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मुफ्ती के विवादास्पद बयान पर संसद में घिरी सरकार

Tue, 03 Mar 2015 10:25 AM IST
Updated Tue, 03 Mar 2015 10:25 AM IST
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Uproar in Lok Sabha over cm Mufti's Pakistan, Hurriyat comment

जम्मू-कश्मीर में शांतिपूर्ण चुनाव का श्रेय पाकिस्तान, हुर्रियत और आतंकवादियों को देने संबंधी सूबे के सीएम मुफ्ती मोहम्मद सईद के बयान मामले में सरकार संसद में बुरी तरह घिर गई है।

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एकजुट विपक्ष ने इस मुद्दे पर न केवल प्रधानमंत्री की सफाई और बयान के खिलाफ निंदा प्रस्ताव की मांग करते हुए जबर्दस्त हंगामा किया बल्कि उसने केंद्र पर सत्ता के लिए राष्ट्रहित को कुर्बान करने का आरोप भी लगाया।
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हालांकि, सरकार ने मुफ्ती के बयान से पल्ला झाड़ते हुए शांतिपूर्ण चुनाव का श्रेय सूबे के मतदाताओं, सेना और चुनाव आयोग को दिया। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने इस दौरान मुफ्ती के उस बयान का भी खंडन किया, जिसमें कहा गया था कि उन्होंने अपनी इस राय से पीएम नरेंद्र मोदी को भी अवगत कराया था।
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लोकसभा में सरकार के जवाब से असंतुष्ट एकजुट विपक्ष ने वाकआउट किया। राज्यसभा में भी सरकार को विपक्ष के भारी हंगामे के बीच सफाई पेश करनी पड़ी। इस बीच, पीडीपी के विधायकों ने संसद पर हमला मामले के दोषी अफजल गुरु के साथ अन्याय होने की बात कर विवाद को और हवा दे दी है।

अफजल की फांसी को न्याय के सिद्धांत के खिलाफ बताते हुए पार्टी ने उसका शव सौंपे जाने की मांग की है। मुफ्ती के बयान के खिलाफ कांग्रेस ने लोकसभा में प्रश्नकाल स्थगित करने और कार्यस्थगन प्रस्ताव का अलग-अलग नोटिस दिया था।

दोनों सदनों में विपक्ष का जबर्दस्त हंगामा

Uproar in Lok Sabha over cm Mufti's Pakistan, Hurriyat comment

लोकसभा में शून्यकाल में कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल ने मुफ्ती के बयान को राष्ट्रविरोधी करार दिया। वेणुगोपाल ने कहा कि यह बयान पीएम की उपस्थिति में शपथ ग्रहण के तत्काल बाद दिया गया। इस दौरान मुफ्ती ने यह भी कहा कि वह अपनी इस राय से पीएम को भी अवगत करा चुके हैं।

इसके बाद उन्होंने पीएम से सफाई मांगने के साथ ही मुफ्ती के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की मांग की। वेणुगोपाल की इस मांग का एकजुट विपक्ष ने समर्थन किया। इसके बाद भारी हंगामे के बीच गृह मंत्री ने कहा कि सरकार मुफ्ती के बयान के साथ नहीं है।

सरकार दो टूक शब्दों में कहती है कि सूबे में शांतिपूर्ण चुनाव का श्रेय राज्य की जनता, सेना और चुनाव आयोग को जाता है। इसके बाद विपक्ष मुफ्ती के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने और पीएम की सफाई की मांग करते हुए हंगामा करने लगा। मांग स्वीकार न किया जाने के बाद विपक्ष के सदस्य वाकआउट कर गए।

राज्यसभा में भी कांग्रेस के शांतारमण नाईक ने इस मामले को उठाते हुए पीएम से सफाई मांगी और निंदा प्रस्ताव पारित करने की मांग की। इस दौरान जदयू के केसी त्यागी ने भाजपा पर सत्ता के लिए अपने सिद्धांतों और राष्ट्रहित को गिरवी पर रखने का आरोप लगाया।

बसपा प्रमुख मायावती ने भी मुफ्ती के बयान की निंदा की और कहा कि शांतिपूर्ण चुनाव का श्रेय चुनाव आयोग को जाता है। लोकसभा की तरह राज्यसभा में संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने बयान से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि सरकार मानती है कि शांतिपूर्ण चुनाव का श्रेय राज्य की जनता, चुनाव आयोग और सेना को है।

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