जम्मू-कश्मीर: 50 फीसदी यात्रियों के साथ बसें चलाने को तैयार नहीं ट्रांसपोर्टर
मार्च से यात्री वाहन बंद हैं, जिसके कारण आम लोग तो परेशान हैं ही। साथ ही इससे जुड़े चालक व सहचालक आर्थिक तंगी का शिकार हो रहे हैं।
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जम्मू, उधमपुर, कठुआ, सांबा समेत प्रदेश में अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हो गई, लेकिन मेटाडोर बसें सड़कों से गायब हैं। ट्रांसपोर्टर सरकार द्वारा तय 50 प्रतिशत यात्री क्षमता के साथ परिचालन शर्त मानने को तैयार नहीं हैं। ट्रांसपोर्टर सरकार से 50 प्रतिशत यात्री किराया बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार इस महामारी में लोगों पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालना चाहती है।
सोमवार को मिनी बस यूनियन के अध्यक्ष विजय चिब ने कहा कि हम 50 प्रतिशत यात्री क्षमता के साथ परिचालन के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगातार ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं। ऐसे में 50 प्रतिशत यात्रियों के साथ परिचालन करना घाटे का सौदा है। मार्च में हमने इसीलिए गाड़ियां नहीं चलाने का फैसला लिया था। मंगलवार को ऑल जम्मू-कश्मीर ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन की अध्यक्षता में प्रेस वार्ता होगी, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी।
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जेकेएसआरटीसी की सेवाओं में हो रहा विस्तार
अनलॉक की प्रक्रिया शुरू होने के साथ जम्मू-कश्मीर स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट (जेकेएसआरटीसी) की सेवाओं में विस्तार किया जा रहा है। मांग के अनुरूप अंतर जिला रूट्स पर बसों को चलाया जा रहा है। जेकेएसआरटीसी ने सभी जिलों के लिए दो-दो बसों को रखा है। वहीं शहर में इलेक्ट्रिक बसों के साथ अतिरिक्त बसों को लगाया है।