पीडीपी ने भाजपा के सामने रखी ये नई शर्तें
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रियासत में नई सरकार के गठन पर चुप्पी तोड़ते हुए पीडीपी संरक्षक एवं पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने पहली बार स्वीकार किया कि भाजपा के साथ सरकार बनाने के लिए बातचीत ट्रैक टू पर है।
पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के ट्वीट पर राज्यसभा चुनाव के मद्देनजर पीडीपी-भाजपा गठबंधन पर की गई टिप्पणी के अगले ही दिन मुफ्ती ने कहा कि पार्टी अपने सिद्धांतों से पीछे नहीं हटेगी।
गठबंधन सरकार शर्तों के साथ बनेगी जिनमें पाकिस्तान के साथ बातचीत शुरू करने और अफस्पा को समयबद्ध तरीके से हटाना प्रमुख होगा।
इनके अलावा रियासत का मुस्लिम बहुल चरित्र बहाल रखने और सलाल व ढुलहस्ती पनबिजली परियोजनाओं को एनएचपीसी से लेकर जम्मू कश्मीर को सौंपने जैसे मुद्दों पर वह ठोस आश्वासन चाहती है।
पाक से वार्ता और अफस्पा प्रमुख मुद्दे: मुफ्ती
सांसद एवं पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के दोबारा निर्विरोध अध्यक्ष चुने जाने के बाद गांधीनगर स्थित पार्टी मुख्यालय के बाहर पार्टी नेताओं को संबोधित करते हुए मुफ्ती ने कहा कि ट्रैक टू से बातचीत आगे बढ़ी तो न्यूनतम साझा कार्यक्रम (सीएमपी) पर चर्चा होगी और इसे तैयार किया जाएगा।
इसके बाद ही सरकार गठन पर ठोस वार्ता होगी। पीडीपी सत्ता की लोभी नहीं है और मुद्दों पर सहमति होने तक जनमत का सौदा नहीं करेंगे। 2002 में पीडीपी ने 16 सीटें हासिल कर कांग्रेस के साथ मुद्दों पर आधारित सरकार बनाई थी।
उस वक्त भी केंद्र में एनडीए की सरकार थी। इस बार भी खंडित जनादेश के बाद स्थिति लगभग वैसी है। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने भी कहा कि जम्मू कश्मीर के लोगों के हित में ही गठबंधन पर कोई फैसला होगा।
मुफ्ती ने कहा कि कहा कि पाकिस्तान पड़ोसी देश है और बातचीत बंद करके पड़ोसी को बदला नहीं जा सकता। रियासत में शांति के लिए पाकिस्तान से बातचीत शुरू होनी चाहिए।
सीमा पर विश्वास बहाली के कदमों को बढ़ावा देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि रंगराजन कमेटी की सिफारिशों के अनुसार सलाल और ढुलहस्ती परियोजनाओं को जम्मू कश्मीर को सौंपने की तरफ ठोस कदम की जरूरत है।
ये हैं पीडीपी की नई शर्तें
2. सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (अफस्पा) को हटाना
3. पाकिस्तान से बातचीत की प्रक्रिया शुरू हो
4. सीमा पर विश्वास बहाली के कदम
5. सलाल और ढुल हस्ती विद्युत परियोजना रियासत को सौंपी जाए।