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कश्मीर में हथियारों की कमी के कारण आतंकियों में बौखलाहट, टारगेट पर वीआईपी और प्रोटेक्टेड लोग
Wed, 30 Jan 2019 08:49 PM IST
दुष्यंत शर्मा
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 30 Jan 2019 08:49 PM IST
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Ravideep Sahi
- फोटो : अमर उजाला
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कश्मीर घाटी में मौजूदा दौर में आतंकियों के पास हथियारों की कमी पेश आ रही है। इसके चलते उनमें बौखलाहट देखने को मिली है। हथियार न होने के कारण उनके लिए वारदातों को अंजाम देना मुश्किल हो रहा है। हथियारों की कमी को पूरा करने के लिए वह सुरक्षा कर्मियों से हथियार लूटने की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं, लेकिन ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं जिससे ऐसी वारदातों को रोका जा सके।
दरअसल ऑपरेशन आल आउट का बढ़ता दबाव और कुछ समय से नियंत्रण रेखा पर चौकसी इतनी बढ़ी है कि घुसपैठ लगभग न के बराबर हो गई है। अगर आतंकी घुसपैठ की कोशिश करते भी हैं तो हथियारों के साथ नहीं कर पाते। अगर स्थानीय युवा आतंकवाद में शामिल होते भी हैं तो उनको देने के लिए भी आतंकी संगठनों के पास हथियार नहीं हैं।
सुरक्षा बल मानते हैं कि इस बौखलाहट के चलते आतंकी सॉफ्ट टारगेट की तलाश में रहते हैं और वीआईपी व अन्य प्रोटेक्टेड लोगों के निजी सुरक्षा कर्मियों को से हथियार लूटने की कोशिश कर रहे हैं।
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सीआरपीएफ के इंस्पेक्टर जनरल (श्रीनगर सेक्टर) रविदीप सिंह साही का कहना है कि जो आपरेशन चल रहे हैं उससे हमारा स्थिति के ऊपर पूरा कंट्रोल है। घुसपैठ भी नहीं हो पा रही, जिसके कारण यहां हथियारों की कमी हुई है।
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दरअसल ऑपरेशन आल आउट का बढ़ता दबाव और कुछ समय से नियंत्रण रेखा पर चौकसी इतनी बढ़ी है कि घुसपैठ लगभग न के बराबर हो गई है। अगर आतंकी घुसपैठ की कोशिश करते भी हैं तो हथियारों के साथ नहीं कर पाते। अगर स्थानीय युवा आतंकवाद में शामिल होते भी हैं तो उनको देने के लिए भी आतंकी संगठनों के पास हथियार नहीं हैं।
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सुरक्षा बल मानते हैं कि इस बौखलाहट के चलते आतंकी सॉफ्ट टारगेट की तलाश में रहते हैं और वीआईपी व अन्य प्रोटेक्टेड लोगों के निजी सुरक्षा कर्मियों को से हथियार लूटने की कोशिश कर रहे हैं।
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सीआरपीएफ के इंस्पेक्टर जनरल (श्रीनगर सेक्टर) रविदीप सिंह साही का कहना है कि जो आपरेशन चल रहे हैं उससे हमारा स्थिति के ऊपर पूरा कंट्रोल है। घुसपैठ भी नहीं हो पा रही, जिसके कारण यहां हथियारों की कमी हुई है।
वीआईपी को मूवमेंट की जानकारी देने को कहा गया
सुरक्षा बल आतंकियों की इन कार्रवाई पर रोक लगाने के लिए भी कदम उठा रहे ताकि आतंकियों को बेबस किया जा सके। इसके लिए सभी वीआईपी और प्रोटेक्टेड लोगों और सुरक्षा एजेंसियों के बीच कई बैठकें हुई जिनमें उनसे (वीआईपी/प्रोटेक्टेड) कहा गया है कि वो अपनी हर मूवमेंट के बारे में नजदीकी पुलिस स्टेशन या सुरक्षा कैंपों को जानकारी देते रहें।
74 हथियार लूटे गए
कश्मीर घाटी में दो साल से हथियार लूट के बहुत मामले देखने को मिले हैं। हथियार या तो किसी प्रोटेक्टेड व्यक्ति के निजी सुरक्षा कर्मी से या फिर सुरक्षा पिकेट्स से लूटे गए हैं, जिनमें बैंक सुरक्षा कर्मी, माइनारटी पोस्ट, दफ्तरों के सुरक्षा कर्मी आदि शामिल हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक दो साल में लूटे गए हथियारों की संख्या 74 है। इनमें 17 एके-47 राइफल, 23 एसएलआर और 14 इंसास राइफल शामिल हैं। इस बीच घाटी में जनवरी 2018 से अब तक करीब 270 आतंकी ऑपरेशन आल आउट के तहत मारे जा चुके हैं।
सुरक्षा बल आतंकियों की इन कार्रवाई पर रोक लगाने के लिए भी कदम उठा रहे ताकि आतंकियों को बेबस किया जा सके। इसके लिए सभी वीआईपी और प्रोटेक्टेड लोगों और सुरक्षा एजेंसियों के बीच कई बैठकें हुई जिनमें उनसे (वीआईपी/प्रोटेक्टेड) कहा गया है कि वो अपनी हर मूवमेंट के बारे में नजदीकी पुलिस स्टेशन या सुरक्षा कैंपों को जानकारी देते रहें।
74 हथियार लूटे गए
कश्मीर घाटी में दो साल से हथियार लूट के बहुत मामले देखने को मिले हैं। हथियार या तो किसी प्रोटेक्टेड व्यक्ति के निजी सुरक्षा कर्मी से या फिर सुरक्षा पिकेट्स से लूटे गए हैं, जिनमें बैंक सुरक्षा कर्मी, माइनारटी पोस्ट, दफ्तरों के सुरक्षा कर्मी आदि शामिल हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक दो साल में लूटे गए हथियारों की संख्या 74 है। इनमें 17 एके-47 राइफल, 23 एसएलआर और 14 इंसास राइफल शामिल हैं। इस बीच घाटी में जनवरी 2018 से अब तक करीब 270 आतंकी ऑपरेशन आल आउट के तहत मारे जा चुके हैं।