कश्मीरी पंडितों की ट्रांजिट कालोनी के विरोध में हिंसा फैलाने की साजिश
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जम्मू-कश्मीर विधानसभा द्वारा कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी का प्रस्ताव अलगाववादियों को रास नहीं आ रहा है। अलगाववादी कश्मीरी पंडितों के लिए अलग ट्रांजिट कालोनी बनाने के विरोध में माहौल बनाने में जुट गए हैं। अलगाववादियों के विरोध के कारण ही पंडितों के लिए कालोनी बनाने का काम शुरू नहीं हो पाया है। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री विकास पैकेज के तहत पहले तीन हजार आवास बनाने को मंजूरी दी थी जिसे बढ़ाकर अब छह हजार कर दिया गया है।
सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार श्रीनगर, बारामुला और शोपियां में हिंसा फैलाने की साजिश रची जा रही है। अनंतनाग और पुलवामा में भी स्थानीय युवकों को भड़काने इनपुट सुरक्षा एजेंसियों को मिले हैं। अलगाववादियों ने मस्जिद कमेटियों के साथ बैठकें की हैं। अगले शुक्रवार से विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला शुरू करने की तैयारी है।
आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद और पहले से बारामुला हिंसा और उपद्रव के दृष्टिकोण से सबसे अधिक संवेदनशील रहा है। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक, हिंसक प्रदर्शनों के कारण अक्सर बारामुला में कर्फ्यू लगाने की स्थिति पैदा होती रही है।
दो वर्ष में बारामुला में 627 हिंसक घटनाएं
हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी ने कश्मीरी पंडितों के लिए ट्रांजिट कालोनी बनाने के विरोध में आंदोलन की चेतावनी दी है। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने दिल्ली दौरे के क्रम में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात में कश्मीरी पंडितों के लिए अलग कालोनी बनाने का काम जल्द शुरू करने का भरोसा दिया था। इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से फंडिंग की जानी है और राज्य सरकार को जमीन मुहैया करानी है। भूमि की पहचान भी कर ली गई है। विधानसभा से सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित होने के बाद राज्य सरकार ने पंडितों की कालोनी बनाने का काम आगे बढ़ाने का एलान किया था।
एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, दो साल में बारामुला में हिंसा की 627 घटनाएं हुईं जिसके बाद कर्फ्यू लगाना पड़ा। इसी तरह श्रीनगर में 507, शोपियां में 166, पुलवामा में 302, अनंतनाग में 261, गांदरबल में 64, बडगाम में 10, कुलगाम में 54, कुपवाड़ा में 19 और बांदीपोरा में 59 हिंसक घटनाओं को ध्यान में रखते हुए कर्फ्यू लगाया गया।