लोस के पैमाने पर तय होंगे विस के टिकट
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प्रदेश भाजपा में विधानसभा चुनाव के लिए टिकटों का आवंटन लोकसभा चुनाव के लिए बनाए गए पैमाने के आधार पर ही होगा।
इससे पिछले लगातार दो विधानसभा चुनाव हार चुके तीसरी दफा टिकट हासिल करने वाले दावेदारों के सियासी भविष्य पर संकट के बादल छा गए हैं।
गत 16 जुलाई के बाद नई दिल्ली और जम्मू में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुई बैठकों में इस संबंध में गहन विचार-विमर्श हुआ है।
नेकां-कांग्रेसियों को भाजपा में लाने का विरोध
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव जेपी नड्डा की अलगाववादी और पीपुल्स कांफ्रेंस नेता सज्जाद लोन से कश्मीर दौरे के दौरान हुई मुलाकात के अलावा कांग्रेस, जनता दल, नेकां और पीडीपी आदि विरोधी दलों से रुष्ट लोगों के लिए भाजपा में प्रवेश को हरि झंडी देने का भी संगठन में विरोध शुरू हो गया है।
पार्टी के संस्थापक सदस्यों को भी बाहर रखने पर सवाल उठने लगे हैं। प्रदेश भाजपा सूत्रों ने बताया कि लोकसभा चुनाव के दौरान अख्तियार किए गए पैमाने के मुताबिक विधानसभा चुनाव में टिकटों के आवंटन का आधार बनाए जाने से पार्टी में मुश्किलें खड़ी हो गई हैं।
भाजपा को कई सीटों पर नहीं मिल रहे प्रत्याशी
2008 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 11 सीटें जीती थी। इस चुनाव में आठ विधानसभा क्षेत्रों पर भाजपा के प्रत्याशी दूसरे नंबर रहे और चार सीटों पर पांच सौ से दो हजार वोटों से चुनाव हारे थे।
कम अंतर से चुनाव हारने वाली चारों सीटों में से तीन पर पुराने प्रत्याशियों के मुकाबले अन्य नेता भी भाजपा को नहीं मिल रहे।
इस दशा में प्रदेश भाजपा का एक खेमा लगातार दो दफा चुनाव हार चुके प्रत्याशियों को तीसरी दफा टिकट नहीं देने के नियम में छूट देने की पैरवी भी कर रहा है।