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उधमपुर: चिनैनी में सुबह का स्कूल शाम को बन जाता है घर, ऐसे में बच्चे पढ़ रहे अक्षर
Wed, 05 Apr 2023 04:21 PM IST
kumar गुलशन कुमार
रोहित गुप्ता, चिनैनी
रोहित गुप्ता, चिनैनी
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Wed, 05 Apr 2023 04:21 PM IST
सार
आखला गांव में एक स्कूल ऐसा है जो दिन में डेस्क के साथ स्कूल में तबदील हो जाता है और शाम को छुट्टी के बाद घर में बदल जाता है। चिनैनी से करीब पांच किलोमीटर दूर गांव में प्राइमरी स्कूल निजी इमारत के एक कमरे में चल रहा है।
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स्कूल में पढ़ रहे बच्चे
- फोटो : रोहित गुप्ता
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विस्तार
जिला उधमपुर के चिनैनी की पंचायत चलयाड़ के आखला गांव में एक स्कूल ऐसा है जो दिन में डेस्क के साथ स्कूल में तबदील हो जाता है और शाम को छुट्टी के बाद घर में बदल जाता है। चिनैनी से करीब पांच किलोमीटर दूर गांव में प्राइमरी स्कूल निजी इमारत के एक कमरे में चल रहा है। करीब 26 छात्र और छात्राएं शिक्षा हासिल करने के लिए पहुंचते हैं। यहां न तो लाइब्रेरी है, न ही किसी प्रकार का खेल का मैदान।
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ऐसे में सवाल उठता है कि इन बच्चों का शारीरिक व मानसिक विकास कैसे होगा? सरकारी अव्यवस्था को कटघरे में खड़ा करता नया प्रयोग भविष्य को दांव पर लगा रहा है। हालात इस प्रकार हैं कि पहली से पांचवीं तक कक्षाएं एक ही समय में लगती हैं यानी सभी बच्चों को दो शिक्षक पीरियड अनुसार पढ़ाते हैं।
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इस कारण शिक्षा का स्तर गिर रहा है। स्कूल खुलने का समय सुबह 10 बजे है और शाम 4 बजे बंद होते ही कमरा बुनियादी जरूरतों में काम आता है। स्थानीय निवासी ने स्कूल को पीएमएवाई के तहत बनाया है और 2014 से एक कमरे में ही कक्षाएं चल रही हैं। इसी में 2 बेड भी एक ओर लगे हैं जिसका इस्तेमाल छुट्टी के बाद मकान मालिक करते हैं।
बैक टू विलेज में दस लाख रुपये रखे, पर काम नहीं शुरू
पंचायत प्रतिनिधियों की मानें तो स्कूल की इमारत के लिए कई बार गुहार लगाई जा चुकी है। मगर सुनवाई नहीं हो पाई। यहां एक साथ सभी कक्षाओं के छात्र पढ़ते है जिन्हें लगता होगा कि ऐसे ही पढ़ा जाता है। उन्होंने सरकार से विशेष ध्यान देने की मांग की।
चलयाड़ की सरपंच गायत्री देवी ने कहा कि बैक टू विलेज में स्कूल की इमारत के लिए दस लाख रुपये रखे गए लेकिन कार्य नहीं शुरू हुआ। जहां स्कूल चल रहा है उससे मकान मालिकों को भी परेशानी आती है।
प्रार्थना सभा व आधी छुट्टी के दौरान परेशानी
पंच परवीन अख्तर ने बताया कि नौ साल से स्कूल निजी इमारत के एक कमरे में चल रहा है। अभी तक इसे अपनी इमारत नहीं मिली। स्थानीय वासी तारिक हुसैन ने कहा कि स्कूल में करीब 26 बच्चे पढ़ाई करते हैं जो इसी गांव से हैं। मुश्ताक हुसैन ने बताया कि प्रार्थना सभा और आधी छुट्टी के दौरान बच्चों को सबसे ज्यादा मुश्किलें सामने आती हैं। इसी तरह शबनम अख्तर ने कहा कि छोटे से कमरे में बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं और खेलने के लिए ग्राउंड तक नहीं है। आखला स्कूल की जमीन योजना में रखी गई है। सेंक्शन मिलने का इंतजार है। फिलहाल उच्च अधिकारियों को मामले से अवगत करवाया जा चुका है। उम्मीद है कि जल्द दिक्कत दूर हो जाएगी। -ओम प्रकाश, जेडईपीओ।
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