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3 साल पहले पीओके भाग गए दो पूर्व आतंकियों सहित तीन लोगों को सेना ने सीमा से पकड़ा, पूछताछ जारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Updated Tue, 02 Oct 2018 12:36 AM IST
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सीमा से पकड़े गए दो पूर्व आतंकी सहित तीन लोग
- फोटो : अमर उजाला
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उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले से वर्ष 2015 में गायब हुए तीन लोगों को एलओसी के करीब से सोमवार को पकड़ा गया। वह पीओके से अपने घर लौट रहे थे। तीनों नवंबर 2015 में उस पार चले गए थे और अब लौट रहे थे। फिलहाल तीनों पुलिस की हिरासत में हैं और उनसे पूछताछ चल रही है। इन तीनों के लापता होने के बाद काफी हंगामा मचा था। चिनार कोर के तत्कालीन जीओसी सतीश दुआ ने इस मामले में जांच के आदेश दिए थे।
पुलिस ने बताया कि इन तीनों को सेना की 3 जैकलाई द्वारा केरन सेक्टर में बलबीर पोस्ट के करीब उस समय धर दबोचा गया जब वह इस पार घुसपैठ कर रहे थे। इनमें त्रेहगाम कुपवाड़ा का अली मोहम्मद शेख, दर्दपोरा क्रालपोरा कुपवाड़ा का गुलाम जिलानी खटाना व मीर हुसैन खटाना शामिल हैं।
अली मोहम्मद आतंकी रह चुका है जो पहली बार 1990 में पाकिस्तान गया था और 1991 में वापस आया था। 1996 में फिर से जाने के बाद 1997 में लौटा था। बाद में उसने सेना के सामने समर्पण कर दिया। मीर हुसैन अल बदर का आतंकी था जो 1990 में पाकिस्तान गया था और 1992 में लौटकर समर्पण किया था। बाद में रिहा होने पर 1996 में दुबारा पाकिस्तान गया था और उसी साल बीएसएफ के सामने समर्पण किया। गुलाम जिलानी 2015 में पहली बार पीओके गया था।
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पुलिस ने बताया कि इन तीनों को सेना की 3 जैकलाई द्वारा केरन सेक्टर में बलबीर पोस्ट के करीब उस समय धर दबोचा गया जब वह इस पार घुसपैठ कर रहे थे। इनमें त्रेहगाम कुपवाड़ा का अली मोहम्मद शेख, दर्दपोरा क्रालपोरा कुपवाड़ा का गुलाम जिलानी खटाना व मीर हुसैन खटाना शामिल हैं।
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अली मोहम्मद आतंकी रह चुका है जो पहली बार 1990 में पाकिस्तान गया था और 1991 में वापस आया था। 1996 में फिर से जाने के बाद 1997 में लौटा था। बाद में उसने सेना के सामने समर्पण कर दिया। मीर हुसैन अल बदर का आतंकी था जो 1990 में पाकिस्तान गया था और 1992 में लौटकर समर्पण किया था। बाद में रिहा होने पर 1996 में दुबारा पाकिस्तान गया था और उसी साल बीएसएफ के सामने समर्पण किया। गुलाम जिलानी 2015 में पहली बार पीओके गया था।
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सेना के जवान पर लगाया था आरोप
वर्ष 2015 में इनके गायब होने पर परिवार वालों ने कहा था कि टेरिटोरियल आर्मी के मंजूर अहमद, उन्हें नौकरी का लालच देकर साथ ले गया था। उसके बाद से उनका कोई अता पता नहीं है। मंजूर को कोर्ट के निर्देश पर गिरफ्तार कर लिया गया था।