{"_id":"64cc0f2bd84caf417107186a","slug":"ut-ranking-tournament-jammu-news-c-10-jam1008-174470-2023-08-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"यूटी रैंकिंग टूर्नामेंट में खामियां : खेलने के साथ खिलाड़ी ही बन रहे रेफरी व स्कोरर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूटी रैंकिंग टूर्नामेंट में खामियां : खेलने के साथ खिलाड़ी ही बन रहे रेफरी व स्कोरर
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। एमए स्टेडियम के इंडोर हाॅल में जारी यूटी रैंकिंग बैडमिंटन टूर्नामेंट में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। टूर्नामेंट में खिलाड़ियों को मैच खेलने के साथ ही स्कोरर और रेफरी भी बनना पड़ रहा है। जबकि बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के नियमों के तहत ऐसे टूर्नामेंट में मुख्य रेफरी, मैच अंपायर और लाइन जज जरूरी होता है। टूर्नामेंट का असर राष्ट्रीय स्तर की चैंपियनशिप में खिलाड़ियों के प्रदर्शन कर पड़ेगा, क्योंकि वे खेल के जरूरी और बुनियादी नियमों से अवगत नहीं होंगे।
टूर्नामेंट का हिस्सा और स्कोरर बने एक खिलाड़ी ने कहा कि हमें स्कोरर व रेफरी बनने के लिए मजबूर किया जा रहा है। बैडमिंटन के पूर्व कोच ने नाम न छापने की शर्त पर बताया की नियमों के तहत निगरानी के लिए मुख्य रेफरी, लाइन जज और मैच रेफरी होना चाहिए। बैडमिंटन एसोसिएशन बच्चों से टूर्नामेंट में भाग लेने के नाम पर 600 रुपये शुल्क ले रही है। टूर्नामेंट से खिलाड़ियों का चयन नाॅर्थ जोन अंतरराज्यीय और जूनियर अंडर-19 के लिए किया जाना है। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर जाने वाली टीम का मूल्यांकन खुद खिलाड़ियों से ही करवाया जा रहा है, जो नियमों के खिलाफ है।
स्पोर्ट्स काउंसिल भी नहीं दे रही ध्यान
यूटी रैंकिंग चैंपियनशिप चल रही है, लेकिन जम्मू-कश्मीर स्पोर्ट्स काउंसिल की इसमें किसी तरह की निगरानी नहीं है। इसके कारण ही खेल एसोसिएशन अपनी मर्जी से ही खिलाड़ियों को रेफरी और स्कोरर बना रही है।
विज्ञापन
खिलाड़ियों को मैच आयोजन का अनुभव हो इसके लिए उनसे मैच स्कोरर और रेफरी के रूप में काम लिया जाता है। एसोसिएशन के पास लाइन जज, मैच रेफरी हैं, जो मैच का आयोजन करवाते हैं।
- बलबीर सिंह जम्वाल, महासचिव, जम्मू-कश्मीर बैडमिंटन एसोसिएशन
विज्ञापन
जम्मू। एमए स्टेडियम के इंडोर हाॅल में जारी यूटी रैंकिंग बैडमिंटन टूर्नामेंट में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। टूर्नामेंट में खिलाड़ियों को मैच खेलने के साथ ही स्कोरर और रेफरी भी बनना पड़ रहा है। जबकि बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के नियमों के तहत ऐसे टूर्नामेंट में मुख्य रेफरी, मैच अंपायर और लाइन जज जरूरी होता है। टूर्नामेंट का असर राष्ट्रीय स्तर की चैंपियनशिप में खिलाड़ियों के प्रदर्शन कर पड़ेगा, क्योंकि वे खेल के जरूरी और बुनियादी नियमों से अवगत नहीं होंगे।
टूर्नामेंट का हिस्सा और स्कोरर बने एक खिलाड़ी ने कहा कि हमें स्कोरर व रेफरी बनने के लिए मजबूर किया जा रहा है। बैडमिंटन के पूर्व कोच ने नाम न छापने की शर्त पर बताया की नियमों के तहत निगरानी के लिए मुख्य रेफरी, लाइन जज और मैच रेफरी होना चाहिए। बैडमिंटन एसोसिएशन बच्चों से टूर्नामेंट में भाग लेने के नाम पर 600 रुपये शुल्क ले रही है। टूर्नामेंट से खिलाड़ियों का चयन नाॅर्थ जोन अंतरराज्यीय और जूनियर अंडर-19 के लिए किया जाना है। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर जाने वाली टीम का मूल्यांकन खुद खिलाड़ियों से ही करवाया जा रहा है, जो नियमों के खिलाफ है।
विज्ञापन
स्पोर्ट्स काउंसिल भी नहीं दे रही ध्यान
यूटी रैंकिंग चैंपियनशिप चल रही है, लेकिन जम्मू-कश्मीर स्पोर्ट्स काउंसिल की इसमें किसी तरह की निगरानी नहीं है। इसके कारण ही खेल एसोसिएशन अपनी मर्जी से ही खिलाड़ियों को रेफरी और स्कोरर बना रही है।
विज्ञापन
खिलाड़ियों को मैच आयोजन का अनुभव हो इसके लिए उनसे मैच स्कोरर और रेफरी के रूप में काम लिया जाता है। एसोसिएशन के पास लाइन जज, मैच रेफरी हैं, जो मैच का आयोजन करवाते हैं।
- बलबीर सिंह जम्वाल, महासचिव, जम्मू-कश्मीर बैडमिंटन एसोसिएशन