जम्मू में पहाड़ी खिसकने से पूरा परिवार दफन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कश्मीर के बारामूला में जहां भूस्खलन से दो लोगों की जान चली वहीं जम्मू के डोडा में मकान गिरने से परिवार के सात लोगों की मौत हो गई।
बेमौसम बारिश काल बन गई है। उधमपुर जिला मुख्यालय से करीब 43 किलोमीटर दूर देसा के दवाल कुंड गांव में शुक्रवार की सुबह पहाड़ी खिसकने से भारी मलबा एक मकान पर आ गिरा। इससे घर ध्वस्त हो गया और उस परिवार के सभी सात दफन हो गए। मृतकों में चार छोटे बच्चे भी शामिल हैं।
देर शाम तक सेना ने मलबे से मां और एक बेटी के शव को बाहर निकाला था। बाकी को खोलने के लिए अभियान जारी था। जानकारी के अनुसार जिस समय हादसा हुआ, उस समय घर में सतीश कुमार (36), उसकी पत्नी सुषमा देवी, उसकी बेटियां अंजना (8), बिंदू (3), बेटे केवल (5), रेवन (1) और सतीश का साला सुरेश कुमार (16) थे।
सभी को घर से भागने का मौका तक नहीं मिला। स्थानीय लोगों ने हालांकि तुरंत मलबा हटाना शुरू किया। आठ किलोमीटर की दूरी पर स्थित सेना की पोस्ट और पुलिस को भी सूचित किया। सड़क ठीक नहीं होने के कारण सेना भी काफी देर से पहुंची।
एसएसपी डोडा जाहिद नसीम मन्हास ने बताया कि भारी बारिश के बावजूद सेना की 10 आरआर और पुलिस पैदल ही घटना स्थल की ओर निकल पड़े। साढ़े चार बजे के कारीब मलबा हटाने का काम लोगों के साथ मिलकर शुरू किया गया। करीब आठ बजे सुषमा और उसकी एक बेटी का शव निकाला जा चुका था।
कई और गांवों में खतरा बरकरार
देसा के दवाल कुंड में एक परिवार के सात लोगों के दफन होने से उन गांवों के लोगों कांप उठे हैं, जो पहाड़ी की ढलान पर बसे हैं। दरअसल कई दिन से प्रेम नगर, कुड धार, गंदोह के ढढकाई, चिल्ली हदल मना, कलैतरान, ककौटी, चालर चनयास, घघरौट, कास्तीगढ़ आदि गांव पर मलबा आने का खतरा बरकरार है।
कई गांवों में दर्जनों घरों को प्रशासन ने खाली करवा दिया है। लोग सरकारी जगहों या अपने रिश्तेदारों के यहां शरण लिए हुए हैं। पांच दिन से लगातार भारी बारिश होने के कारण आपातकालीन स्थिति उत्पन्न हो गई है। करीब एक महीने से डोडा-जम्मू राजमार्ग बंद पड़ा है। जबकि लिंक मार्ग डोडा, भद्रवाह, किश्तवाड़, ठाठरी, भागवा, बिमना, गंदोह, कुल्हांड बंद पड़े हैं।
डीसी भूपिंद्र कुमार ने कहा कि हम पूरे जिले की स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। जहां से सूचना मिल रही है, वहां से लोगों को निकाल कर सरकारी इमारतों, पंचायत घरों में रखा जा रहा है। कई जगह टेंट और कंबल भी दिए गए हैं। बता दें कि मुख्यालय में ही स्थित नई बस्ती भी किसी समय मलबे के ढेर में बदल सकती है। सरकार से सहायता की मांग की गई है।
मशरूम लेने जंगल गए थे दोनों
उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले के ऊड़ी में भूस्खलन से शुक्रवार को दो लोगों की मौत हो गई। यह लोग लिंबर इलाके के जंगल में मशरूम तोड़ने गए थे। मिली जानकारी के अनुसार, ऊड़ी के लिब्बर इलाके में भारी बारिश के चलते जमीन खिसकने से देवदार का एक पेड़ उखड़ गया और इसके नीचे चार लोग दब गए, जिनमें से दो की घटना स्थल पर ही मौत हो गई जबकि दो घायल हो गए।
