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पर्यटन पर घाटी की हिंसा की मार
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Sat, 16 Apr 2016 09:31 PM IST
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हजारों पर्यटकों ने घाटी आने का प्लॉन किया रद्द
- फोटो : FILE PHOTO
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श्रीनगर में चल रही हिंसा ने घाटी में पर्यटन सीजन को कैश करने की कवायदों को जोरदार धक्का दिया है। घाटी के होटलों और हाउसबोट में अप्रैल, मई और जून महीने के लिए रिकार्डतोड़ बुकिंग थी। लेकिन हिंसा की वजह से अप्रैल महीने में 70 फीसदी से अधिक बुकिंग कैंसल हो गई है। इससे पर्यटन कारोबारियों में मायूसी छा गई है।
दरअसल, वर्ष 2015 में पीक सीजन वर्ष 2014 में आई बाढ़ की वजह से प्रभावित हुआ था। मौजूदा वर्ष के पीक सीजन के पर्यटन कारोबारियों को काफी उम्मीद थी। लेकिन पीक सीजन शुरू होते ही घाटी में ताजा हिंसा हो गई। इससे पर्यटन कारोबारियों को नुकसान तो हुआ ही, साथ ही पर्यटन विभाग की कवायद को भी झटका लगा है।
विभाग ने पिछले साल देशभर में रिकार्ड रोड शो किए और देशभर के पर्यटकों को कश्मीर आने का न्योता दिया। लेकिन हिंसा की वजह से काफी हद तक यह प्रयास प्रभावित हुआ है। कश्मीर होटल एसोसिएशन के प्रधान शौकत चौधरी का कहना है कि पहले ही कहा था कि सब कुछ हालात पर निर्भर करेगा। कश्मीर में कभी कुदरत की मार पड़ती है तो कभी प्रशासन की।
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सरकार को इन हालातों को बनने से पहले की काबू पाना चाहिए था। लगभग 2400 होटलों में बुकिंग थी, जो आधी भी नहीं रह गई। वहीं हाउस बोट एसोसिएशन का भी कहना है कि बहुत बुरा असर पड़ा है। पीक सीजन से उन्हें काफी उम्मीदें थी, लेकिन सब कुछ तहस नहस हो गया है।
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दरअसल, वर्ष 2015 में पीक सीजन वर्ष 2014 में आई बाढ़ की वजह से प्रभावित हुआ था। मौजूदा वर्ष के पीक सीजन के पर्यटन कारोबारियों को काफी उम्मीद थी। लेकिन पीक सीजन शुरू होते ही घाटी में ताजा हिंसा हो गई। इससे पर्यटन कारोबारियों को नुकसान तो हुआ ही, साथ ही पर्यटन विभाग की कवायद को भी झटका लगा है।
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विभाग ने पिछले साल देशभर में रिकार्ड रोड शो किए और देशभर के पर्यटकों को कश्मीर आने का न्योता दिया। लेकिन हिंसा की वजह से काफी हद तक यह प्रयास प्रभावित हुआ है। कश्मीर होटल एसोसिएशन के प्रधान शौकत चौधरी का कहना है कि पहले ही कहा था कि सब कुछ हालात पर निर्भर करेगा। कश्मीर में कभी कुदरत की मार पड़ती है तो कभी प्रशासन की।
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सरकार को इन हालातों को बनने से पहले की काबू पाना चाहिए था। लगभग 2400 होटलों में बुकिंग थी, जो आधी भी नहीं रह गई। वहीं हाउस बोट एसोसिएशन का भी कहना है कि बहुत बुरा असर पड़ा है। पीक सीजन से उन्हें काफी उम्मीदें थी, लेकिन सब कुछ तहस नहस हो गया है।