Train to Kashmir: टनल टी-1 की खुदाई का काम पूरा, कश्मीर की रेल से जोड़ने के मार्ग में एक और बाधा दूर
उधमपुर श्रीनगर बारामुला रेल लिंक परियोजना के तहत जिला के सेरबड़ में बनाए जा रहे 3.2 किलोमीटर लंबी टनल टी-1 की खुदाई का काम पूरा कर लिया गया है।
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महत्वाकांक्षी उधमपुर श्रीनगर बारामुला रेल लिंक परियोजना के तहत जिला के सेरबड़ में बनाए जा रहे 3.2 किलोमीटर लंबी टनल टी-1 की खुदाई का काम पूरा कर लिया गया है। नरम चट्टानें और पानी के रिसाव के चलते यह सुरंग बड़ी चुनौती बनी हुई थी। ऐसे में इंजीनियरों विदेशी विशेषज्ञों को सलाह लेकर इस चुनौती को पार कर लिया है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उधमपुर से श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक (यूएसबीआरएल) परियोजना आजादी के बाद देश में शुरू की गई शायद सबसे कठिन रेलवे लाइन परियोजना है। रेल मंत्री ने बुधवार को लोकसभा में भाजपा सांसदों जामयांग त्सेरिंग नामग्याल, विद्युत बरन महतो और जुगल किशोर शर्मा के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में 272 किलोमीटर की रेल परियोजना में से 161 किमी चालू हो चुकी है। उन्होंने कहा, कटड़ा-बनिहाल (111 किमी) खंड पर काम जारी है।
कश्मीर के इन क्षेत्र में दोहरीकरण के सर्वेक्षण को मंजूरी
बारामुला-बनिहाल खंड (135.5 किमी) के दोहरीकरण, बारामुला-उड़ी (50 किमी), सोपोर-कुपवाड़ा की नई लाइन (33.7 किमी), अवंतीपोरा-शोपियां की नई लाइन (27.6 किमी) और अनंतनाग-बिजबेहरा-पहलगाम (77.5 किमी) की नई लाइन के सर्वेक्षण को भी मंजूरी दे दी गई है।
रेलवे का पहला केबल-आधारित पुल अंजी खड्ड पर बनकर तैयार
कटड़ा-बनिहाल खंड में मुख्य रूप से सुरंग बनाना शामिल है। कटड़ा-बनिहाल खंड की कुल लंबाई के 87 प्रतिशत भाग में सुरंगें शामिल हैं। इनमें से सुरंग टी-49 की अधिकतम लंबाई 12.77 किमी है, जो देश की सबसे लंबी रेलवे सुरंग होगी। भारतीय रेलवे का पहला केबल-आधारित पुल अंजी खड्ड पर बनाया गया है। अंजी खड्ड पर बनाया गया पहला केबल ब्रिज भी गरड़धार से त्रिकुटा पर्वत की पहाडियों से मिल चुका है।
इस के अलावा विश्व का सबसे ऊंचा रेलवे आर्क ब्रिज भी चिनाब दरिया पर बना दिया गया है, जोकि बक्कल व कोड़ी स्टेशन को आपस में जोड़ेगा। ट्रेन के जरिये श्रीनगर जाने का सपना पूरा होने को है।
कटड़ा से बनिहाल तक कुल 111 किलोमीटर लंबी इस परियोजना में ट्रेन 97 किलोमीटर का रास्ता टनल के माध्यम से हो कर पार करेगी। इसके लिए छोटे बड़े कुल 27 टनल बनाए गए हैं।
67 किलोमीटर एस्केप टनल भी बने हैं। परियोजना पर कुल 26 पुल बड़े और 11 छोटे पुल हैं, जिन पर से ट्रेन गुजरेगी।