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सीमावर्ती ग्रामीणों पर भारी बीतेंगी दो रातें

Sun, 25 Jan 2015 12:10 PM IST
Updated Sun, 25 Jan 2015 12:10 PM IST
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two days critical for border area residents

गणतंत्र दिवस के मद्देनजर आतंकी हमले की आशंका और पाकिस्तानी गोलाबारी के डर से अरनियां सेक्टर के सीमावर्ती गांवों के लोगों ने अपना बोरिया-बिस्तर बांध रखा है। इसलिए कि हालात बिगड़ने की सूरत में वह आननफानन में घरबार छोड़कर कर सुरक्षित स्थानों की ओर भाग सकें।

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दहशत के साये में जी रहे इन ग्रामीणों पर अगली दो रातें भारी गुजरती दिख रही हैं। पिछले दिनों से हो रही पाकिस्तानी गोलाबारी ने पूरे अरनियां सेक्टर में गांवों के लोगों का चैन छीन लिया है। सेक्टर के पिंडी चाढका, चंगिया, काकू दे कोठे, रंगपुर तरेबा, कोटला कैंप, कडवाल, जग्वाल आदि गांवों के लोगों के कान हर समय सीमा की ओर लगे रहते हैं।
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उनकी निगाहें भारतीय सुरक्षा बलों के जवानों समेत पाकिस्तानी क्षेत्र की हर गतिविधि पर लगी हुई हैं। पंचायत चंगिया के सरपंच डाक्टर रघुवीर सिंह, तरेबा के सरपंच जगदीश राज का कहना है कि पिछले कई दिनों से पाकिस्तानी रेंजर छोटे हथियारों से गोलाबारी कर रहे हैं। यह कहना गलत नहीं होगा कि यह सब गणतंत्र दिवस के चलते हो रहा है।

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ग्रामीणों ने कर रखी है पलायन की तैयारी

two days critical for border area residents

सीमा पर गोलाबारी कर पाकिस्तान हर हाल में आतंकियों को भारतीय क्षेत्र में धकेलने की फिराक में है। आतंकी इस राष्ट्रीय पर्व पर बड़ी वारदात करने की कोशिश में हैं। हालांकि, भारतीय जवान पूरी तरह मुस्तैद हैं और वह पाकिस्तान की हर हरकत का मुंह तोड़ जवाब देंगे। इस सबके बावजूद सरहद से लगे गांवों के लोग पूरी रात जागते हुए गुजार रहे हैं।

उन्हें आशंका है कि गणतंत्र दिवस के चलते पाकिस्तान कभी भी गोलाबारी कर सकता है। इस हालात में पलायन की सूरत में ग्रामीणों ने पहले से ही तैयारी कर रखी है। ग्रामीणों ने नकदी, खाने पीने का सामान, कंबल आदि सामान बांध रखा है। चंगिया के पंच चरणदास ने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए लोगों ने अचानक गांव छोड़ने की स्थिति के लिए बंदोबस्त कर रखे हैं।

ग्रामीणों ने कहा कि शाम ढलते ही खाना खाकर कमरों में चलते जाते हैं, लेकिन रात भर उनको नींद नहीं आती। कान सरहद की ओर लगे रहते हैं। कुछ ग्रामीणों ने कहा कि वह शाम को अतिरिक्त खाना लेते हैं ताकि विस्थापित होने पर कुछ राहत मिल सके।

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