाएं। अनुसार अनुसार जिले में 41765 किसान हैं। जिनमें से 14750 किसानों के केसीसी बन चुके हैं। ऐसे में अब प्रत्येक किसान को केसीसी का लाभ देने के केंद्र सरकार के निर्देश पर विभाग काम कर रहा है। जिले के नौ ब्लॉक में पंचायत स्तर पर कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा, जिसमें कृषि, रजास्व और बैंक के कर्मचारी भी उपस्थित रहेंगें। संवाद