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स्थानीय निकायों के चुनाव से कश्मीर में उभर सकता है तीसरा मोर्चा, आतंकी सबसे बड़ी चुनौती

Sat, 15 Sep 2018 09:56 PM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र, अमर उजाला, जम्मू
राघवेंद्र नारायण मिश्र, अमर उजाला, जम्मू Updated Sat, 15 Sep 2018 09:56 PM IST
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Third Front can emerge in jammu Kashmir local body elections
Syed Ali Shah Geelani - फोटो : PTI

स्थानीय निकायों के चुनाव में इस बार पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस पिछले दरवाजे से प्रत्याशी उतारेगी। कश्मीर में मुख्य धारा के दो प्रमुख दलों द्वारा चुनाव बहिष्कार के एलान के बावजूद ग्राउंड लेबल के कार्यकर्ता चुनाव की तैयारी कर रहे हैं। वैसे राजभवन ने इन दलों को मनाने का प्रयास जारी रखा है। राजभवन ने संकेत दिए हैं कि चुनाव के मुद्दे पर किसी सर्वदलीय बैठक का आयोजन नहीं किया जाएगा। दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के राजभवन के प्रतिनिधियों से अलग-अलग बातचीत चल रही है। 

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नेकां और पीडीपी के चुनाव बहिष्कार के एलान से कश्मीर में तीसरे मोर्चे के आकार लेने की संभावना बढ़ी है। पीडीपी के छह विधायक बागी हो चुके हैं और सज्जाद लोन के नेतृत्व में तीसरे मोर्चे का भाजपा अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन दे रही है। भाजपा महासचिव राम माधव के लगातार कश्मीर दौरे के क्रम में तीसरे मोर्चे का ब्लू प्रिंट तैयार किया जा चुका है। नेकां के वर्चस्व को तोड़ने के लिए पीडीपी के गठन में भी भाजपा ने परदे के पीछे से अहम भूमिका निभाई थी। अब तीसरा मोर्चे को मजबूत कर भविष्य में तालमेल से सरकार गठन की व्यूह रचना की गई है। निकाय चुनाव में इस मोर्चे को संगठन विस्तार का मौका मिल सकता है। 
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नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने पहले चुनाव को कश्मीर के विकास के जरूरी बताया था। बाद में उन्होंने यूटर्न लेते हुए बहिष्कार का एलान कर दिया। नेकां के सूत्र बताते हैं कि 35 ए पर सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के बयान और सुप्रीम कोर्ट में एडिशनल सालिसीटर जनरल के स्टैंड के बाद नेकां मे रणनीति में बदलाव किया। नेकां के स्टैंड के बाद उसके पारंपरिक प्रतिद्वंदी पीडीपी  के पास बहिष्कार के एलान के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। लिहाजा पीडीपी भी चुनाव बहिष्कार के एलान में शामिल हो गई। इन दलों के फैसले के बाद निचले स्तर के कार्यकर्ताओं में रोष बढ़ा। वर्षों से चुनाव की तैयारी कर रहे कार्यकर्ता बहिष्कार के मूड में नहीं हैं। नतीजतन पार्टी सिंबल के बगैर कई कार्यकर्ता चुनाव में उतर सकते हैं। 
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नेकां और पीडीपी के नेतृत्व ने संकेत दिए हैं चुनाव लड़ने के इच्छुक कार्यकर्ताओं पर रोक नहीं लगाई जाएगी। इन पार्टियों को पहले लग रहा था कि आतंकियों की धमकी और अलगाववादियों के बहिष्कार के एलान के बाद प्रत्याशी मिलना मुश्किल हो जाएगा। लेकिन जमीन स्तर पर कार्यकर्ताओं की बड़ी जमात चुनाव से अलग नहीं रहना चाहती है लिहाजा इन दलों ने उत्साही प्रत्याशियों को पिछले दरवाजे से समर्थन के रणनीति बनाई है।
 

भाजपा को मिल सकता है फायदा

Third Front can emerge in jammu Kashmir local body elections
BJP
नेकां और पीडीपी द्वारा चुनाव बहिष्कार के एलान का सीधा फायदा भाजपा को मिल सकता है। पार्टी लंबे अरसे से घाटी में संगठन विस्तार की कोशिश में जुटी है। भाजपा के दर्जन भर कार्यकर्तां पर आतंकियों ने हमले किए हैं। इसके बावजूद भाजपा को कई क्षेत्रों में पूर्णकालिक कार्यकर्ता मिल रहे हैं। निकाय चुनाव में नेकां और पीडीपी की गैरमौजूदगी भाजपा को संगठन विस्तार का मौका मुहैया करा सकती है। चुनाव में शिरकत के मुद्दे पर कांग्रेस हां और ना की सियासी उधेड़बन का शिकार रही। यह स्थिति भी भाजपा के पक्ष में दिखती है।
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