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Jammu News: नहीं बुझ रही लालच की प्यास... मनमाने दाम पर टैंकर, शहर व गांवों में 800 से 1200 रुपये तक वसूली
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जम्मू। पारा बढ़ने के साथ ही पेयजल संकट गहरा गया है। हालत यह हो गई है कि सुबह-शाम नलों से पानी गायब है लेकिन लालच की प्यास बुझ नहीं रही। ऐसे में लोगों के लिए रोजमर्रा के जरूरी काम निपटाना बड़ी चुनौती बन गया है।
बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे लोग अब पूरी तरह निजी टैंकरों पर निर्भर हैं। मजबूरी का फायदा उठाकर टैंकर चालक मनमानी वसूली कर रहे हैं। शहर में प्रति टैंकर 800 से एक हजार रुपये और गांवों में 1200 रुपये तक लिए जा रहे हैं। हालांकि चार हजार लीटर क्षमता का टैंकर तीन सौ जबकि आठ हजार लीटर टैंकर का छह सौ रुपये रेट निर्धारित है।
बिजली कटौती के कारण मई और जून में सर्वाधिक टैंकरों की मांग रहती है लेकिन जल शक्ति विभाग के पास टैंकरों की कमी है। बुकिंग करने के बाद भी समय पर सरकारी टैंकर सुविधा नहीं मिल रही है।
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वार्ड नंबर 48 के पूर्व पार्षद शाम लाल बस्सन के अनुसार गर्मी में अकसर टैंकर माफिया की मनमानी चलती है। इसके लिए प्रशासन को सख्त आदेश जारी करना चाहिए। लोग आठ सौ से एक हजार रुपये तक अदा करने के लिए मजबूर हैं।
वार्ड नंबर 74 के पूर्व पार्षद शौकत अली ने कहा कि इलाके में अकसर पानी की किल्लत है जिस कारण मजबूरन निजी टैंकर हायर करने पड़ते हैं। प्रति टैंकर सात सौ से एक हजार रुपये तक देना पड़ रहा है। इसी तरह बस स्टैंड में दुकानदार राजन गुप्ता ने कहा कि दोपहर को पानी के कूलर खाली हो जाते हैं। प्रतिदिन पांच से आठ हजार यात्री गंतव्य के लिए रवाना होते हैं जो बूंद-बूंद के लिए परेशान होते हैं। तालाब तिल्लो के रोशन कुमार ने कहा कि उन्हें भी टैंकर के लिए आठ सौ रुपये तक देने पड़ रहे हैं।
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600 में से 200 कॉल्स में ही पानी की आपूर्ति
मौजूदा समय में रोज 600 से ज्यादा कॉल्स टैंकर के लिए आ रही हैं। पूरे शहर में मात्र आठ टैंकर सरकारी हैं जबकि 10 टैंकर निजी तौर पर हायर किए गए हैं। सीमित व्यवस्था से केवल 200 कॉल्स में ही पानी की आपूर्ति हो पा रही है। शेष बचे लोगों को पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। गंग्याल में पीने के पानी की भारी किल्लत है। स्थानीय संजय शर्मा और दिनेश कुमार का कहना है कि ट्यूबवेल होने के बावजूद हेड टैंक भरने के लिए मोटर चलाने वाला ऑपरेटर नहीं है। इसका सीधा असर वार्ड 56 की जनता पर पड़ रहा है। कई बार इस समस्या अधिकारियों के सामने उठाई लेकिन हर बार जिम्मेदार चुप्पी साध जाते हैं।
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टैंकरों के रेट निर्धारित किए गए हैं। कोई भी मनमाने रेट वसूल नहीं कर सकता है। अगर शिकायत मिलती है तो तुरंत कार्रवाई होगी।
-संजीव गुप्ता, एक्सइएन, जल शक्ति विभाग
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शहर में पानी की किल्लत नहीं होने दी जाएगी। अगर टैंकर के लिए अधिक पैसे लिए जा रहे हैं तो जांच करवाई जाएगी।
-डॉ. राकेश मन्हास, उपायुक्त
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बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे लोग अब पूरी तरह निजी टैंकरों पर निर्भर हैं। मजबूरी का फायदा उठाकर टैंकर चालक मनमानी वसूली कर रहे हैं। शहर में प्रति टैंकर 800 से एक हजार रुपये और गांवों में 1200 रुपये तक लिए जा रहे हैं। हालांकि चार हजार लीटर क्षमता का टैंकर तीन सौ जबकि आठ हजार लीटर टैंकर का छह सौ रुपये रेट निर्धारित है।
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बिजली कटौती के कारण मई और जून में सर्वाधिक टैंकरों की मांग रहती है लेकिन जल शक्ति विभाग के पास टैंकरों की कमी है। बुकिंग करने के बाद भी समय पर सरकारी टैंकर सुविधा नहीं मिल रही है।
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वार्ड नंबर 48 के पूर्व पार्षद शाम लाल बस्सन के अनुसार गर्मी में अकसर टैंकर माफिया की मनमानी चलती है। इसके लिए प्रशासन को सख्त आदेश जारी करना चाहिए। लोग आठ सौ से एक हजार रुपये तक अदा करने के लिए मजबूर हैं।
वार्ड नंबर 74 के पूर्व पार्षद शौकत अली ने कहा कि इलाके में अकसर पानी की किल्लत है जिस कारण मजबूरन निजी टैंकर हायर करने पड़ते हैं। प्रति टैंकर सात सौ से एक हजार रुपये तक देना पड़ रहा है। इसी तरह बस स्टैंड में दुकानदार राजन गुप्ता ने कहा कि दोपहर को पानी के कूलर खाली हो जाते हैं। प्रतिदिन पांच से आठ हजार यात्री गंतव्य के लिए रवाना होते हैं जो बूंद-बूंद के लिए परेशान होते हैं। तालाब तिल्लो के रोशन कुमार ने कहा कि उन्हें भी टैंकर के लिए आठ सौ रुपये तक देने पड़ रहे हैं।
600 में से 200 कॉल्स में ही पानी की आपूर्ति
मौजूदा समय में रोज 600 से ज्यादा कॉल्स टैंकर के लिए आ रही हैं। पूरे शहर में मात्र आठ टैंकर सरकारी हैं जबकि 10 टैंकर निजी तौर पर हायर किए गए हैं। सीमित व्यवस्था से केवल 200 कॉल्स में ही पानी की आपूर्ति हो पा रही है। शेष बचे लोगों को पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। गंग्याल में पीने के पानी की भारी किल्लत है। स्थानीय संजय शर्मा और दिनेश कुमार का कहना है कि ट्यूबवेल होने के बावजूद हेड टैंक भरने के लिए मोटर चलाने वाला ऑपरेटर नहीं है। इसका सीधा असर वार्ड 56 की जनता पर पड़ रहा है। कई बार इस समस्या अधिकारियों के सामने उठाई लेकिन हर बार जिम्मेदार चुप्पी साध जाते हैं।
टैंकरों के रेट निर्धारित किए गए हैं। कोई भी मनमाने रेट वसूल नहीं कर सकता है। अगर शिकायत मिलती है तो तुरंत कार्रवाई होगी।
-संजीव गुप्ता, एक्सइएन, जल शक्ति विभाग
शहर में पानी की किल्लत नहीं होने दी जाएगी। अगर टैंकर के लिए अधिक पैसे लिए जा रहे हैं तो जांच करवाई जाएगी।
-डॉ. राकेश मन्हास, उपायुक्त