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Jammu News: जरूरत 250 लाख गैलन पानी की, उपलब्ध 225, मई में गहरा सकता संकट
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। शहर में मई से पेयजल किल्लत बढ़ सकती है। अभी दस फीसदी यानी 25 लाख गैलन पानी की कमी है। जैसे गर्मी बढ़ेगी है तो समस्या विकराल हो जाएगी। कारण-अब तक नए प्रोजेक्टों पर काम शुरू नहीं हो पाया। 2011 की जनगणना के अनुसार इस बार भी सात लाख लोगों को पानी की समस्या से दो चार होना पड़ेगा।
मौजूदा समय में 250 लाख गैलन पानी चाहिए। मगर 225 लाख गैलन पानी हर रोज मिल रहा है। यानी कुल आपूर्ति से दस फीसदी पानी कम है। प्रति व्यक्ति पानी की जरूरत 135 लीटर है। इसमें भी 13.5 लीटर पानी कम मिल रहा है। विभाग ने एक दशक में किसी भी परियोजना पर काम शुरू नहीं किया। यही नहीं, 20 ट्यूबवेलों की परियोजना भी परवान नहीं चढ़ पाई। इस कारण गर्मी के मौसम में पानी को लेकर हाहाकार मचता है। भीषण गर्मी में हालात यह हो जाते हैं कि दो दिन तक पानी नहीं मिलता। रोजमर्रा के काम निपटाने के लिए निजी टैंकर मंगवाने पड़ते हैं। पिछले साल मई में पानी को लेकर नई बस्ती, कालिका कॉलोनी, सतवारी, त्रिकुटा नगर व नरवाल में 15 दिन तक धरने-प्रदर्शन हुए थे।
अभी और काम करने की जरूरत
पूर्व मुख्य अभियंता अशोक ने कहा कि परियोजनाओं के लिए डीपीआर उनके कार्यकाल में भेजी गई। अगर धरातल पर लागू हो जाती थे तो शहर में पानी की किल्लत नहीं रहनी थी। अब भी शीतल, बोरिया, स्टोरेज प्लांट की क्षमता बढ़ाने की जरूरत है। साथ ही नए ट्यूबवेल लगाए जाएं। दस फीसदी पानी की कमी यहां से पूरी हो सकती है। लोगों को डेढ़ घंटे तक पानी हर रोज मिलना चाहिए।
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निजी टैंकर मंगवा कर करना पड़ता है काम
मोती बाजार के चंदन गुप्ता ने बताया कि हर साल गर्मी में पेयजल किल्लत का सामना करना पड़ता है। कई बार निजी टैंकर हायर करने पड़ते हैं। नीत मोहित ने बताया कि पुराने शहर अभी से पेयजल किल्लत गहरा गई है। कहीं पर गंदा पानी आ रहा है तो कहीं पानी ही नहीं आ रहा। वहीं, वार्ड नंबर 28 के पार्षद गौरव चोपड़ा के अनुसार गर्मी में शहरभर में पेयजल किल्लत होती है। अभी तक पुख्ता प्रबंध नहीं हो पाए।
पानी जरूरत के हिसाब से मुहैया करवाया जा रहा है। गर्मी में पानी की कमी आती है। मगर मांग के अनुरूप पानी मुहैया करवाया जाएगा।
- विजय गुप्ता, अभियंता, जल शक्ति विभाग
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जम्मू। शहर में मई से पेयजल किल्लत बढ़ सकती है। अभी दस फीसदी यानी 25 लाख गैलन पानी की कमी है। जैसे गर्मी बढ़ेगी है तो समस्या विकराल हो जाएगी। कारण-अब तक नए प्रोजेक्टों पर काम शुरू नहीं हो पाया। 2011 की जनगणना के अनुसार इस बार भी सात लाख लोगों को पानी की समस्या से दो चार होना पड़ेगा।
मौजूदा समय में 250 लाख गैलन पानी चाहिए। मगर 225 लाख गैलन पानी हर रोज मिल रहा है। यानी कुल आपूर्ति से दस फीसदी पानी कम है। प्रति व्यक्ति पानी की जरूरत 135 लीटर है। इसमें भी 13.5 लीटर पानी कम मिल रहा है। विभाग ने एक दशक में किसी भी परियोजना पर काम शुरू नहीं किया। यही नहीं, 20 ट्यूबवेलों की परियोजना भी परवान नहीं चढ़ पाई। इस कारण गर्मी के मौसम में पानी को लेकर हाहाकार मचता है। भीषण गर्मी में हालात यह हो जाते हैं कि दो दिन तक पानी नहीं मिलता। रोजमर्रा के काम निपटाने के लिए निजी टैंकर मंगवाने पड़ते हैं। पिछले साल मई में पानी को लेकर नई बस्ती, कालिका कॉलोनी, सतवारी, त्रिकुटा नगर व नरवाल में 15 दिन तक धरने-प्रदर्शन हुए थे।
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अभी और काम करने की जरूरत
पूर्व मुख्य अभियंता अशोक ने कहा कि परियोजनाओं के लिए डीपीआर उनके कार्यकाल में भेजी गई। अगर धरातल पर लागू हो जाती थे तो शहर में पानी की किल्लत नहीं रहनी थी। अब भी शीतल, बोरिया, स्टोरेज प्लांट की क्षमता बढ़ाने की जरूरत है। साथ ही नए ट्यूबवेल लगाए जाएं। दस फीसदी पानी की कमी यहां से पूरी हो सकती है। लोगों को डेढ़ घंटे तक पानी हर रोज मिलना चाहिए।
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निजी टैंकर मंगवा कर करना पड़ता है काम
मोती बाजार के चंदन गुप्ता ने बताया कि हर साल गर्मी में पेयजल किल्लत का सामना करना पड़ता है। कई बार निजी टैंकर हायर करने पड़ते हैं। नीत मोहित ने बताया कि पुराने शहर अभी से पेयजल किल्लत गहरा गई है। कहीं पर गंदा पानी आ रहा है तो कहीं पानी ही नहीं आ रहा। वहीं, वार्ड नंबर 28 के पार्षद गौरव चोपड़ा के अनुसार गर्मी में शहरभर में पेयजल किल्लत होती है। अभी तक पुख्ता प्रबंध नहीं हो पाए।
पानी जरूरत के हिसाब से मुहैया करवाया जा रहा है। गर्मी में पानी की कमी आती है। मगर मांग के अनुरूप पानी मुहैया करवाया जाएगा।
- विजय गुप्ता, अभियंता, जल शक्ति विभाग