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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Trying to restore peace in Kashmir

शांति मिशन के तहत कश्मीर में कम उम्र के पत्थरबाजों की हो सकती है रिहाई

Wed, 24 Aug 2016 10:25 AM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र, अमर उजाला/जम्मू
राघवेंद्र नारायण मिश्र, अमर उजाला/जम्मू Updated Wed, 24 Aug 2016 10:25 AM IST
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Trying to restore peace in Kashmir
श्रीनगर में सुरक्षा बलों पर पथराव करते युवक - फोटो : PTI
जम्मू कश्मीर में केंद्र के शांति मिशन में अग्रत: सकलम शास्त्रम, पृष्ठत: सशर: धनु:- की नीति के आधार पर रणनीति तैयार की गई है। इसके तहत सभी पक्षों से वार्ता के जरिए स्थिति सामान्य बनाने की कोशिश होगी लेकिन उपद्रवियों और आतंकियों को किसी तरह की रियायत की गुंजाइश नहीं है।
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सभी पक्षों से वार्ता के लिए पहल हो रही है और दूसरी ओर हिंसक प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए बीएसएफ को खुली छूट भी होगी।  केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के प्रस्तावित कश्मीर दौरे में आंतरिक सुरक्षा की समीक्षा के साथ नागरिक संगठनों से बातचीत संभव है लेकिन फिलहाल वार्ता में अलगाववादियों की शिरकत के आसार नहीं हैं।
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शासन के सूत्रों के मुताबिक शांति मिशन के दूसरे दौर में विश्वास बहाली के लिए कम उम्र के पत्थरबाजों की रिहाई संभव है। 

ताजा इनपुट के मुताबिक घाटी में 611 आतंकी

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श्रीनगर में ह‌िंसक प्रदर्शन - फोटो : PTI
सेना के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक कश्मीर घाटी में फैले आतंकियों की संख्या अब तक 70 से 90 के बीच होने का अनुमान था लेकिन ताजा इनपुट से जानकारी मिली है कि यह आकंड़ा 611 है।

इसमें पाकिस्तान से घुसपैठ कर आतंकियों के अलावा स्थानीय कश्मीर आतंकी भी शुमार हैं। लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन इस बार मिलकर काम कर रहे हैं। हिंसक प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों के कैंपों पर हमले से लेकर पत्थरबाजी की घटनाओं में दोनों आतंकी संगठनों ने संयुक्त रणनीति के तहत काम किया है।

इस इनपुट के बाद ही घाटी में 12 साल बाद बीएसएफ को उतारने का फैसला लिया गया है। सेना और बीएसएफ अलग-अलग इलाकों में आतंकियों की तलाश में सघन अभियान चलाएंगे और इस पर शांति प्रयासों का कोई असर नहीं होगा। 

'संविधान के दायरे में ही होगी बातचीत'

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श्रीनगर में गश्त करते सुरक्षा बल के जवान - फोटो : PTI
मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती श्रीनगर के कुछ इलाकों से कर्फ्यू और प्रतिबंध पूरी तरह उठाने के लिए दबाव बना रहीं हैं। महबूबा के केंद्र से अनुरोध और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात के बाद केंद्र ने सभी पक्षों को शांति प्रयासों में शामिल करने की पहल का निर्णय लिया है।

बातचीत में संविधान के दायरे की शर्त के कारण अलगाववादी इसके लिए फिलहाल तैयार नहीं हैं। महबूबा की ओर से अलगाववादियों से संपर्क किया गया है। मुस्लिम समाज के कुछ प्रमुख लोगों और धार्मिक प्रमुखों से राजनाथ की मुलाकात कराने की कोशिश जारी है।

राजनाथ के दो दिन के दौरे से केंद्र यह संदेश देने की कोशिश में है कि अमन पसंद लोगों के लिए वार्ता के द्वार खुले हैं। महबूबा ने कहा है कि अशांति फैलाने वालों में पांच प्रतिशत से कम लोग हैं। इसलिए उनसे निपटने के क्रम में बाकी 95 प्रतिशत लोगों को अनजाने में दंड नहीं मिलना चाहिए। केंद्र ने भी इस पर सहमति जताई है। 
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