पुलिस ने मरने वालों की पहचान मोहम्मद जब्बार वार और मोहम्मद दिलावर मीर के तौर पर की है। घायल जावेद अहमद डार और अब्दुल रहमान डार को नजदीक के अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। इसके अलावा बडगाम, बारामुला आदि जिलों से जमीन खिसकने की खबरें मिल रही हैं।
जिससे कई मकानों को क्षति पहुंची है, लेकिन किसी के मरने की खबर नहीं है। वहीं पिछले एक सप्ताह के भीतर भूस्खलन से मरने वालों की संख्या 18 तक जा पहुंची है। ऊड़ी से पहले बडगाम जिले के लादेन गांव में 16 लोग मकान के ढह जाने से मलबे तले दब कर मर गए थे।
आरएस पुरा में दो मकानों की छत गिरी
बारिश से कमजोर हो चुके मकानों के क्षतिग्रस्त होने का सिलसिला शुरू हो गया है। शुक्रवार को दो मकानों की छत गिरने का मामला प्रकाश में आया। जानकारी के अनुसार सीमावर्ती गांव शाहपुर टोकनवाली निवासी सतपाल के मकान की छत गिर गई।
राहत की बात यह रही कि इसमें किसी को चोट नहीं आई। बताया जाता है कि घर की छत गिरने से पहले ही परिवार के सदस्य सुरक्षित स्थान पर चले गए थे।
बाद में गांव की पंचायत के सरपंच चौधरी स्वर्ण सिंह ने गांव के लोगों को बुलाकर कमरे में पड़ा समान दूसरे स्थान पर रखवाया। इसके अलावा गांव टिंडेकलां में मोहन लाल के घर की छत गिर गई। लोगों ने एसडीएम से पीड़ित परिवार को राहत राशि देने की मांग की है।
सात कच्चे मकान जमींदोज
कठुआ। मौसम के रौद्र रूप से जिले के मैदानी इलाकों से लेकर पर्वतीय इलाकों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। कहीं भारी बर्फबारी हुई तो कहीं झमाझम बारिश। नतीजतन सड़क संपर्क मार्ग से लेकर बिजली सेवाएं ठप हो गईं। मौसम ने कई कच्चे घरों को भी जमींदोज कर दिया। बारिश से हुए नुकसान के आंकड़े अभी एकत्रित किए जा रहे हैं, जिससे नुकसान का पैमाना खासा बड़ा होने के आसार हैं।
पर्वतीय इलाकों में तड़के से शुरू हुई बर्फबारी दोपहर को तेज हो गई। इससे बनी सब डिवीजन के पर्वतीय इलाकों में ताजा बर्फ की मोटी चादर बिछ गई। डंडी गुट्टू गांव में तो तमाम मार्ग बर्फ से ढंक गए हैं। कमोबेश ऐसी ही स्थिति छत्तरगलां, सरथल, ढग्गर, नुकनाली, भंडार व सटे इलाकों में बन गई है।
बर्फबारी की वजह से जहां बनी-भद्रवाह सड़क मार्ग बुरी तरह से प्रभावित हो गया है, वहीं बनी-ढग्गर और बनी-बसोहली में बारिश की वजह से आई पस्सियों ने यातायात ठप कर दिया है। प्रशासन के अधिकृत आंकड़ों के अनुसार मूसलाधार बारिश से सात कच्चे मकान पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं।
अलबत्ता किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। इधर कठुआ शहर व आसपास के इलाकों में भी बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया। पिछले कई दिनों से बारिश की फुहार का सिलसिला शुक्रवार को तेज झड़ी में तब्दील हो गया। हालांकि बारिश कुछ देर के लिए ही हुई।
मौसम विभाग ने कठुआ शहर में दिन के समय हुई बारिश का पैमाना 11 मिलीमीटर दर्ज किया है, जबकि तापमान का अधिकतम स्तर 26 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 14 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। स्कॉस्ट जम्मू की कठुआ एग्रोमेट यूनिट के प्रभारी डॉ. एपी सिंह के अनुसार अगले चौबीस घंटों में भी बारिश होने के आसार हैं।